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अपराध रोकने को जागरूकता जरूरी ः इंदिरा बनर्जी
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चंडीगढ़। सर्वोच्य न्यायालय की न्यायाधीश इंदिरा बनर्जी ने कहा कि घरेलू हिंसा का समाज पर बहुत दूरगामी परिणाम होता है। महिलाओं को अपराधों से बचाने के लिए जागरूकता जरूरी है।
न्यायाधीश इंदिरा बनर्जी हरियाणा महिला आयोग द्वारा घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 और अप्रवासी भारतीय महिलाओं के उत्पीड़न पर आयोजित राष्ट्रीय वेबीनार में अपने विचार रख रही थीं। न्यायमूर्ति ने कहा कि घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के तहत राहत न केवल अपने साथी के साथ रहने वाली महिला को मिलती है, बल्कि किसी भी महिला को मिल सकती है जो अपने पिता या भाई के साथ साझा घर में रहती है। भागीदारी जन सहयोग समिति हरियाणा और दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण लीगल सर्विसिज अथॉरिटी की मुख्य सहभागिता के साथ हुए वेबीनार में देश के प्रमुख 9 शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों के सदस्यों ने अपने विचार रखे।
सुप्रीम कोर्ट की अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 में न केवल शारीरिक अपितु मानसिक एवं आर्थिक सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया है।
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हरियाणा महिला आयोग की कार्यवाहक अध्यक्ष, प्रीति भारद्वाज दलाल ने कहा कि गृह क्लेश केवल हरियाणा प्रदेश या भारत तक ही सीमित नहीं है अपितु कोविड-19 काल में पूरे विश्व में महिलाओं के लिए एक शैडो पेंडामिक बनकर उभरी है। हम सभी को मिलकर इसका समाधान निकालना है। इस मौके पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कंवल जीत अरोड़ा और भागीदारी जन सहयोग समिति के महासचिव विजय गौड़ ने भी अपने विचार रखे।
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न्यायाधीश इंदिरा बनर्जी हरियाणा महिला आयोग द्वारा घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 और अप्रवासी भारतीय महिलाओं के उत्पीड़न पर आयोजित राष्ट्रीय वेबीनार में अपने विचार रख रही थीं। न्यायमूर्ति ने कहा कि घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के तहत राहत न केवल अपने साथी के साथ रहने वाली महिला को मिलती है, बल्कि किसी भी महिला को मिल सकती है जो अपने पिता या भाई के साथ साझा घर में रहती है। भागीदारी जन सहयोग समिति हरियाणा और दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण लीगल सर्विसिज अथॉरिटी की मुख्य सहभागिता के साथ हुए वेबीनार में देश के प्रमुख 9 शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों के सदस्यों ने अपने विचार रखे।
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सुप्रीम कोर्ट की अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 में न केवल शारीरिक अपितु मानसिक एवं आर्थिक सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया है।
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हरियाणा महिला आयोग की कार्यवाहक अध्यक्ष, प्रीति भारद्वाज दलाल ने कहा कि गृह क्लेश केवल हरियाणा प्रदेश या भारत तक ही सीमित नहीं है अपितु कोविड-19 काल में पूरे विश्व में महिलाओं के लिए एक शैडो पेंडामिक बनकर उभरी है। हम सभी को मिलकर इसका समाधान निकालना है। इस मौके पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कंवल जीत अरोड़ा और भागीदारी जन सहयोग समिति के महासचिव विजय गौड़ ने भी अपने विचार रखे।