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Highcourt News: हत्या के दोषियों की उम्रकैद की सजा का आदेश रद्द, हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट पर की टिप्पणी

Sat, 12 Nov 2022 08:30 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sat, 12 Nov 2022 08:30 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने कहा कि हत्या के मामले में किसी को दोषी साबित करने के लिए तथ्यों को साबित करना बेहद जरूरी है। यदि तथ्य और पर्याप्त सबूत नहीं है तो किसी को हत्या का दोषी नहीं साबित किया जा सकता।

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Appeal of killer convicts approved in High Court, order of life imprisonment canceled
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

विस्तार

हत्या के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा के खिलाफ दो व्यक्तियों की अपील को मंजूर करते हुए सजा का आदेश रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि अदालतों को संवेदनशील होने और अनुमान के आधार पर दोषी करार देने से बचना चाहिए।

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जय करण और राम करण ने सोनीपत की ट्रायल कोर्ट द्वारा हत्या के मामले में दोषी करार देने और उम्रकैद की सजा के आदेश को चुनौती दी थी। दोनों पर जयकरण की पत्नी सीमा की हत्या की एफआईआर दर्ज की गई थी। मृतका सीमा के भाई मुनीराम ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया था कि उसकी बहन का विवाह 2008 में हुआ था। विवाह के बाद से ही उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता था। फरवरी 2014 में उसकी बहन को जलाकर उसकी हत्या कर दी गई थी। 
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ट्रायल कोर्ट ने सितंबर 2015 को जय करण और राम करण को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ दोनों ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। याचिका पर सुनवाई के बाद अपना फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि हत्या के मामले में किसी को दोषी साबित करने के लिए तथ्यों को साबित करना बेहद जरूरी है। यदि तथ्य और पर्याप्त सबूत नहीं है तो किसी को हत्या का दोषी नहीं साबित किया जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए तथ्यों और सबूतों से अधिक गवाहों पर भरोसा दिखाया है। कोर्ट ने कहा कि अदालतों को संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए और किसी को दोषी करार देते हुए परिकल्पना व अनुमान से ऊपर उठकर काम करना चाहिए। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने दोनों की अपील मंजूर करते हुए उन्हें बरी करने का आदेश दिया है।

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