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गुरुजी चार दिन के रिमांड पर
Updated Sun, 09 Jul 2017 01:31 AM IST
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संजय ने कोर्ट में पुलिस पर मारपीट के लगाए आरोप
- अदालत से रिमांड पर न भेजने की अपील की
- कहा, रिमांड पर भेजा तो पुलिस पीट पीट कर मार देगी
- दूसरे आरोपी को निर्वस्त्र कर यातनाएं देने का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
टीचर भर्ती घोटाले के मास्टरमाइंड संजय श्रीवास्तव उर्फ गुरुजी ने एक दिन का रिमांड खत्म होने पर जिला अदालत में पेशी के दौरान पुलिस पर मारपीट और शारीरिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है। संजय ने उसे और शिव बहादुर को पेशी पर लाए जांच अधिकारी के अलावा अन्य पुलिसकर्मियों के नाम कोर्ट को बताए, जिन्होंने उसे पीटा। वहीं पुलिस ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए आरोपियों का दस दिन का रिमांड मांगा। अदालत ने पुलिस की दलील सुनने के बाद दोनों को 4-4 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया।
इससे पहले संजय श्रीवास्तव ने अदालत को बताया कि उसका नाम संजय कुमार श्रीवास्तव है, लेकिन पुलिस उसे जबरन मिथिलेश पांडे, गुरुजी और मास्टरजी बनाने पर तुली हुई है। बीती रात करीब एक बजे पुलिस टीम ने उसे और शिव बहादुर की पिटाई की। संजय ने कोर्ट में मौजूद कई पुलिसकर्मियों के नाम लेकर उनसे मारपीट करने का आरोप लगाया। उसने कहा कि दोनों को डर है कि कहीं पुलिस दोनों को पीट-पीट कर उन्हें मार न दे या उनका एनकाउंटर न कर दे। इसके अलावा उसने कहा कि जांच टीम उसे सेक्सुअली डिसेबल बना देने की धमकी दी है। वहीं शिव को निर्वस्त्र कर पीटने का आरोप लगाया। संजय ने उसे पुलिस रिमांड पर न भेजने की दलील अदालत से की।
इस पर जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि दोनों एक महीना पंजाब पुलिस की हिरासत में रहे हैं। उस समय भी दोनों ने पुलिस पर यहीं आरोप लगाए थे। जांच अधिकारी ने दोनों के आरोपों को निराधार बताते हुए दोनों का दस-दस दिन का रिमांड मांगा। पुलिस ने दलील दी कि दोनों आरोपियों को लखनऊ लेकर जाना है और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी करनी है। इसके अलावा उन्हें टीचर भर्ती को लिए गए पैसे भी रिकवर करने हैं। वहीं उन्होंने किन-किन लोगों की भर्ती करवाने में अवैध तरीके से मदद की और इस समय वह कहां हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पेपर लीक कर करीब 250 लोगों को भर्ती होने में गैरकानूनी तरीके से मदद की है।
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वहीं बचाव पक्ष ने इसका विरोध करते हुए कहा कि किसी और की डिस्क्लोजर स्टेटमेंट के आधार पर दोनों को मास्टरमाइंड बनाया गया है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद दोनों को 4-4 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया। साथ ही दोनों का मेडिकल करवाने के आदेश दिए।
सुनवाई के दौरान मीडियाकर्मियों को बाहर निकाला
सिविल जज रेखा चौधरी ने अदालत में केस की सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में मौजूद मीडियाकर्मियों को अदालत से बाहर निकाल दिया। पहले तो उन्होंने कोर्ट में किसी की अनुमित से आने के बारे में पूछा। इस पर मीडियाकर्मियों द्वारा ओपन कोर्ट बताए जाने पर उन्होंने कबूला कि ओपन कोर्ट है और कोई कैमरा प्रोसिडिंग नहीं है, लेकिन फिर भी बिना अनुमति वह कोर्ट रूम में नहीं आ सकते। इसके बाद उन्होंने मीडियाकर्मियों को कोर्ट रूम से बाहर निकाल दिया।
कोट
रेप के केस में जहां कैमरा प्रोसिडिंग हो रही हो, उसे छोड़कर किसी भी ओपन कोर्ट में पत्रकारों को केस की सुनवाई में शामिल होने का अधिकार है। कोई भी अदालत पत्रकारों को केस की सुनवाई से बाहर नहीं निकाल सकती।
