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अपराध : फर्जी गारंटी के आधार पर लिया प्रोजेक्ट, 1.57 करोड़ की धोखाधड़ी

Sun, 20 Mar 2022 01:30 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 20 Mar 2022 01:30 AM IST
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Crime: Project taken on the basis of fake guarantee, fraud of 1.57 crores
पंचकूला। हरियाणा स्टेट रुरल लाइवली मिशन के साथ धोखाधड़ी में सेक्टर-14 पुलिस ने एचएसआरएलएम के जिला फंक्शनल मैनेजर योगेश की शिकायत पर दो कंपनी, दो ट्रस्ट समेत सात के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, एचएसआरएलएम द्वारा दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के तहत बंगलुरु की कंपनी आईएसईई स्टाफिंग सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को जरूरतमंद बच्चों को 36 माह की स्किल ट्रेनिंग देने का प्रोजेक्ट अलॉट किया था। अलॉटमेंट के समय कंपनी ने सरकार के साथ एमओयू साइन किया था। इसमें कंपनी ने नियम के अनुसार सभी डॉक्यूमेंट्स और सिक्योरिटी मनी जमा किए थे।
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11 मई 2021 को कंपनी की तरफ से प्रोजेक्ट के लिए आवेदन किया गया था। विभाग की तरफ से बंगलुरु की कंपनी को चुनकर काम अलॉट किया गया। टेंडर के मुताबिक 1050 बच्चों को 36 माह की ट्रेनिंग देनी थी। इसके लिए हरियाणा के अलग-अलग जिलों में ट्रेनिंग सेंटर खोलने के लिए कहा गया था। साथ ही ट्रेनिंग के बाद 1050 में से 750 बच्चों को जॉब भी कंपनी को दिलवाना था। इसके बाद 28 नवंबर 2021 से राज्य के सभी ट्रेनिंग सेंटर पर बच्चों की ट्रेनिंग शुरू होनी थी। प्रोजेक्ट की कुल राशि में से 25 फीसदी राशि 2.8 करोड़ रुपये एचएसआरएलएम ने निजी कंपनी के खाते में जमा करवा दिया, ताकि ट्रेनिंग शुरू हो सके।
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एचएसआरएलएम के अधिकारियों ने कंपनी को कई लेटर जारी कर प्रोजेक्ट के तहत सेंटर पर ट्रेनिंग देने का काम शुरू करने को कहा। केंद्र सरकार के जारी निर्देशों की पूरी तरह पालना नहीं करने पर सरकारी विभाग द्वारा राज्य में खोले गए स्किल्स ट्रेनिंग सेंटर्स की अचानक विजिट की, जिसमें नियम के मुताबिक कोई काम नहीं पाया गया। इसके बाद विभाग की ओर से कंपनी द्वारा करीब एक करोड़ रुपये जमा सिक्योरिटी मनी के चेक की जांच करवाई गई तो वह भी फर्जी निकला।
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पुलिस के अनुसार सरकारी विभाग की ओर से प्रोजेक्ट की शुरुआत के समय एडवांस के तौर पर दी गई 2.08 करोड़ की राशि में से कंपनी ने एक माह के भीतर करीब 1.57 करोड़ रुपये खर्च करने का दावा किया। साथ ही 30 दिसंबर 2021 को कंपनी ने विभाग को 50.80 लाख रुपये वापस किए। इसके बाद विभाग को कंपनी की कार्यशैली पर शक हुआ और मामले की जांच करवाने पर फर्जीवाड़ा पाया गया।
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