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हरियाणा: खेतों में पराली जलाने से रोकने का एक्शन प्लान तैयार, रिपोर्ट पेश
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चंडीगढ़। प्रदूषण नियंत्रण और पराली जलाने पर रोकथाम को लेकर हरियाणा सरकार ने पूरा मसौदा तैयार कर लिया है। मंगलवार को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अध्यक्ष के समक्ष प्रदेश सरकार तैयारियों की रिपोर्ट पेश करेगी। प्रदेश के मुख्य सचिव समेत कृषि विभाग के आला अधिकारी आयोग के साथ बैठक करके इस पर मंथन भी करेंगे। इसके लिए सरकार ने पहले से ही पूरा होम वर्क कर लिया है।
सितंबर के अंतिम सप्ताह और अक्तूबर की शुरुआत में प्रदेश में धान कटाई का सीजन शुरू होता है। इसके बाद किसानों द्वारा पराली जलाने से दिसंबर तक दिल्ली, एनसीआर के जिलों में प्रदूषण स्तर बढ़ जाता है। इस बार ऐसा न हो, इसके लिए सरकार ने पहले से ही तैयार कर ली है। दूसरा वायु गुणवत्ता प्रबंध आयोग भी इस पर गंभीर है। मंगलवार को चंडीगढ़ में होने वाली बैठक में फसलों के अवशेषों को जलाने और सर्दियों से पहले वायु प्रदूषण को कम करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर मंथन किया जाएगा। इसके बाद आगामी निर्देश जारी किए जाएंगे। हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सचिव एस नारायण ने बैठक के बाद मसौदे को अंतिम रूप दिया जाएगा और पूरे प्रदेश में इसे लागू कराया जाएगा।
इन मुद्दों पर बनेगी रणनीति
बैठक में धूल और अन्य उत्सर्जन को रोकने के उपायों के अलावा बायोमास जलने की रोकथाम पर चर्चा होगी। निर्माण और वाहनों के उत्सर्जन को कम करने, डंपिंग निर्माण और विध्वंस कचरे की रोकथाम पर मंथन होगा। अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्रों के अंतिम उत्पादों को उठाने, कचरे के भंडार की तैयारी पर अपनी रणनीति भी तय होगी। यातायात की भीड़ को कम करने के लिए सड़कों का रखरखाव और धूल पर भी चर्चा की जाएगी।
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इस बार हरसेक को निगरानी की जिम्मेदारी : डॉ. मिश्रा
पराली जलाने पर रोकथाम के लिए इस बार हरियाणा सरकार ने हरियाणा अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (हरसेक) को निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी है। अंतरिक्ष के माध्यम से यह केंद्र जो भी किसान खेत में पराली जलाता है, उसकी फोटो लेता है और संबंधित किसान के खिलाफ कृषि विभाग एफआईआर से लेकर जुर्माना तक करता है। पिछले गेहूं सीजन में कोविड महामारी के चलते हरसेक को काम नहीं दिया गया और कृषि विभाग ने खुद ही जिम्मेदारी संभाली थी। लेकिन प्रदेश में काफी संख्या में पराली जलाने की घटनाएं सामने आई थीं। कृषि विभाग की एसीएस डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि पराली जलाने रोकथाम के लिए विभाग ने पूरी तैयारी कर रखी है। किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है।
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सितंबर के अंतिम सप्ताह और अक्तूबर की शुरुआत में प्रदेश में धान कटाई का सीजन शुरू होता है। इसके बाद किसानों द्वारा पराली जलाने से दिसंबर तक दिल्ली, एनसीआर के जिलों में प्रदूषण स्तर बढ़ जाता है। इस बार ऐसा न हो, इसके लिए सरकार ने पहले से ही तैयार कर ली है। दूसरा वायु गुणवत्ता प्रबंध आयोग भी इस पर गंभीर है। मंगलवार को चंडीगढ़ में होने वाली बैठक में फसलों के अवशेषों को जलाने और सर्दियों से पहले वायु प्रदूषण को कम करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर मंथन किया जाएगा। इसके बाद आगामी निर्देश जारी किए जाएंगे। हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सचिव एस नारायण ने बैठक के बाद मसौदे को अंतिम रूप दिया जाएगा और पूरे प्रदेश में इसे लागू कराया जाएगा।
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इन मुद्दों पर बनेगी रणनीति
बैठक में धूल और अन्य उत्सर्जन को रोकने के उपायों के अलावा बायोमास जलने की रोकथाम पर चर्चा होगी। निर्माण और वाहनों के उत्सर्जन को कम करने, डंपिंग निर्माण और विध्वंस कचरे की रोकथाम पर मंथन होगा। अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्रों के अंतिम उत्पादों को उठाने, कचरे के भंडार की तैयारी पर अपनी रणनीति भी तय होगी। यातायात की भीड़ को कम करने के लिए सड़कों का रखरखाव और धूल पर भी चर्चा की जाएगी।
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इस बार हरसेक को निगरानी की जिम्मेदारी : डॉ. मिश्रा
पराली जलाने पर रोकथाम के लिए इस बार हरियाणा सरकार ने हरियाणा अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (हरसेक) को निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी है। अंतरिक्ष के माध्यम से यह केंद्र जो भी किसान खेत में पराली जलाता है, उसकी फोटो लेता है और संबंधित किसान के खिलाफ कृषि विभाग एफआईआर से लेकर जुर्माना तक करता है। पिछले गेहूं सीजन में कोविड महामारी के चलते हरसेक को काम नहीं दिया गया और कृषि विभाग ने खुद ही जिम्मेदारी संभाली थी। लेकिन प्रदेश में काफी संख्या में पराली जलाने की घटनाएं सामने आई थीं। कृषि विभाग की एसीएस डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि पराली जलाने रोकथाम के लिए विभाग ने पूरी तैयारी कर रखी है। किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है।