- अनुपम गुप्ता, सीनियर एडवोकेट, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट।
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- अदालत से रिमांड पर न भेजने की अपील की
- कहा, रिमांड पर भेजा तो पुलिस पीट पीट कर मार देगी
- दूसरे आरोपी को निर्वस्त्र कर यातनाएं देने का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
टीचर भर्ती घोटाले के मास्टरमाइंड संजय श्रीवास्तव उर्फ गुरुजी ने एक दिन का रिमांड खत्म होने पर जिला अदालत में पेशी के दौरान पुलिस पर मारपीट और शारीरिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है। संजय ने उसे और शिव बहादुर को पेशी पर लाए जांच अधिकारी के अलावा अन्य पुलिसकर्मियों के नाम कोर्ट को बताए, जिन्होंने उसे पीटा। वहीं पुलिस ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए आरोपियों का दस दिन का रिमांड मांगा। अदालत ने पुलिस की दलील सुनने के बाद दोनों को 4-4 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया।
इससे पहले संजय श्रीवास्तव ने अदालत को बताया कि उसका नाम संजय कुमार श्रीवास्तव है, लेकिन पुलिस उसे जबरन मिथिलेश पांडे, गुरुजी और मास्टरजी बनाने पर तुली हुई है। बीती रात करीब एक बजे पुलिस टीम ने उसे और शिव बहादुर की पिटाई की। संजय ने कोर्ट में मौजूद कई पुलिसकर्मियों के नाम लेकर उनसे मारपीट करने का आरोप लगाया। उसने कहा कि दोनों को डर है कि कहीं पुलिस दोनों को पीट-पीट कर उन्हें मार न दे या उनका एनकाउंटर न कर दे। इसके अलावा उसने कहा कि जांच टीम उसे सेक्सुअली डिसेबल बना देने की धमकी दी है। वहीं शिव को निर्वस्त्र कर पीटने का आरोप लगाया। संजय ने उसे पुलिस रिमांड पर न भेजने की दलील अदालत से की।
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इस पर जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि दोनों एक महीना पंजाब पुलिस की हिरासत में रहे हैं। उस समय भी दोनों ने पुलिस पर यहीं आरोप लगाए थे। जांच अधिकारी ने दोनों के आरोपों को निराधार बताते हुए दोनों का दस-दस दिन का रिमांड मांगा। पुलिस ने दलील दी कि दोनों आरोपियों को लखनऊ लेकर जाना है और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी करनी है। इसके अलावा उन्हें टीचर भर्ती को लिए गए पैसे भी रिकवर करने हैं। वहीं उन्होंने किन-किन लोगों की भर्ती करवाने में अवैध तरीके से मदद की और इस समय वह कहां हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पेपर लीक कर करीब 250 लोगों को भर्ती होने में गैरकानूनी तरीके से मदद की है।
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वहीं बचाव पक्ष ने इसका विरोध करते हुए कहा कि किसी और की डिस्क्लोजर स्टेटमेंट के आधार पर दोनों को मास्टरमाइंड बनाया गया है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद दोनों को 4-4 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया। साथ ही दोनों का मेडिकल करवाने के आदेश दिए।
सुनवाई के दौरान मीडियाकर्मियों को बाहर निकाला
सिविल जज रेखा चौधरी ने अदालत में केस की सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में मौजूद मीडियाकर्मियों को अदालत से बाहर निकाल दिया। पहले तो उन्होंने कोर्ट में किसी की अनुमित से आने के बारे में पूछा। इस पर मीडियाकर्मियों द्वारा ओपन कोर्ट बताए जाने पर उन्होंने कबूला कि ओपन कोर्ट है और कोई कैमरा प्रोसिडिंग नहीं है, लेकिन फिर भी बिना अनुमति वह कोर्ट रूम में नहीं आ सकते। इसके बाद उन्होंने मीडियाकर्मियों को कोर्ट रूम से बाहर निकाल दिया।
कोट
रेप के केस में जहां कैमरा प्रोसिडिंग हो रही हो, उसे छोड़कर किसी भी ओपन कोर्ट में पत्रकारों को केस की सुनवाई में शामिल होने का अधिकार है। कोई भी अदालत पत्रकारों को केस की सुनवाई से बाहर नहीं निकाल सकती।
- अनुपम गुप्ता, सीनियर एडवोकेट, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट।