फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Panchkula News ›   Displeasure: Member of Bill Monitoring Committee wrote a letter to Assembly Speaker Gyanchand Gupta, demanding that guidelines be prepared for private hospitals to stop arbitrariness

नाराजगी : बिल मानीटरिंग कमेटी के सदस्य ने विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता को पत्र लिखकर की मांग, मनमर्जी रोकने के लिए निजी अस्पतालों के लिए गाइडलाइन करें तैयार

Thu, 15 Jul 2021 02:12 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 15 Jul 2021 02:12 AM IST
विज्ञापन
Displeasure: Member of Bill Monitoring Committee wrote a letter to Assembly Speaker Gyanchand Gupta, demanding that guidelines be prepared for private hospitals to stop arbitrariness
पंचकूला। कोरोना पर निजी अस्पतालों की मनमर्जी और ओवर चार्जिंग पूरी तरह से हावी रही। हालात तो यह हो गए हैं कि जिस इंजेक्शन का कोर्स ही छह का है अस्पतालों ने बिलिंग के चक्कर में दस-दस इंजेक्शन मरीज को लगा डाले। इतना ही नहीं, बाजारों में मिलने वाली दवाओं का चार गुणा दाम कुछ निजी अस्पतालों ने बेड पर मरणासन्न पड़े मरीजों के तीमारदारोें से वसूलने में कोई कोताही नहीं की। यह कहना है बिल मानीटरिंग कमेटी पंचकूला के सदस्य और हरियाणा स्टेट फार्मेसी काउंसिल के सदस्य बीबी सिंगल का। निजी अस्पतालों की इसी मनमर्जी पर अपने ऑब्जर्वेशन को लेकर उन्होंने हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज और हरियाणा के विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता को एक पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि निजी अस्पतालों के लिए गाइडलाइन तय की जाए जिससे कि निजी अस्पताल मनमर्जी न कर सकें।
विज्ञापन

गाइडलाइन जारी की गई थी यहां
हरियाणा सरकार ने 25 जून 2020 को, 18 सितंबर 2020, 4 मई 2021को अलग आर्डर से माध्यम से निजी अस्पतालों के लिए गाइडलाइन जारी की थी कि अस्पतालों ने कैसे चार्ज करना है। पंचकूला में बिलों को स्वीकार किया गया। अब तक निजी अस्पतालों से 35 लाख रुपये वापस करवाए गए हैं। इसके साथ ही अस्पतालों का ऑडिट चल रहा है। जब मानीटरिंग कमेटी ने बिल देखे तो यह स्पष्ट हो गया कि निजी अस्पतालों ने काफी ज्यादा रेट लगाए।
विज्ञापन

सरकार के तय रेट से चार गुणा रेट
जिस टेस्ट का रेट सरकार ने 2100 तय किया उसका रेट 7200 लगाया गया, वहीं जो टेस्ट चार सौ रुपये में तय किया गया वही टेस्ट अस्पतालों में दो हजार रुपये लगाया। इसके साथ ही आईएल छह टेस्ट का रेट अस्पतालों ने 4500 रुपये तक चार्ज किया जबकि यह सरकार ने एक हजार रुपये ही तय किया था। इसके साथ ही अस्पतालों ने आईसीयू का प्रतिदिन का रेट दस हजार रुपये लगाया इसके साथ ही वेंटिलेटर, अल्फा बेड, डाक्टर विजिट, फीजियोथेरेपिस्ट विजिट, डाइटीशियन और नर्सिंग के रेट अलग से चार्ज किए। यदि पहले ही दाम दस हजार रुपये लिए जा रहे थे तो यह रेट क्यों चार्ज किए गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

सर्जिकल सामान पर ओवर चार्जिंग
मरीजों के लिए मंगवाए गए सर्जिकल सामान पर ओवर चार्जिंग की गई। इनसे दवाएं एमआरपी से ज्यादा चार्ज की गईं। ऐसे ऐसे ब्रांड लिखे गए जिनके स्थानापन्न काफी सस्ती दरों पर मिलती हैं। आईसीयू तक में दो दो ऑक्सीमीटर की बिलिंग की गई। इसके साथ ही रेमडेसिविर इंजेक्शन जिसका कोर्स ही छह का होता है, दस-दस दिखा दिए गए।
सुझाव
हर बीमारी के लिए हरेक विभाग के रेट तय करने चाहिए।
सरकार को कैटेगरी बनाकर रेट तय करना चाहिए।
मरीज को दवाएं बाहर से खरीदने का विकल्प होना चाहिए।
रीमबर्समेंट वाले मामलों में भी बिल स्प्ष्ट होने चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed