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एसबीआई गोल्ड लोन घोटाले की जांच सीबीआई जांच की मांग
Updated Thu, 15 Mar 2018 10:00 PM IST
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एसबीआई गोल्ड लोन घोटाले की सीबीआई जांच की मांग
लेबर पार्टी भारत ने पीड़ितों के ऋण माफ करने के मांग की
आरटीआई फोरम के संस्थापक वशिष्ठ ने पीएमओ, एफएम, आरबीआई को शिकायत की
अमर उजाला ब्यूरो
होशियारपुर
एसबीआई की बुल्लोवाल में गोल्ड लोन घोटाले के पीड़ितों के बचाव में कई संगठन आगे आए हैं। घोटाला की सीबीआई जांच की मांग करते हुए लेबर पार्टी भारत और भारत जगाओ आंदोलन के प्रतिनिधिमंडल ने एडीसी से मुलाकात की और इसके लिए एक ज्ञापन सौंपा। इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल ने निष्पक्ष जांच करने के लिए शाखा के पूरे स्टाफ, शाखा प्रबंधक और क्षेत्रीय प्रबंधक को स्थानांतरित करने की मांग की ।
लेबर पार्टी के अध्यक्ष जय गोपाल धीमान के नेतृत्व में कुछ पीड़ितों के प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासनिक परिसर के बाहर मोमबत्तियां जला कर विरोध जताया। इसके बाद अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर से मिले और मांग की कि बैंक मैनेजर, उनके स्टाफ, क्षेत्रीय बैंक के प्रबंधक को घोटाले की जांच के दौरान बदला जाए और मामला जांच के लिए सीबीआई को सौंपा जाए। धीमान ने मांग की कि पीड़ितों के ऋण माफ कर किए जाएं। उन्होंने कहा कि घोटाले की शिकायत केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली, प्रधान मंत्री कार्यालय, आरबीआई गवर्नर और सूबे के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल को भेजी जा रही थी।
धीमन ने सरकार को चेतावनी दी कि अगर कोई तत्काल कार्रवाई नहीं की गई तो वह डीएसी के बाहर भूख हड़ताल शुरू करेंगे जिसके परिणाम की पूरी जिम्मेदारी पंजाब सरकार की होगी। इस अवसर पर जसविंदर कुमार बम्बेली,मोनिया, जतिंदर सिंह, दवेन्द्र सिंह, गुरप्रीत सिंह, गुरुदेव सिंह, नीलम, सरबजीत कौर, दलजीत कौर, गुरप्रीत और हरजिंदर सिंह उपस्थित थे।
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इसी तरह आरटीआई कार्यकर्ता और राजीव वशिष्ठ, संस्थापक अध्यक्ष आरटीआई जागरूकता फोरम पंजाब ने प्रधान मंत्री, केंद्रीय वित्त मंत्री और गवर्नर भारतीय रिजर्व बैंक को एक शिकायत भेजी है। शिकायत में वशिष्ठ ने कहा है कि एसबीआई बुलोवाल की शाखा ने निजी वित्तीय संस्थाओं तथा सूचीबद्ध सुनार के साथ मिलीभगत में लाभार्थियों को स्वर्ण ऋण स्वीकृत करने में हेराफेरी की है। मई 2015 से फरवरी 2018 की अवधि के दौरान स्वर्ण ऋण के कुल 290 मामलों को मंजूरी दी गई थी। इनमें से 224 मामलों के घोटाले का हिस्सा होने का संदेह है। वशिष्ठ ने दावा किॅया है कि घोटाले की राशि 4.66 करोड़ रुपए थी और अब तक का ब्याज शामिल करने के बाद राशि 8.05 करोड़े के आसपास हो गई है।
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लेबर पार्टी भारत ने पीड़ितों के ऋण माफ करने के मांग की
आरटीआई फोरम के संस्थापक वशिष्ठ ने पीएमओ, एफएम, आरबीआई को शिकायत की
अमर उजाला ब्यूरो
होशियारपुर
एसबीआई की बुल्लोवाल में गोल्ड लोन घोटाले के पीड़ितों के बचाव में कई संगठन आगे आए हैं। घोटाला की सीबीआई जांच की मांग करते हुए लेबर पार्टी भारत और भारत जगाओ आंदोलन के प्रतिनिधिमंडल ने एडीसी से मुलाकात की और इसके लिए एक ज्ञापन सौंपा। इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल ने निष्पक्ष जांच करने के लिए शाखा के पूरे स्टाफ, शाखा प्रबंधक और क्षेत्रीय प्रबंधक को स्थानांतरित करने की मांग की ।
लेबर पार्टी के अध्यक्ष जय गोपाल धीमान के नेतृत्व में कुछ पीड़ितों के प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासनिक परिसर के बाहर मोमबत्तियां जला कर विरोध जताया। इसके बाद अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर से मिले और मांग की कि बैंक मैनेजर, उनके स्टाफ, क्षेत्रीय बैंक के प्रबंधक को घोटाले की जांच के दौरान बदला जाए और मामला जांच के लिए सीबीआई को सौंपा जाए। धीमान ने मांग की कि पीड़ितों के ऋण माफ कर किए जाएं। उन्होंने कहा कि घोटाले की शिकायत केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली, प्रधान मंत्री कार्यालय, आरबीआई गवर्नर और सूबे के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल को भेजी जा रही थी।
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धीमन ने सरकार को चेतावनी दी कि अगर कोई तत्काल कार्रवाई नहीं की गई तो वह डीएसी के बाहर भूख हड़ताल शुरू करेंगे जिसके परिणाम की पूरी जिम्मेदारी पंजाब सरकार की होगी। इस अवसर पर जसविंदर कुमार बम्बेली,मोनिया, जतिंदर सिंह, दवेन्द्र सिंह, गुरप्रीत सिंह, गुरुदेव सिंह, नीलम, सरबजीत कौर, दलजीत कौर, गुरप्रीत और हरजिंदर सिंह उपस्थित थे।
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इसी तरह आरटीआई कार्यकर्ता और राजीव वशिष्ठ, संस्थापक अध्यक्ष आरटीआई जागरूकता फोरम पंजाब ने प्रधान मंत्री, केंद्रीय वित्त मंत्री और गवर्नर भारतीय रिजर्व बैंक को एक शिकायत भेजी है। शिकायत में वशिष्ठ ने कहा है कि एसबीआई बुलोवाल की शाखा ने निजी वित्तीय संस्थाओं तथा सूचीबद्ध सुनार के साथ मिलीभगत में लाभार्थियों को स्वर्ण ऋण स्वीकृत करने में हेराफेरी की है। मई 2015 से फरवरी 2018 की अवधि के दौरान स्वर्ण ऋण के कुल 290 मामलों को मंजूरी दी गई थी। इनमें से 224 मामलों के घोटाले का हिस्सा होने का संदेह है। वशिष्ठ ने दावा किॅया है कि घोटाले की राशि 4.66 करोड़ रुपए थी और अब तक का ब्याज शामिल करने के बाद राशि 8.05 करोड़े के आसपास हो गई है।