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डीसीपी की गाइड लाइन: फर्जी कस्टमर केयर नंबरों से सावधान रहें, कस्टमर केयर के नाम पर पैसे उड़ा रहे साइबर अपराधी
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पंचकूला। साइबर धोखाधड़ी के खतरे को रोकने के लिए डीसीपी मोहित हांडा ने फर्जी कस्टमर केयर के नंबरों से सावधान रहने की सलाह दी है। इसके अलावा साइबर धोखाधड़ी से बचने के लिए अपने परिजनों और अन्य साथियों को भी लोग जागरूक करें। कुछ शरारती तत्व ऑनलाइन लोगों को बेवकूफ बनाकर उनके साथ पैसों की धोखाधड़ी करते हैं, क्योंकि आज के समय साइबर क्रिमिनल ऑनलाइन धोखाधड़ी के लिए नई तरकीब निकालते हैं। कुछ साइबर क्रिमिनल फर्जी कस्टमर केयर नंबरों के जरिए आम लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। आम लोग किसी भी कंपनी के कस्टमर केयर का नंबर (पाने के लिए गूगल का सहारा लेते हैं । साइबर अपराधी आपकी एक चूक या गलती की ताक में बैठे होते हैं। ये अपराधी फेसबुक, और ट्विटर से लेकर गूगल तक पर ये अपराधी फेक कस्टमर केयर नंबर डालकर रखते है। आपने जरा सी गलती की और आप शातिर साइबर अपराधियों के बिछाए जाल में फंस जाते हैं ।
ऐसे बिछाते हैं जाल
पंचकूला साइबर सेल की टीम ने बताया कि इसका सबसे आसान तरीका मिलती-जुलती वेबसाइट बनाकर लोगों को भ्रमित करना है। इसमें लोग सही और गलत का भेद नहीं कर पाते, जबकि थोड़ी सी सावधानी इसके लिए काफी है। साइबर क्रिमिनल एक नाम में कुछ थोड़ा बहुत बदलकर साइट बना लेते हैं। कुछ एड चलाकर गूगल सर्च में ऑरिजनल वेबसाइट से ऊपर लाया जा सकता है। लोग अमूमन कस्टमर केयर का नंबर खोजने के लिए गूगल सर्च करते हैं। जब आप गूगल पर कस्टमर केयर का नंबर खोजने जाते हैं तो आपको सर्च रिजल्ट में पहले की एक फर्जी वेबसाइट है । ऐसी फर्जी वेबसाइट पर ठगों के नंबर होते हैं।
ऐसे पहचानें गलत कस्टमर केयर नंबर को
गूगल पर कुछ भी सर्च करते हैं तो रिजल्ट में सबसे ऊपर दिख रही वेबसाइट को सही नहीं मानें।
सर्च में सबसे ऊपर के रिजल्ट के साथ यदि एड/ स्पॉन्सर्ड लिखा दिख रहा है तो उसे क्लिक न करें।
यदि कोई सरकारी वेबसाइट है तो उसके अंत में जीओवी डाट इन डाट निक इन होगा। ऐसा है तो वेबसाइट ठीक है ।
कोई भी वेबसाइट खोलें तो यह देख लें कि वह सिक्योर है या नहीं। जिस वेबसाइट की शुरुआत में एचटीटीपी/एचटीटीपीएस होता है, वह सिक्योर है।
साइबर क्रिमनल का ज्यादातर मोबाइल नंबर सर्च में दिया होता है। इस पर विश्वास ना करें ।
इसके अलावा साइबर क्रिमिनल सोशल मीडिया पर लोगों की शिकायतों पर नजर रखते हैं। उससे संबंधित काल करके पूछते हैं आपको उस पर विश्वास हो जाता है। फिर वह किसी ना किसी तरीके से आपको जाल में फंसाकर धोखाधड़ी करता है।
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यहां करें शिकायत
अगर आपके साथ किसी प्रकारी की धोखाधड़ी हो जाती है, तो अपनी शिकायत नजदीकी पुलिस स्टेशन या चौकी या राष्ट्रीय साइबर कंपलेंट पोर्टल एचटीटीपी://साइबर क्राइम डाट जीओवी डाट इन पर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। इस संबंध में साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए राज्य सरकार के द्वारा राष्ट्रीय हेल्पलाइन की शुरुआत की है। जिसका नंबर 155260 है। इसे नोट करके रख लें। ठगी का शिकार होने पर तुरंत इस नंबर पर जरूर शिकायत करें। ताकि आपका धोखाधड़ी में गया पैसा वापस मिल सके।
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ऐसे बिछाते हैं जाल
पंचकूला साइबर सेल की टीम ने बताया कि इसका सबसे आसान तरीका मिलती-जुलती वेबसाइट बनाकर लोगों को भ्रमित करना है। इसमें लोग सही और गलत का भेद नहीं कर पाते, जबकि थोड़ी सी सावधानी इसके लिए काफी है। साइबर क्रिमिनल एक नाम में कुछ थोड़ा बहुत बदलकर साइट बना लेते हैं। कुछ एड चलाकर गूगल सर्च में ऑरिजनल वेबसाइट से ऊपर लाया जा सकता है। लोग अमूमन कस्टमर केयर का नंबर खोजने के लिए गूगल सर्च करते हैं। जब आप गूगल पर कस्टमर केयर का नंबर खोजने जाते हैं तो आपको सर्च रिजल्ट में पहले की एक फर्जी वेबसाइट है । ऐसी फर्जी वेबसाइट पर ठगों के नंबर होते हैं।
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ऐसे पहचानें गलत कस्टमर केयर नंबर को
गूगल पर कुछ भी सर्च करते हैं तो रिजल्ट में सबसे ऊपर दिख रही वेबसाइट को सही नहीं मानें।
सर्च में सबसे ऊपर के रिजल्ट के साथ यदि एड/ स्पॉन्सर्ड लिखा दिख रहा है तो उसे क्लिक न करें।
यदि कोई सरकारी वेबसाइट है तो उसके अंत में जीओवी डाट इन डाट निक इन होगा। ऐसा है तो वेबसाइट ठीक है ।
कोई भी वेबसाइट खोलें तो यह देख लें कि वह सिक्योर है या नहीं। जिस वेबसाइट की शुरुआत में एचटीटीपी/एचटीटीपीएस होता है, वह सिक्योर है।
साइबर क्रिमनल का ज्यादातर मोबाइल नंबर सर्च में दिया होता है। इस पर विश्वास ना करें ।
इसके अलावा साइबर क्रिमिनल सोशल मीडिया पर लोगों की शिकायतों पर नजर रखते हैं। उससे संबंधित काल करके पूछते हैं आपको उस पर विश्वास हो जाता है। फिर वह किसी ना किसी तरीके से आपको जाल में फंसाकर धोखाधड़ी करता है।
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यहां करें शिकायत
अगर आपके साथ किसी प्रकारी की धोखाधड़ी हो जाती है, तो अपनी शिकायत नजदीकी पुलिस स्टेशन या चौकी या राष्ट्रीय साइबर कंपलेंट पोर्टल एचटीटीपी://साइबर क्राइम डाट जीओवी डाट इन पर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। इस संबंध में साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए राज्य सरकार के द्वारा राष्ट्रीय हेल्पलाइन की शुरुआत की है। जिसका नंबर 155260 है। इसे नोट करके रख लें। ठगी का शिकार होने पर तुरंत इस नंबर पर जरूर शिकायत करें। ताकि आपका धोखाधड़ी में गया पैसा वापस मिल सके।