{"_id":"5aa43ba64f1c1b92778b4c14","slug":"71520712614-panchkula-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गैरइरादतन हत्या में युवक को 10 साल कैद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गैरइरादतन हत्या में युवक को 10 साल कैद
Updated Sun, 11 Mar 2018 01:44 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गैर-इरादतन हत्या में युवक को 10 साल कैद
- अदालत ने 1500 रुपये जुर्माना भी लगाया, पानी देने से मना करने पर युवती को घोंपा था चाकू
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
पानी देने से इनकार करने पर युवती की चाकू घोंप कर हत्या करने के मामले में हत्या का आरोप साबित न होने पर जिला अदालत ने कॉलोनी नंबर चार निवासी राजकुमार उर्फ विट्ठल कानिया (23) को गैरइरादतन हत्या की धारा (आईपीसी की धारा 304 (2) में दोषी करार दिया है। अदालत ने उसे 10 साल की सजा और 1500 रुपये जुर्माना लगाया है। वहीं, अदालत ने राजकुमार को आईपीसी की धारा 323, 324 और 506 में भी दोषी पाया है। वहीं, इसी मामले में आरोपी अजय को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। राजकुमार और अजय के खिलाफ इंडस्ट्रियल एरिया थाना पुलिस ने सितंबर 2016 को आईपीसी की धारा 323, 324, 506, 354, 354बी के तहत केस दर्ज किया था। हालांकि, वारदात के तीन दिन बाद शिकायतकर्ता की मौत होने पर केस में हत्या की धारा (302) जोड़ दी गई थी।
इससे पहले पुलिस में दी शिकायत में कॉलोनी नंबर चार निवासी गुलफ़सा ने कहा था कि 15 सितंबर 2016 की रात करीब 10.30 बजे घर के बाहर बैठी हुई थी। इसी दौरान उसके पड़ोस में रहने वाला राजकुमार वहां आया और उससे पानी मांगने लगा। पहले तो उसने उसे पानी दे दिया, लेकिन इसके बाद वह बार-बार पानी मांगने आता रहा तो उसने पानी देने से इनकार कर दिया। इस पर राजकुमार ने उससे गाली-गलौज शुरू कर दी। यह सुन उसकी मां सलमा घर के बाहर आई और उसका विरोध किया।
आरोप के अनुसार इसके बाद राजकुमार गुलफ़सा के सिर के बाल पकड़ उसे घसीटता हुआ ले गया और थप्पड़ मारने शुरू कर दिए। इससे वह जमीन पर गिर गई और उठने लगी तो राजकुमार ने चाकू निकालकर गुलफ़सा के पेट में घोंप दिया। यह देख सलमा उसे बचाने आई तो राजकुमार ने उस पर भी चाकू से हमला कर दिया। दोनों के चिल्लाने की आवाज सुनकर पड़ोस में रहने वाली एक महिला भी वहां पहुंच गई। उसने राजकुमार को पकड़ने की कोशिश की तो दोषी ने उससे भी मारपीट की। यहां तक कि उसके कपड़े तक फाड़ दिए। तीनों का शोर सुनकर गुलफ़सा का भाई नींद से जागा और बाहर आया। उसने राजकुमार को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह वहां से फरार हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायलों को अस्पताल में भर्ती करवाया और राजकुमार के खिलाफ केस दर्ज किया।
विज्ञापन
18 सितंबर को गुलफ़सा की मौत होने पर सलमा ने पुलिस में शिकायत दी कि 15 सितंबर की रात राजकुमार व अजय उसके घर आए और उन लोगों पर जानलेवा हमला किया। इस हमले में उसकी बेटी गुलफ़सा की मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने केस में हत्या की धारा जोड़ दी थी। केस दर्ज होने के बाद पुलिस ने राजकुमार और अजय को गिरफ्तार कर लिया था। शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से केस की पैरवी एडवोकेट प्रतिभा भंडारी ने की।
वहीं, बचाव पक्ष के अनुसार अजय का नाम एफआईआर में नहीं था। उसे पुलिस ने बाद में मामले में झूठा फंसाया था। उसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं था। इसी आधार पर अभियोजन पक्ष अदालत में वारदात के वक्त उसकी मौजूदगी साबित नहीं कर सका, इसलिए अदालत ने उसे बरी कर दिया।
वहीं, राजकुमार के वकील का कहना है कि गुलफ़सा को वारदात के बाद जब अस्पताल में भर्ती कराया गया था तो उसके पेट पर केवल एक ही वार का निशान था। उस वक्त इलाज के अगले ही दिन वह अस्पताल से छुट्टी करवाकर घर चली गई थी। लेकिन, जब उसे दोबारा 18 सितंबर को अस्पताल में भर्ती करवाया गया तो उसके पेट पर चाकू के चार कट थे। इससे मामला संदिग्ध हो गया था। इसीलिए केस में हत्या की धारा साबित नहीं हो सकी।
