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अचानक होगा खाने का ब हिष्कार
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पीयू में खाने का होगा बहिष्कार, पीयू प्रशासन को काउंसिल भेजेगी चिट्ठी
काउंसिल अध्यक्ष ने कहा- नुकसान होगा तभी खाने के रेट होंगे कम
- गुणवत्ता लगातार हो रही है कम, पीयू प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पीयू में लगातार खाने की गुणवत्ता खराब हो रही है। साथ ही रेट भी खाने के बढ़ाए जा रहे हैं। स्टूडेंट काउंसिल ने इसे लेकर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। काउंसिल खाने के बहिष्कार करने को लेकर पीयू प्रशासन को चिट्ठी भेज रही है। साथ ही प्रोटेस्ट करने भी करेगी।
पीयू में 78 विभाग हैं। अधिकांश विभाग की अपनी कैंटीन हैं। इसके अलावा हर हॉस्टल में एक कैंटीन व दो मेस हैं। साथ ही स्टूडेंट सेंटर पर एक दर्जन दुकानें खाने की हैं। आए दिन कैंटीन संचालक रेट बढ़ा रहे हैं। साथ ही खाने में कीड़े व कॉकरोच भी निकल रहे हैं। इसको लेकर प्रोटेस्ट किया गया, लेकिन पीयू प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की। अब विद्यार्थी खाने के बहिष्कार की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। यह कभी भी अचानक होगा। पीयू प्रशासन बैठकों पर बैठकें कर रहा है, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकल रहा है। काउंसिल अध्यक्ष कनुप्रिया का कहना है कि खाने के रेट अधिक हैं। बार बार कहने के बावजूद पीयू प्रशासन नहीं जाग रहा है। अब इसके लिए आगे की रणनीति बनाई जा रही है।
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काउंसिल अध्यक्ष ने कहा- नुकसान होगा तभी खाने के रेट होंगे कम
- गुणवत्ता लगातार हो रही है कम, पीयू प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पीयू में लगातार खाने की गुणवत्ता खराब हो रही है। साथ ही रेट भी खाने के बढ़ाए जा रहे हैं। स्टूडेंट काउंसिल ने इसे लेकर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। काउंसिल खाने के बहिष्कार करने को लेकर पीयू प्रशासन को चिट्ठी भेज रही है। साथ ही प्रोटेस्ट करने भी करेगी।
पीयू में 78 विभाग हैं। अधिकांश विभाग की अपनी कैंटीन हैं। इसके अलावा हर हॉस्टल में एक कैंटीन व दो मेस हैं। साथ ही स्टूडेंट सेंटर पर एक दर्जन दुकानें खाने की हैं। आए दिन कैंटीन संचालक रेट बढ़ा रहे हैं। साथ ही खाने में कीड़े व कॉकरोच भी निकल रहे हैं। इसको लेकर प्रोटेस्ट किया गया, लेकिन पीयू प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की। अब विद्यार्थी खाने के बहिष्कार की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। यह कभी भी अचानक होगा। पीयू प्रशासन बैठकों पर बैठकें कर रहा है, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकल रहा है। काउंसिल अध्यक्ष कनुप्रिया का कहना है कि खाने के रेट अधिक हैं। बार बार कहने के बावजूद पीयू प्रशासन नहीं जाग रहा है। अब इसके लिए आगे की रणनीति बनाई जा रही है।
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