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158 करोड़ का एफडी घोटाला: कोटक महिंद्रा बैंक बना मिस्टर इंडिया, चार दिन में गायब कर दिए 48 करोड़ रुपये

Thu, 26 Mar 2026 10:20 AM IST
Nivedita दीपक शाही, अमर उजाला, पंचकूला
दीपक शाही, अमर उजाला, पंचकूला Published by: Nivedita Updated Thu, 26 Mar 2026 10:20 AM IST
सार

पंचकूला नगर निगम ने कोटक महिंद्रा बैंक में 145.03 करोड़ रुपये की 16 फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडीआर) करवाई थीं। इनकी मैच्योरिटी वैल्यू 158.02 करोड़ रुपये थी। अब यह पैसा गायब हो गया है।

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158 Crore FD Scam Kotak Mahindra Bank panchkula nagar nigam
पंचकूला नगर निगम - फोटो : संवाद

विस्तार

नगर निगम पंचकूला के 158 करोड़ रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) घोटाले में यह भी सामने आया है कि चार दिन में ही 48 करोड़ रुपये कोट महिंद्रा बैंक ने मिस्टर इंडिया की तरह गायब कर दिए। 

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13 मार्च की रात नगर निगम के बहीखातों में 50.07 करोड़ रुपये की राशि पूरी तरह सेफ नजर आ रही थी। 16 मार्च की सुबह जैसे ही बैंक की नई स्टेटमेंट आई निगम अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई। निगम के एक खाते (नंबर 2046903758) में जहां 50.07 करोड़ रुपये होने की उम्मीद थी वहां 16 मार्च 2026 को मात्र 2.17 करोड़ रुपये ही शेष मिले। यानी 48 करोड़ रुपये बीच रास्ते से ही गायब कर लिए गए।
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कोटक महिंद्रा बैंक और नगर निगम के बीच चल रहे इस मामले में लगातार खुलासे हो रहे हैं। इस मामले में जहां फाइलों में 158.02 करोड़ की भारी-भरकम रकम चमक रही थी वहां बैंक की तिजोरी खंगालने पर निगम के हाथ खाली मिले। नगर निगम और कोटक महिंद्रा बैंक के बीच का यह विवाद अब केवल आंकड़ों की बाजीगरी नहीं बल्कि गायब होने वाला एक ऐसा तिलिस्म बन गया है जिसने जांच के दौरान विजिलेंस अधिकारियों के होश उड़ा दिए। महज 120 घंटों (5 दिन) के भीतर सरकारी खजाने में ऐसी सेंधमारी हुई जिसका सुराग न तो बैंक के कंप्यूटरों में मिला और न ही फाइलों में।

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तारीखों का खेल कब क्या हुआ?

-18 मार्च का शॉक बैंक ने वह आखिरी बम फोड़ा जिसने सबको सन्न कर दिया। बैंक ने लिखित में कह दिया कि निगम की जो 16 एफडी (158 करोड़ रुपये) होने का दावा किया जा रहा है, उनमें से एक भी नहीं बची है।
-बैंक में दो ऐसे अतिरिक्त खाते भी चलते पाए गए जिनका नगर निगम के आधिकारिक रिकॉर्ड में कोई जिक्र ही नहीं था। इससे साफ जाहिर होता है कि सरकारी पैसे को खुर्द-बुर्द करने के लिए सामानांतर बैंकिंग का खेल चल रहा था।

कब-कब मिली जाली और भ्रामक स्टेटमेंट

-22 फरवरी 2026, एफडी मेच्योर होने के बाद जब रिकॉर्ड मांगा गया, तो बैंक ने पहली बार ऐसी जानकारी दी जो निगम के रजिस्टर से मेल नहीं खाती थी।
-13 मार्च 2026, यह सबसे बड़ा झटका था। बैंक ने एक स्टेटमेंट जारी कर बताया कि खाते में केवल 2,17,74,394 रुपये (करीब 2 करोड़) ही बचे हैं, जबकि निगम के हिसाब से वहां 50.07 करोड़ होने चाहिए थे।
-16 मार्च की सुबह, जैसे ही बैंक का नया स्टेटमेंट आया, अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई। खाते में 50 करोड़ की जगह महज 2.17 करोड़ रुपये का बचा-खुचा हिस्सा ही रह गया था। यानी 48 करोड़ रुपये बीच रास्ते से ही किडनैप कर लिए गए। इसी दिन बैंक ने यह भी कह दिया कि उनके पास निगम की कोई भी लाइव एफडी मौजूद ही नहीं है।
-18 मार्च 2026, बैंक ने एक और आंकड़ा पेश किया और बताया कि बैलेंस 12,85,93,603 रुपये है।

कब-कब कराई नगर निगम ने एफडी

-16 फरवरी 2025, इस दिन सबसे ज्यादा 11 एफडी कराई गई थीं (जो 16 फरवरी 2026 को मेच्योर हुईं)।
-फरवरी 2025 के अन्य दिन, बाकी 4 एफडी भी फरवरी 2025 के अलग-अलग हफ्तों में कराई गई थीं।
-मार्च 2025, एक एफडी मार्च 2025 में कराई गई थी (जो मार्च 2026 में मेच्योर होनी थी)।

यहां हुई निगम से चूक

-बैंक स्टेटमेंट से दूरी, निगम के पास 16 एफडी के रिकॉर्ड थे, लेकिन बैंक से मिलने वाली स्टेटमेंट और अपने रिकॉर्ड का समय-समय पर मिलान नहीं किया गया।
-अज्ञात खातों पर नजर नहीं, बैंक में दो ऐसे अतिरिक्त खाते चल रहे थे जो निगम के आधिकारिक रिकॉर्ड में थे ही नहीं, जो सीधे तौर पर आंतरिक ऑडिट की विफलता को दर्शाता है।
-देरी से खुली नींद, 11 एफडी 16 फरवरी 2026 को ही मेच्योर हो गई थीं, लेकिन निगम ने मार्च के मध्य में जाकर बैंक से संपर्क किया और तब तक खेल हो चुका था।
-डिजिटल मॉनिटरिंग का अभाव, इतने बड़े फंड की निगरानी के लिए किसी रियल-टाइम ट्रैकिंग सिस्टम या डैशबोर्ड का इस्तेमाल नहीं किया गया, जिससे बैंक कर्मचारियों को आंकड़ों में हेरफेर का मौका मिला।

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