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डाडम हादसा : खनन ठेकेदारों और विभाग के अफसरों की लापरवाही उजागर, नीति अनुसार नहीं हुआ खनन

Sun, 06 Feb 2022 01:48 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 06 Feb 2022 01:48 AM IST
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Dadam accident: Negligence of mining contractors, department officials exposed
नोएडा के ध्यानार्थ...
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डाडम हादसा : खनन ठेकेदारों, विभाग के अफसरों की लापरवाही उजागर
नीति अनुसार नहीं किया खनन, सामग्री निकालने के बाद समतल नहीं की भूमि
अवैज्ञानिक व अवैध खनन नहीं होता तो टल सकता था हादसा : जस्टिस प्रीतम पाल
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। डाडम हादसे में एनजीटी की अब तक की जांच में खनन ठेकेदारों और खान एवं भूगर्भ विभाग के अधिकारियों की लापरवाही उजागर हुई है। ठेकेदारों ने नीति के अनुसार खनन नहीं किया। सामग्री निकालने से पहाड़ में गहरी बन चुकी खाई नहीं भरी गई, जिससे हादसा हुआ। एनजीटी का मानना है कि अगर अवैज्ञानिक व अवैध खनन नहीं हुआ होता तो डाडम हादसा टल सकता था।
एनजीटी की हरियाणा निगरानी समिति के चेयरमैन जस्टिस सेवानिवृत्त प्रीतम पाल ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि एनजीटी को डाडम में अवैध व अवैज्ञानिक खनन की अंतरिम रिपोर्ट बीते वर्ष अक्तूबर में भेज दी थी। उस पर संज्ञान लेते हुए एनजीटी ने 31 मार्च तक अंतिम रिपोर्ट मांगी है। अंतिम रिपोर्ट के लिए हरसेक से सैटेलाइट इमेज का इंतजार है। खनन विभाग हरसेक के पास राशि जमा करा चुका है। हरसेक को इमेज इसरो से लेनी है। यह अब किसी भी समय उन्हें मिल सकती है। मुख्य सचिव ने भी इसमें हस्तक्षेप किया है।
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खनन ठेकेदारों ने मंदिर तक की जमीन को नहीं छोड़ा
जस्टिस प्रीतम पाल ने कहा कि डाडम में खनन के दौरान एनजीटी की गाइडलाइन का उल्लंघन हुआ है। उनकी अध्यक्षता में जांच कर रही आठ सदस्यीय समिति ने पहले व अब के खनन ठेकेदारों की लापरवाही पाई है। ठेकेदारों ने खनन नीति के अनुसार काम ही नहीं किया और विभाग के अधिकारी भी आंखें मूंदकर बैठे रहे। उन्होंने मौके पर निरीक्षण कर कार्रवाई ही नहीं की। खनन ठेकेदारों ने सामग्री निकालने के लिए मंदिर तक की जमीन को नहीं छोड़ा। उनकी जांच में वन क्षेत्र में भी खनन देखने को मिला है।
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ग्रामीणों के बयान और शिकायतों का भी रिपोर्ट में होगा उल्लेख
एनजीटी ने कहा है कि अगर सैटेलाइट इमेज जल्द नहीं मिलती है, तो भी रिकॉर्ड अनुसार रिपोर्ट बनाकर 31 मार्च से पहले जमा करें। मौके पर पाई गई अनियमितताओं और वन, खान, मृदा व पारिस्थितिकी संरक्षण विभाग की जांच रिपोर्ट का भी जिक्र किया जाए। जस्टिस प्रीतम पाल ने कहा कि मौके पर निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों के बयान भी कलमबद्घ किए हैं। उनकी शिकायतों का भी पूरा उल्लेख अंतिम रिपोर्ट में किया जाएगा।
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