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हेरिटेज इमारत में विकास कार्य जरूरी, लेकिन शहर को जीरकपुर नहीं बनने देंगे : हाईकोर्ट

Thu, 09 Nov 2023 01:22 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 09 Nov 2023 01:22 AM IST
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Development work is necessary in heritage building, but will not allow the city to become Zirakpur: High Court
चंडीगढ़। हाईकोर्ट की इमारत पर काम के बढ़ते बोझ के कारण इसकी इमारत के विस्तार को लेकर याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बुधवार को स्पष्ट कर दिया कि हेरिटेज परिसर में विकास जरूरी है, लेकिन शहर को जीरकपुर बनने नहीं दिया जा सकता। हाईकोर्ट ने अपने प्रशासनिक विभागों को सचिवालय की पुरानी इमारत में शिफ्ट करने को लेकर बार एसोसिएशन के सचिव को लोकल कमिश्नर नियुक्त किया है और परिसर का निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। याचिका दाखिल करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट कर्मचारी संघ के सचिव विनोद धाटरवाल व अन्य ने सीनियर एडवोकेट आशीष कपूर व रूपा पठानिया के माध्यम से बताया कि रोजाना लगभग 10000 वकील, 3300 कर्मचारी, वकीलों के 3000 क्लर्क, हरियाणा और पंजाब के एजी कार्यालय के कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों, याचिकाकर्ताओं व अन्य लोगों का बोझ हाईकोर्ट परिसर पर होता है। रोजाना 10000 कार और हजारों दुपहिया वाहनों के बोझ को हाईकोर्ट का मौजूदा परिसर सहन करने में सक्षम नहीं है। हाईकोर्ट में लंबित 5 लाख से अधिक याचिकाओं को समायोजित करने के लिए शायद ही कोई जगह है।
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याची ने कहा कि हाईकोर्ट की इमारत बनने के समय के मुकाबले अब अदालत पर बोझ बढ़ गया है। सुरक्षा और आपातकाल की नजर से देखें तो एक छोटी सी घटना के कारण भगदड़ मच सकती है जिसके अकल्पनीय नुकसान हो सकते हैं। 2012 में हाईकोर्ट की इमारत का विस्तार हुआ था, लेकिन समय के साथ बोझ बढ़ता जा रहा है और परिसर विस्तार समय की जरूरत हो गया है।
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2018 में विकास के प्रस्तावों को मंजूरी के बाद फिर से लटका दिया गया
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि 2018 में प्रशासन ने हाईकोर्ट की पार्किंग, वकीलों के चैंबर सहित अन्य विकास कार्यों के साथ होलिस्टिक प्लान को मंजूरी के बाद केंद्र के पास भेजा गया था। इसके बाद अचानक से प्रशासन ने यू-टर्न लिया और हेरिटेज इंपैक्ट असेसमेंट रिपोर्ट की जिम्मेदारी आर्किटेक्ट कॉलेज के प्रिंसिपल को सौंप दी गर्ई। कोर्ट ने कहा कि अब जरूरत है कि 2018 में जहां से काम रुका था वहीं से शुरू किया जाए।
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आईआईटी रुड़की की मदद से हेरिटेज इंपैक्ट असेसमेंट रिपोर्ट होगी तैयार
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि प्रशासन की रिपोर्ट के साथ ही एक रिपोर्ट स्वतंत्र एजेंसी से लेना जरूरी है। ऐसे में सभी पक्षों की सहमति से आईआईटी रुड़की को यह काम सौंपने का निर्णय लिया गया। आईआईटी क्षेत्र में विकास का ऐसा रोडमैप तैयार करने में मदद करेगी जिससे इस क्षेत्र के हेरिटेज दर्जे पर कोई बुरा प्रभाव न पड़े।
प्रशासन के रवैए पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि वक्त के साथ परिसर की इमारत छोटी पड़ गई है। ऐसे में इसे इस प्रकार व्यवस्थित करना जरूरी है कि इसके हेरिटेज स्टेटस पर प्रभाव न पड़े। इसके लिए आर्किटेक्चर कॉलेज के प्रिंसिपल का सहयोग जरूरी है। प्रशासन की ओर से कहा गया कि वह इसमें पूरा सहयोग कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा कि हमें प्रशासन का सहयोग कहीं भी दिखाई नहीं दे रहा है।

सेक्टर-17 में स्थान उपलब्ध होने की दलील हाईकोर्ट ने की नामंजूर
यूटी प्रशासन ने हाईकोर्ट के प्रशासनिक विभागों को सेक्टर-17 में शिफ्ट करने का सुझाव दिया और कहा कि जहां जिला अदालत मौजूद थी वहां पर स्थान उपलब्ध है। हाईकोर्ट ने कहा कि हमें पता है वहां पर उचित स्थान उपलब्ध नहीं है। इस पर कहा गया कि जो वकीलों के चैंबर थे उनका इस्तेमाल किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने इस पर भी पूरी तरह से असहमति जता दी।
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