विज्ञापन
- अदालत ने 1500 रुपये जुर्माना भी लगाया, पानी देने से मना करने पर युवती को घोंपा था चाकू
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
पानी देने से इनकार करने पर युवती की चाकू घोंप कर हत्या करने के मामले में हत्या का आरोप साबित न होने पर जिला अदालत ने कॉलोनी नंबर चार निवासी राजकुमार उर्फ विट्ठल कानिया (23) को गैरइरादतन हत्या की धारा (आईपीसी की धारा 304 (2) में दोषी करार दिया है। अदालत ने उसे 10 साल की सजा और 1500 रुपये जुर्माना लगाया है। वहीं, अदालत ने राजकुमार को आईपीसी की धारा 323, 324 और 506 में भी दोषी पाया है। वहीं, इसी मामले में आरोपी अजय को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। राजकुमार और अजय के खिलाफ इंडस्ट्रियल एरिया थाना पुलिस ने सितंबर 2016 को आईपीसी की धारा 323, 324, 506, 354, 354बी के तहत केस दर्ज किया था। हालांकि, वारदात के तीन दिन बाद शिकायतकर्ता की मौत होने पर केस में हत्या की धारा (302) जोड़ दी गई थी।
इससे पहले पुलिस में दी शिकायत में कॉलोनी नंबर चार निवासी गुलफ़सा ने कहा था कि 15 सितंबर 2016 की रात करीब 10.30 बजे घर के बाहर बैठी हुई थी। इसी दौरान उसके पड़ोस में रहने वाला राजकुमार वहां आया और उससे पानी मांगने लगा। पहले तो उसने उसे पानी दे दिया, लेकिन इसके बाद वह बार-बार पानी मांगने आता रहा तो उसने पानी देने से इनकार कर दिया। इस पर राजकुमार ने उससे गाली-गलौज शुरू कर दी। यह सुन उसकी मां सलमा घर के बाहर आई और उसका विरोध किया।
विज्ञापन
आरोप के अनुसार इसके बाद राजकुमार गुलफ़सा के सिर के बाल पकड़ उसे घसीटता हुआ ले गया और थप्पड़ मारने शुरू कर दिए। इससे वह जमीन पर गिर गई और उठने लगी तो राजकुमार ने चाकू निकालकर गुलफ़सा के पेट में घोंप दिया। यह देख सलमा उसे बचाने आई तो राजकुमार ने उस पर भी चाकू से हमला कर दिया। दोनों के चिल्लाने की आवाज सुनकर पड़ोस में रहने वाली एक महिला भी वहां पहुंच गई। उसने राजकुमार को पकड़ने की कोशिश की तो दोषी ने उससे भी मारपीट की। यहां तक कि उसके कपड़े तक फाड़ दिए। तीनों का शोर सुनकर गुलफ़सा का भाई नींद से जागा और बाहर आया। उसने राजकुमार को पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह वहां से फरार हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायलों को अस्पताल में भर्ती करवाया और राजकुमार के खिलाफ केस दर्ज किया।
विज्ञापन
18 सितंबर को गुलफ़सा की मौत होने पर सलमा ने पुलिस में शिकायत दी कि 15 सितंबर की रात राजकुमार व अजय उसके घर आए और उन लोगों पर जानलेवा हमला किया। इस हमले में उसकी बेटी गुलफ़सा की मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने केस में हत्या की धारा जोड़ दी थी। केस दर्ज होने के बाद पुलिस ने राजकुमार और अजय को गिरफ्तार कर लिया था। शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से केस की पैरवी एडवोकेट प्रतिभा भंडारी ने की।
वहीं, बचाव पक्ष के अनुसार अजय का नाम एफआईआर में नहीं था। उसे पुलिस ने बाद में मामले में झूठा फंसाया था। उसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं था। इसी आधार पर अभियोजन पक्ष अदालत में वारदात के वक्त उसकी मौजूदगी साबित नहीं कर सका, इसलिए अदालत ने उसे बरी कर दिया।
वहीं, राजकुमार के वकील का कहना है कि गुलफ़सा को वारदात के बाद जब अस्पताल में भर्ती कराया गया था तो उसके पेट पर केवल एक ही वार का निशान था। उस वक्त इलाज के अगले ही दिन वह अस्पताल से छुट्टी करवाकर घर चली गई थी। लेकिन, जब उसे दोबारा 18 सितंबर को अस्पताल में भर्ती करवाया गया तो उसके पेट पर चाकू के चार कट थे। इससे मामला संदिग्ध हो गया था। इसीलिए केस में हत्या की धारा साबित नहीं हो सकी।