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‘इस मौसम में रेहड़ी फड़ी पर न खाएं, वरना होंगे परेशान’
ब्यूरो, अमर उजाला/पंचकूला
Updated Mon, 23 May 2016 01:37 AM IST
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डाक्टर
- फोटो : doctor
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अगर आपको उल्टी और दस्त है तो तुरंत डाक्टर को दिखाएं क्योंकि यह डायरिया भी हो सकता है। समय रहते इसका इलाज नहीं हुआ तो यह क्रोनिक डिजीज भयावह रूप ले सकता है और पेशाब बनना बंद हो सकती है। ऐसी स्थिति में किडनी फेल होने की संभावना भी रहती है। पंचकूला के जनरल अस्पताल में रोजाना डायरिया के पंद्रह से बीस मरीज पहुंच रहे हैं।
अस्पताल के फिजिशियन डॉ. अश्वनी भटनागर ने बताया कि गर्मी के दिनों में लोगों को रेहड़ी पर खुले में बिकने वाली चीजों को खाने से परहेज करने की जरूरत है। खासकर मई और जून में जहां भी जाएं, पानी की बोतल साथ लेकर चलें ताकि आपके शरीर में पानी की कमी न हो। उन्होंने बताया कि इसकी चपेट में छोटे बच्चे और बुजुर्ग ज्यादा आते हैं।
खासकर उन्हें विशेष ध्यान देने की जरूरत है। गर्मी के दिनों में यदि दस्त लगातार होने लगे तो डॉक्टर से संपर्क करना उचित रहता है। दो से तीन दिन तक डायरिया रहने पर इससे डिहाइड्रेशन हो जाती है और मरीज की स्थिति काफी गंभीर हो जाती है। डायरिया का इलाज सिर्फ परहेज से ही होता है और डिहाइड्रेशन में मरीज को इलेक्ट्रोलाइट्स और सेलाइन (ग्लूकोज पानी) सूई के जरिए चढ़ाना पड़ता है। डायरिया होने पर ज्यादा से ज्यादा इलेक्ट्रोलाइट्स पानी, ओआरएस घोल पीते रहना चाहिए ताकि डिहाइड्रेशन न हो।
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खतरनाक है डायरिया
डायरिया एक सप्ताह में ठीक हो जाता है, लेकिन इससे ज्यादा समय तक रहने के बाद ये क्रॉनिक डायरिया कहलाता है। इसका समय पर इलाज न होने पर यह खतरनाक भी हो सकता है, लेकिन इसे जरा सी सावधानी बरत कर ठीक भी किया जा सकता है। इसके लिए डायरिया के लक्षण जानना काफी जरूरी है।
डायरिया होने पर इनका करें परहेज
तेल-मसालों वाले खाने से परहेज करना चाहिए।
दूध या उससे बने पदार्थ नहीं खाने चाहिए, मरीज की हालत और बिगड़ जाती है।
डायरिया के लक्षण
- जल्दी-जल्दी दस्त होना।
- पेट में तेज दर्द होना।
- पेट में मरोड़ पड़ना।
- उल्टी आना।
- बुखार होना।
- कमजोरी महसूस होना।
डायरिया का इलाज
- डायरिया के उपचार में आहार का बड़ा महत्व है।
- केले, चावल, सेब का मुरब्बा और टोस्ट का मिश्रण (जिसे ब्राट कहते हैं) के इस्तेमाल से राहत मिलती है।
- केले और चावल आंतों की गति को नियंत्रित करने और दस्त को बांधने में सहायता करते हैं।
- सेब और केले में मौजूद पेक्टिन न केवल दस्त की मात्रा कम करता है बल्कि डायरिया को रोकने में भी प्रभावशाली भूमिका निभाता है।
- पर्याप्त मात्रा में तरल और अन्य पोषक पदार्थ लेना आवश्यक है।
- अगर फिर भी डायरिया बढ़ रहा है तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
कोट्स
