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1300 ऑक्सीजन सिलिंडर का हिसाब नहीं दे पाया ईडन अस्पताल, सख्त कार्रवाई की सिफारिश

Thu, 03 Jun 2021 02:27 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 03 Jun 2021 02:27 AM IST
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Eden Hospital could not give account of 1300 oxygen cylinders, recommended strict action
चंडीगढ़। जरूरत से ज्यादा ऑक्सीजन खपत के मामले में यूटी प्रशासन ने जांच के बाद ईडन अस्पताल को दोषी पाया है। जांच के दौरान अस्पताल 1300 ऑक्सीजन सिलिंडर का हिसाब नहीं दे पाया। इसकी वजह से शहर में ऑक्सीजन सप्लाई के नोडल अधिकारी यशपाल गर्ग ने अस्पताल पर कार्रवाई की सिफारिश की है।
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अस्पताल पर लगे आरोपों की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया गया था, जिसने अपनी रिपोर्ट जमा कर दी है। कहा गया है कि ईडन अस्पताल ने अधिक मात्रा में मेडिकल ऑक्सीजन का इस्तेमाल किया है। मरीजों को अगर हाई फ्लो से भी ऑक्सीजन दी जाती है, फिर भी रोजाना खपत 150 से 160 सिलिंडर से ज्यादा नहीं हो सकती है। रिपोर्ट के आधार पर यशपाल गर्ग ने डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट-2005 के तहत या फिर चंडीगढ़ एपीडेमिक डिजीज, कोविड-19 रेगुलेशन व अन्य किसी एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं ताकि अन्य अस्पतालों के लिए भी उदाहरण पेश हो।
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यूटी प्रशासन के अनुसार, ईडन अस्पताल 50 कोविड बेड के लिए रोजाना 350 के करीब ऑक्सीजन सिलिंडरों की रिफिलिंग करा रहा था, जबकि 40 कोविड बेड वाला दूसरा निजी अस्पताल 90 सिलिंडरों में काम चला रहा था। ऑक्सीजन सिलिंडरों के इस्तेमाल में भारी अंतर की वजह से प्रशासन को गड़बड़ी का शक था। इस वजह से प्रशासन इस पूरे मामले की जांच के आदेश दिए थे। पीसीएस अधिकारी जगजीत सिंह की अध्यक्षता में इस कमेटी का गठन किया गया था, जिसमें जीएमएसएच-16 के डॉ. मनजीत सिंह और जीएमसीएच-32 के डॉ. मनप्रीत सिंह भी शामिल थे।
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कोटा तय करने के बाद अचानक कम हो गई खपत
कमेटी ने रिपोर्ट में कहा है कि 200 से 350 की खपत उचित नहीं हो सकती है। अस्पताल की तरफ से रोजाना मरीजों की सूची, उनके भर्ती और इलाज का कारण और ऑक्सीजन की खपत का रिकॉर्ड नहीं पेश किया गया, इसलिए जमाखोरी, ब्लैक मार्केटिंग और अवैध रूप से ऑक्सीजन सिलिंडरों की अन्य जगह सप्लाई की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है। कमेटी ने कहा है कि बार-बार निवेदन के बावजूद अस्पताल की तरफ से उन्हें रोजाना मरीजों की लिस्ट और ऑक्सीजन सिलिंडरों की खपत के बारे में रिकॉर्ड नहीं दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि जब प्रशासन की तरफ ऑक्सीजन का डेली कोटा तय किया गया, उसके बाद एक दम ऑक्सीजन की खपत कम हो गई, जिसका अस्पताल के पास कोई जवाब नहीं था। प्रशासन ने इसमें 10 दिन की रिपोर्ट भी पेश की है, जिसमें मरीज लगभग समान होने के बावजूद ऑक्सीजन की खपत काफी अलग-अलग थी। तय दिशानिर्देशों के विपरीत ऑक्सीजन का हाईफ्लो इस्तेमाल करने से मरीजों पर गलत प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा मरीजों को उस मात्रा में ऑक्सीजन के लिए भुगतान करना पड़ा होगा, जिसकी उनके लिए जरूरत भी नहीं होगी।
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