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Panchkula News: गांव दबकौरी को निगम से निकाल फिर से पंचायत बनाने की मांग
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रामगढ़। वार्ड नंबर 20 में शामिल गांव दबकौरी के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। नगर निगम में शामिल होने के बाद विकास की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को निराशा हाथ लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि 14 साल में केवल एक पार्क बना, वह भी अब जर्जर हालत में है।
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत के समय में अधिक कार्य होते थे, जबकि अब छोटे-छोटे कामों के लिए भी निगम कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं। हाल ही में हुए परिसीमन में गांव को वार्ड नंबर 19 में शामिल कर दिया गया है, जिससे समस्याएं और बढ़ गई हैं। वार्ड नंबर 19 में रामगढ़, मानक्यां, भानु, बिल्ला, जसवंत गढ़ व दबकौरी गांव शामिल किए गए हैं कस्बा रामगढ़ से दबकौरी गांव की दूरी करीब पन्द्रह किलोमीटर से भी ज्यादा है। किसी भी गांव से पार्षद बन जाए लोगों को अपने पार्षद से मिलने के लिए परेशानी उठानी पड़ेगी। ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि दबकौरी को नगर निगम से बाहर कर दोबारा पंचायत व्यवस्था लागू की जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान हो सके।
ग्रामीणों की मुख्य समस्याएं
मूलभूत सुविधाओं का अभाव।
विकास कार्यों में कमी।
पार्षद तक पहुंचने में दूरी व परेशानी।
निगम कार्यालय के बार-बार चक्कर।
टैक्स और नोटिसों से बढ़ी परेशानी।
दबकौरी गांव से निगम कार्यालय करीब 20 किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर है। लोगों को निगम कार्यालय को ढूंढने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ती है। ऐसे में उनका काफी समय और धन बर्बाद होता है। - हामिद खान,पूर्व सरपंच
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गांव में कोई भी शहर जैसी सुविधाएं निगम द्वारा नहीं दी गई हैं। गांव के हालात पहले से भी ज्यादा खराब है। कोई भी अधिकारी उनकी समस्या की ओर ध्यान नहीं देता है।- जुल्फान खान
निगम के अंतर्गत आने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्र से पढ़ने वाले बच्चों व अन्य लोगों के लिए कोई बस सुविधा उपलब्ध नहीं करवाई गई है जिससे लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। - मुस्ताक खान
ग्रामीण क्षेत्र में करीब 8 गांव पर एक पार्षद बनाया जाता है। लोगों को अपने कार्य करवाने के लिए पार्षद के पास जाना पड़ता है। कोई साधन न होने की वजह से बच्चों व महिलाओं को परेशानी होती है। सरपंच गांव में ही मिल जाते हैं। निगम से ग्रामीण क्षेत्र को निकाल कर फिर से पंचायत बनाई जाए।- समशाद अली
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ग्रामीणों के अनुसार पंचायत के समय में अधिक कार्य होते थे, जबकि अब छोटे-छोटे कामों के लिए भी निगम कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं। हाल ही में हुए परिसीमन में गांव को वार्ड नंबर 19 में शामिल कर दिया गया है, जिससे समस्याएं और बढ़ गई हैं। वार्ड नंबर 19 में रामगढ़, मानक्यां, भानु, बिल्ला, जसवंत गढ़ व दबकौरी गांव शामिल किए गए हैं कस्बा रामगढ़ से दबकौरी गांव की दूरी करीब पन्द्रह किलोमीटर से भी ज्यादा है। किसी भी गांव से पार्षद बन जाए लोगों को अपने पार्षद से मिलने के लिए परेशानी उठानी पड़ेगी। ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि दबकौरी को नगर निगम से बाहर कर दोबारा पंचायत व्यवस्था लागू की जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान हो सके।
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ग्रामीणों की मुख्य समस्याएं
मूलभूत सुविधाओं का अभाव।
विकास कार्यों में कमी।
पार्षद तक पहुंचने में दूरी व परेशानी।
निगम कार्यालय के बार-बार चक्कर।
टैक्स और नोटिसों से बढ़ी परेशानी।
दबकौरी गांव से निगम कार्यालय करीब 20 किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर है। लोगों को निगम कार्यालय को ढूंढने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ती है। ऐसे में उनका काफी समय और धन बर्बाद होता है। - हामिद खान,पूर्व सरपंच
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गांव में कोई भी शहर जैसी सुविधाएं निगम द्वारा नहीं दी गई हैं। गांव के हालात पहले से भी ज्यादा खराब है। कोई भी अधिकारी उनकी समस्या की ओर ध्यान नहीं देता है।- जुल्फान खान
निगम के अंतर्गत आने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्र से पढ़ने वाले बच्चों व अन्य लोगों के लिए कोई बस सुविधा उपलब्ध नहीं करवाई गई है जिससे लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। - मुस्ताक खान
ग्रामीण क्षेत्र में करीब 8 गांव पर एक पार्षद बनाया जाता है। लोगों को अपने कार्य करवाने के लिए पार्षद के पास जाना पड़ता है। कोई साधन न होने की वजह से बच्चों व महिलाओं को परेशानी होती है। सरपंच गांव में ही मिल जाते हैं। निगम से ग्रामीण क्षेत्र को निकाल कर फिर से पंचायत बनाई जाए।- समशाद अली