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व्यवस्था : कमजोर नेटवर्क बना परेशानी, सरकार करे मेहरबानी, मोरनी के अधिकांश इलाकों में इंटरनेट तो दूर फोन पर बात करना भी मुश्किल
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मोरनी। कमजोर नेटवर्क के कारण इलाके के अधिकांश क्षेत्रों में इंटरनेट चलाना तो दूर यहां पर उपभोक्ता फोन पर बात करने को तरसते हैं। उपभोक्ता आधुनिक युग में एंबुलेंस सहित अन्य सरकारी सेवाओं का लाभ लेने के लिए मोबाइल नेटवर्क ढूंढने की जद्दोजहद में रहते हैं। वहीं, व्यापार के अलावा टूरिज्म पर बुरा असर पड़ रहा है। बावजूद इस समस्या के समाधान पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कमजोर मोबाइल नेटवर्क और स्लो इंटरनेट सेवाओं के चलते भारत सरकार की कैशलेस योजना भी दम तोड़ती नजर आ रही है। समस्या से सबसे अधिक परेशान छात्र हैं।
स्थानीय युवाओं का कहना है कि टूरिस्ट हब के रूप में उभरने वाला मोरनी जोकि आईटी सिटी चंडीगढ़ से मात्र 30 किलोमीटर दूरी पर स्थित है, वहां पर भी मोबाइल नेटवर्क की लचर सेवाएं हैं। जबकि हिमाचल के दुर्गम क्षेत्रों में भी मोबाइल नेटवर्क सेवाएं काफी बढ़िया हैं। यहां पर मोरनी पंचकूला मुख्य मार्ग पर भी नेटवर्क के लिए भटकना पड़ता है। वहीं, टिक्कर ताल पहुंचने के मार्ग में भी मोबाइल नेटवर्क नहीं है। इस कारण लोग किसी तरह की डिजिटल पेमेंट भी नहीं कर पाते और इस कारण यहां पर आने से भी कतराते हैं। इससे पर्यटन से जुडे़ लोगों को भारी नुकसान हो रहा है।
इन क्षेत्रों में सबसे अधिक परेशानी
इलाके में जो पंचायत सेंटर प्वाइंट मोरनी से जितनी दूर है उसमें उतनी ही नेटवर्क की समस्या है। मोरनी खंड की सबसे बड़ी पंचायत मांधना, बडीशेर क्षेत्र की चार पंचायतों, भौज राजपुरा, नीमवाला, समलौठा, धामण व मोरनी गांव के अलावा भी काफी बड़ा क्षेत्र बेहद कमजोर मोबाइल नेटवर्क से परेशान हैं। इन इलाकों में रहने वाले लोगों को कैशलेस के बारे में जागरूक करना मजाक करने जैसा है। पूर्व जिला परिषद सदस्य रमेश मांधना, कोठी पंचायत के सरपंच खेमसिंह, पूर्व सरपंच बलदेव सिंह, राजीटिकरी पूर्व सरपंच विरेंद्र सिंह सहित निर्मल सिंह खरटा, चरण सिंह कमारू, विरेंद्र सिंह खरक आदि ने सरकार को मोरनी में तुरंत सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल समेत अन्य सभी कंपनियों को आदेश जारी कर यहां पर पर्याप्त मोबाइल सुविधा देने के आदेश जारी करने की मांग की है।
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स्थानीय युवाओं का कहना है कि टूरिस्ट हब के रूप में उभरने वाला मोरनी जोकि आईटी सिटी चंडीगढ़ से मात्र 30 किलोमीटर दूरी पर स्थित है, वहां पर भी मोबाइल नेटवर्क की लचर सेवाएं हैं। जबकि हिमाचल के दुर्गम क्षेत्रों में भी मोबाइल नेटवर्क सेवाएं काफी बढ़िया हैं। यहां पर मोरनी पंचकूला मुख्य मार्ग पर भी नेटवर्क के लिए भटकना पड़ता है। वहीं, टिक्कर ताल पहुंचने के मार्ग में भी मोबाइल नेटवर्क नहीं है। इस कारण लोग किसी तरह की डिजिटल पेमेंट भी नहीं कर पाते और इस कारण यहां पर आने से भी कतराते हैं। इससे पर्यटन से जुडे़ लोगों को भारी नुकसान हो रहा है।
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इन क्षेत्रों में सबसे अधिक परेशानी
इलाके में जो पंचायत सेंटर प्वाइंट मोरनी से जितनी दूर है उसमें उतनी ही नेटवर्क की समस्या है। मोरनी खंड की सबसे बड़ी पंचायत मांधना, बडीशेर क्षेत्र की चार पंचायतों, भौज राजपुरा, नीमवाला, समलौठा, धामण व मोरनी गांव के अलावा भी काफी बड़ा क्षेत्र बेहद कमजोर मोबाइल नेटवर्क से परेशान हैं। इन इलाकों में रहने वाले लोगों को कैशलेस के बारे में जागरूक करना मजाक करने जैसा है। पूर्व जिला परिषद सदस्य रमेश मांधना, कोठी पंचायत के सरपंच खेमसिंह, पूर्व सरपंच बलदेव सिंह, राजीटिकरी पूर्व सरपंच विरेंद्र सिंह सहित निर्मल सिंह खरटा, चरण सिंह कमारू, विरेंद्र सिंह खरक आदि ने सरकार को मोरनी में तुरंत सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल समेत अन्य सभी कंपनियों को आदेश जारी कर यहां पर पर्याप्त मोबाइल सुविधा देने के आदेश जारी करने की मांग की है।
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