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अफसरों की सांठगांठ से भूमाफिया के कब्जे में करोड़ों की वन भूमि
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चंडीगढ़। हरियाणा के शिवालिक क्षेत्र में वन भूमि को कब्जाने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। भूमाफिया ने अफसरों से सांठगांठ कर करोड़ों रुपये की वन भूमि कब्जा ली है। सर्वोच्च और उच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद वन भूमि से कब्जों को नहीं हटाया जा रहा। शिवालिक विकास मंच ने मुख्यमंत्री मनोहर को अतिक्रमण हटवाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है।
मंच के अध्यक्ष एडवोकेट विजय बंसल ने बताया कि पंचकूला के सूरजपुर एसीसी प्लांट के अंतर्गत आने वाली वन भूमि नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों रुपये में बड़े कॉलोनाइजर को बेच दी गई है, जिसमें राजस्व एवं वन विभाग के अफसरों पर भी मिलीभगत के आरोप हैं। एसीसी ने उद्योग और वन विभाग से सूरजपुर में सीमेंट प्लांट चलाने के लिए 809 और 42 एकड़ भूमि लीज पर ली थी। लीज में शर्त थी कि समय पूरा होने पर जंगल समेत पूरी भूमि वापस की जाएगी। लंबित विवादों के बावजूद एसीसी ने राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से बिक्री विलेखों में बहुत सारी अनियमितताओं के साथ संयंत्र स्थल और आवासीय कॉलोनी की जमीन कॉलोनाइजर को बेच दी। इसे आगे एक अत्यधिक प्रभावशाली कंपनी से जुड़े लोगों को बेच दिया गया। यहां वन भूमि पर अतिक्रमण अब भी जारी है।
उन्होंने बताया कि वन विभाग के न्यायालय में दिए शपथ पत्र अनुसार वन सीमाओं की ड्रोन मैपिंग अगस्त 2020 तक पूरी होनी थी, जो आज तक नहीं हुई। सूरजपुर, मनसा देवी, नाडा साहिब, थापली, मोरनी हिल्स, रामगढ़ के आसपास के वन क्षेत्रों में वन भूमि पर हजारों करोड़ रुपये मूल्य की वन भूमि में अवैध कब्जाें के साथ निर्माण भी किया गया है। एसीसी सीमेंट फैक्टरी बीसीडब्ल्यू सूरजपुर के 2040 करोड़ के कथित घोटाले की केंद्र व हरियाणा सरकार सीबीआई जांच कराए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसके लिए प्रतिवेदन भेजा हुआ है।
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केस की फाइल कार्यालय रिकॉर्ड से गायब
विजय बंसल ने पूरे मामले को लेकर उद्योग विभाग से आरटीआई में जानकारी मांगी थी। इसमें जवाब दिया गया कि जानकारी प्रदान नहीं कर सकते, क्योंकि सीडब्ल्यूपी संख्या 8033/1998 के तहत एसीसी बनाम हरियाणा केस की फाइल कार्यालय रिकॉर्ड से गायब है। बंसल ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में केस फाइल को गुम करने के दोषियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई का आग्रह किया है।
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मंच के अध्यक्ष एडवोकेट विजय बंसल ने बताया कि पंचकूला के सूरजपुर एसीसी प्लांट के अंतर्गत आने वाली वन भूमि नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों रुपये में बड़े कॉलोनाइजर को बेच दी गई है, जिसमें राजस्व एवं वन विभाग के अफसरों पर भी मिलीभगत के आरोप हैं। एसीसी ने उद्योग और वन विभाग से सूरजपुर में सीमेंट प्लांट चलाने के लिए 809 और 42 एकड़ भूमि लीज पर ली थी। लीज में शर्त थी कि समय पूरा होने पर जंगल समेत पूरी भूमि वापस की जाएगी। लंबित विवादों के बावजूद एसीसी ने राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से बिक्री विलेखों में बहुत सारी अनियमितताओं के साथ संयंत्र स्थल और आवासीय कॉलोनी की जमीन कॉलोनाइजर को बेच दी। इसे आगे एक अत्यधिक प्रभावशाली कंपनी से जुड़े लोगों को बेच दिया गया। यहां वन भूमि पर अतिक्रमण अब भी जारी है।
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उन्होंने बताया कि वन विभाग के न्यायालय में दिए शपथ पत्र अनुसार वन सीमाओं की ड्रोन मैपिंग अगस्त 2020 तक पूरी होनी थी, जो आज तक नहीं हुई। सूरजपुर, मनसा देवी, नाडा साहिब, थापली, मोरनी हिल्स, रामगढ़ के आसपास के वन क्षेत्रों में वन भूमि पर हजारों करोड़ रुपये मूल्य की वन भूमि में अवैध कब्जाें के साथ निर्माण भी किया गया है। एसीसी सीमेंट फैक्टरी बीसीडब्ल्यू सूरजपुर के 2040 करोड़ के कथित घोटाले की केंद्र व हरियाणा सरकार सीबीआई जांच कराए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसके लिए प्रतिवेदन भेजा हुआ है।
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केस की फाइल कार्यालय रिकॉर्ड से गायब
विजय बंसल ने पूरे मामले को लेकर उद्योग विभाग से आरटीआई में जानकारी मांगी थी। इसमें जवाब दिया गया कि जानकारी प्रदान नहीं कर सकते, क्योंकि सीडब्ल्यूपी संख्या 8033/1998 के तहत एसीसी बनाम हरियाणा केस की फाइल कार्यालय रिकॉर्ड से गायब है। बंसल ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में केस फाइल को गुम करने के दोषियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई का आग्रह किया है।