खुले में बिकने वाले सोडा, जलजीरा, नींबू पानी, शिकंजी, कटे फल और सड़क किनारे बिकने वाले गोलगप्पे खाने से सितंबर तक परहेज करें। शुगर और बीपी के पेशेंट को इस मौसम में ध्यान रखने की आवश्यकता है। बाजार में बिकने वाली खुली चीजें मत खाएं। मनीमाजरा, राजीव कॉलोनी और पंचकूला से डायरिया के काफी पेशेंट अस्पताल में आ रहे हैं।
-डॉ. अश्वनी भटनागर, फिजिशियन, सेक्टर-6 पंचकूला।
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अस्पताल के फिजिशियन डॉ. अश्वनी भटनागर ने बताया कि गर्मी के दिनों में लोगों को रेहड़ी पर खुले में बिकने वाली चीजों को खाने से परहेज करने की जरूरत है। खासकर मई और जून में जहां भी जाएं, पानी की बोतल साथ लेकर चलें ताकि आपके शरीर में पानी की कमी न हो। उन्होंने बताया कि इसकी चपेट में छोटे बच्चे और बुजुर्ग ज्यादा आते हैं।
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खासकर उन्हें विशेष ध्यान देने की जरूरत है। गर्मी के दिनों में यदि दस्त लगातार होने लगे तो डॉक्टर से संपर्क करना उचित रहता है। दो से तीन दिन तक डायरिया रहने पर इससे डिहाइड्रेशन हो जाती है और मरीज की स्थिति काफी गंभीर हो जाती है। डायरिया का इलाज सिर्फ परहेज से ही होता है और डिहाइड्रेशन में मरीज को इलेक्ट्रोलाइट्स और सेलाइन (ग्लूकोज पानी) सूई के जरिए चढ़ाना पड़ता है। डायरिया होने पर ज्यादा से ज्यादा इलेक्ट्रोलाइट्स पानी, ओआरएस घोल पीते रहना चाहिए ताकि डिहाइड्रेशन न हो।
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खतरनाक है डायरिया
डायरिया एक सप्ताह में ठीक हो जाता है, लेकिन इससे ज्यादा समय तक रहने के बाद ये क्रॉनिक डायरिया कहलाता है। इसका समय पर इलाज न होने पर यह खतरनाक भी हो सकता है, लेकिन इसे जरा सी सावधानी बरत कर ठीक भी किया जा सकता है। इसके लिए डायरिया के लक्षण जानना काफी जरूरी है।
डायरिया होने पर इनका करें परहेज
तेल-मसालों वाले खाने से परहेज करना चाहिए।
दूध या उससे बने पदार्थ नहीं खाने चाहिए, मरीज की हालत और बिगड़ जाती है।
डायरिया के लक्षण
- जल्दी-जल्दी दस्त होना।
- पेट में तेज दर्द होना।
- पेट में मरोड़ पड़ना।
- उल्टी आना।
- बुखार होना।
- कमजोरी महसूस होना।
डायरिया का इलाज
- डायरिया के उपचार में आहार का बड़ा महत्व है।
- केले, चावल, सेब का मुरब्बा और टोस्ट का मिश्रण (जिसे ब्राट कहते हैं) के इस्तेमाल से राहत मिलती है।
- केले और चावल आंतों की गति को नियंत्रित करने और दस्त को बांधने में सहायता करते हैं।
- सेब और केले में मौजूद पेक्टिन न केवल दस्त की मात्रा कम करता है बल्कि डायरिया को रोकने में भी प्रभावशाली भूमिका निभाता है।
- पर्याप्त मात्रा में तरल और अन्य पोषक पदार्थ लेना आवश्यक है।
- अगर फिर भी डायरिया बढ़ रहा है तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
कोट्स
खुले में बिकने वाले सोडा, जलजीरा, नींबू पानी, शिकंजी, कटे फल और सड़क किनारे बिकने वाले गोलगप्पे खाने से सितंबर तक परहेज करें। शुगर और बीपी के पेशेंट को इस मौसम में ध्यान रखने की आवश्यकता है। बाजार में बिकने वाली खुली चीजें मत खाएं। मनीमाजरा, राजीव कॉलोनी और पंचकूला से डायरिया के काफी पेशेंट अस्पताल में आ रहे हैं।
-डॉ. अश्वनी भटनागर, फिजिशियन, सेक्टर-6 पंचकूला।