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कोरोना टीका लगवाने से डर रही हैं महिलाएं
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चंडीगढ़। कोरोना से बचाव केलिए बीते दो जुलाई से गर्भवती महिलाओं का भी टीकाकरण शुरू है, लेकिन टीके को लेकर उनमें अभी डर और संशय बरकरार है। स्थिति यह है कि अभी टीकाकरण केंद्रों पर इक्का-दुक्का महिलाएं ही पहुंच रही हैं। हालांकि, गर्भवती महिलाओं के मन के डर और तमाम सवालों के जवाब देने केलिए स्वास्थ्य विभाग काउंसलिंग प्रेग्नेंट वुमन फॉर कोविड 19 वैक्सीन गाइड बुक को माध्यम बना रहा है। जीएमएसएच-16 के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में आने वाली गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर और एएनएम कोरोना टीका के महत्व को बताने केसाथ ही खुराक लगवाने की सलाह दे रही हैं।
गर्भस्थ शिशु को खतरा
स्वास्थ्य निदेशक एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अमनदीप कंग ने बताया कि एक रिपोर्ट के मुताबिक 95 फीसदी से अधिक मामलों में कोविड संक्रमित माताओं व बच्चों का स्वास्थ्य जन्म के समय बेहतर रहा है, लेकिन कुछ मामलों में देखा गया है कि गर्भावस्था में कोविड संक्रमण के कारण प्री-मेच्योर डिलीवरी की स्थिति सामने आई। इससे नवजात का वजन कम होने के साथ उसकी जान जोखिम में पड़ने का भी खतरा बढ़ गया। वहीं, मौजूदा वायरस और ज्यादा खतरनाक हो गया है, इसलिए टीका लगवाना बेहद जरूरी है।
ये हैं हाई रिस्क जोन में
डॉ. अमनदीप कंग ने बताया कि हाई रिस्क ग्रुप में शामिल गर्भवती महिलाओं में संक्रमण का खतरा सामान्य की तुलना में कहीं ज्यादा है। जिन महिलाओं की उम्र 35 साल से अधिक होने के साथ वजन भी ज्यादा और मधुमेह या उच्च रक्तचाप की समस्या है, उन्हें कोविड-19 संक्रमण का खतरा अधिक है। डॉ. कंग का कहना है कि वह महिलाएं जो गर्भावस्था के दौरान संक्रमण की चपेट में आकर ठीक हो चुकी हैं तो वह कुछ समय बाद टीका जरूर लगवा लें।
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कोट-
शुरुआती दौर में गर्भवती महिलाओं के कोरोना टीकाकरण को लेकर संशय की स्थिति थी, लेकिन नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑफ इम्युनाइजेशन ने इसे मंजूरी दे दी है। अब गर्भवती महिलाओं को बिना देरी किए टीकाकरण करवाना चाहिए, जिससे वे अपनी और अपने बच्चे की संक्र मण से सुरक्षा कर सकें।
-डॉ. अमनदीप कंग, स्वास्थ्य निदेशक
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गर्भस्थ शिशु को खतरा
स्वास्थ्य निदेशक एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अमनदीप कंग ने बताया कि एक रिपोर्ट के मुताबिक 95 फीसदी से अधिक मामलों में कोविड संक्रमित माताओं व बच्चों का स्वास्थ्य जन्म के समय बेहतर रहा है, लेकिन कुछ मामलों में देखा गया है कि गर्भावस्था में कोविड संक्रमण के कारण प्री-मेच्योर डिलीवरी की स्थिति सामने आई। इससे नवजात का वजन कम होने के साथ उसकी जान जोखिम में पड़ने का भी खतरा बढ़ गया। वहीं, मौजूदा वायरस और ज्यादा खतरनाक हो गया है, इसलिए टीका लगवाना बेहद जरूरी है।
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ये हैं हाई रिस्क जोन में
डॉ. अमनदीप कंग ने बताया कि हाई रिस्क ग्रुप में शामिल गर्भवती महिलाओं में संक्रमण का खतरा सामान्य की तुलना में कहीं ज्यादा है। जिन महिलाओं की उम्र 35 साल से अधिक होने के साथ वजन भी ज्यादा और मधुमेह या उच्च रक्तचाप की समस्या है, उन्हें कोविड-19 संक्रमण का खतरा अधिक है। डॉ. कंग का कहना है कि वह महिलाएं जो गर्भावस्था के दौरान संक्रमण की चपेट में आकर ठीक हो चुकी हैं तो वह कुछ समय बाद टीका जरूर लगवा लें।
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कोट-
शुरुआती दौर में गर्भवती महिलाओं के कोरोना टीकाकरण को लेकर संशय की स्थिति थी, लेकिन नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑफ इम्युनाइजेशन ने इसे मंजूरी दे दी है। अब गर्भवती महिलाओं को बिना देरी किए टीकाकरण करवाना चाहिए, जिससे वे अपनी और अपने बच्चे की संक्र मण से सुरक्षा कर सकें।
-डॉ. अमनदीप कंग, स्वास्थ्य निदेशक