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जीने का तरीका सिखाता है रमजान
Updated Mon, 12 Jun 2017 02:06 AM IST
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जीने का तरीका सिखाता रमजान
नीरज कुमार
चंडीगढ़।
रमजान के पवित्र माह में मुस्लिम समुदाय की दिनचर्या बदल जाती है। रोजा रखने के साथ ही पांच वक्त की नमाज और कुरान शरीफ की तराबी मन को एकदम बदल देता है। कई मुस्लिम दिनभर कुरान शरीफ पढ़ते रहते हैं। सिटी ब्यूटीफुल में भी रमजान पर काफी लोग रोजा रखते हैं। रोजा रखने के दौरान कई धार्मिक गतिविधियां होती हैं। कुछ मुस्लिम परिवारों से उन्हीं की जुबानी जानते हैं कि वह किस तरह से रमजान के महीने को मना रहे हैं।
पाक महीने में बेटियां कुरान पढ़ती हैं
निगम के मनोनीत पार्षद हाजी मोहम्मद खुर्शीद अली ने बताया कि रमजान के महीने में घर का माहौल धार्मिक हो गया है। बेटियां कुरान शरीफ पढ़ रही हैं। खुर्शीद की पत्नी हुश्न बानो कहती हैं कि वे हर रोज सुबह दो बजकर 30 मिनट पर उठती हैं। शहरी तैयार करने के बाद वे सभी घर वालों को जगाती हैं। फिर तहाज्जुद की नमाज अदा करती हैं। वह बताती हैं कि इससे बहुत सवाब (पुण्य) मिलता है। सबसे अच्छी बात यह है कि शहरी के वक्त परिवार के सभी लोग एक साथ होते हैं। दोनों बेटियां भी इस पाक महीने में कुरान पढ़ती हैं।
देश व समाज की सलामती के लिए अल्लाह की इबादत करते हैं
रामदरबार में रहने वाले हाजी अब्दुल रईस ने बताया कि वे छह भाईयों और उनके परिवार के साथ इकट्ठे रहते हैं। रईस का कहना है कि रमजान के पवित्र महीने का इंतजार रहता है। उपवास रखना। धर्म पूर्वक रहना। यही दिनचर्या है। छोटे बच्चों को छोड़कर पूरा परिवार रोजा रखता है। घर में सभी लोग एक-दूसरे का हाथ बंटाते हैं। बेगम शाहजहां का कहना है कि पूरा परिवार रमजान में रोजा रखता है। अल्लाह की इबादत करते हैं, ताकि परिवार समाज और देश में अमन और सलामती रहे।
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यह महीना दुआओं व कुरानों का है
सेक्टर-26 स्थित नूरानी मस्जिद के मुफ्ती मोहम्मद अनस कासमी ने बताया कि रमजान का महीना बेहद पाक और रहमतों वाला होता है। इस दौरान 30 दिन तक रोजे रखे जाते हैं। दिन निकालने से पहले और सूर्य के डूबने तक किसी भी तरह की चीज खाने पीने से परहेज करना जरूरी है। इसके साथ ही आंख, दिल और पूरे शरीर को बुराइयों से बचाना भी जरूरी है। रमजान के रात में एक विशेष नमाज होती है जिसे तराबीह कहा जाता है। यह सबसे लंबी 20 रकाआत दो दो करके जमात के साथ मस्जिदों में पढ़ी जाती है। रमजान शरीफ में शब ए कद्र की रात का विशेष महत्व होता है। रमजान की 21, 23, 25, 27 और 29 में से एक रात शब ए कद्र होती है। इसलिए इन रातों में खास इबादत पढ़ी जाती है, जिसके लिए ऐतिकाल किया जाता है। रजमान शरीफ में विशेष तौर पर हुक्म है कि दान करो। बुराइयों से बचो। प्रेम, हमदर्दी और भाईचारा बनाए रखो। इंसानियत की भलाई, अपने वतन और पूरी दुनिया के सुख शांति के लिए बंदा अपने अल्लाह से दुआएं मांगे। क्योंकि यह महीना दुआओं का भी है और कुरान का भी।
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नीरज कुमार
चंडीगढ़।
रमजान के पवित्र माह में मुस्लिम समुदाय की दिनचर्या बदल जाती है। रोजा रखने के साथ ही पांच वक्त की नमाज और कुरान शरीफ की तराबी मन को एकदम बदल देता है। कई मुस्लिम दिनभर कुरान शरीफ पढ़ते रहते हैं। सिटी ब्यूटीफुल में भी रमजान पर काफी लोग रोजा रखते हैं। रोजा रखने के दौरान कई धार्मिक गतिविधियां होती हैं। कुछ मुस्लिम परिवारों से उन्हीं की जुबानी जानते हैं कि वह किस तरह से रमजान के महीने को मना रहे हैं।
पाक महीने में बेटियां कुरान पढ़ती हैं
निगम के मनोनीत पार्षद हाजी मोहम्मद खुर्शीद अली ने बताया कि रमजान के महीने में घर का माहौल धार्मिक हो गया है। बेटियां कुरान शरीफ पढ़ रही हैं। खुर्शीद की पत्नी हुश्न बानो कहती हैं कि वे हर रोज सुबह दो बजकर 30 मिनट पर उठती हैं। शहरी तैयार करने के बाद वे सभी घर वालों को जगाती हैं। फिर तहाज्जुद की नमाज अदा करती हैं। वह बताती हैं कि इससे बहुत सवाब (पुण्य) मिलता है। सबसे अच्छी बात यह है कि शहरी के वक्त परिवार के सभी लोग एक साथ होते हैं। दोनों बेटियां भी इस पाक महीने में कुरान पढ़ती हैं।
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देश व समाज की सलामती के लिए अल्लाह की इबादत करते हैं
रामदरबार में रहने वाले हाजी अब्दुल रईस ने बताया कि वे छह भाईयों और उनके परिवार के साथ इकट्ठे रहते हैं। रईस का कहना है कि रमजान के पवित्र महीने का इंतजार रहता है। उपवास रखना। धर्म पूर्वक रहना। यही दिनचर्या है। छोटे बच्चों को छोड़कर पूरा परिवार रोजा रखता है। घर में सभी लोग एक-दूसरे का हाथ बंटाते हैं। बेगम शाहजहां का कहना है कि पूरा परिवार रमजान में रोजा रखता है। अल्लाह की इबादत करते हैं, ताकि परिवार समाज और देश में अमन और सलामती रहे।
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यह महीना दुआओं व कुरानों का है
सेक्टर-26 स्थित नूरानी मस्जिद के मुफ्ती मोहम्मद अनस कासमी ने बताया कि रमजान का महीना बेहद पाक और रहमतों वाला होता है। इस दौरान 30 दिन तक रोजे रखे जाते हैं। दिन निकालने से पहले और सूर्य के डूबने तक किसी भी तरह की चीज खाने पीने से परहेज करना जरूरी है। इसके साथ ही आंख, दिल और पूरे शरीर को बुराइयों से बचाना भी जरूरी है। रमजान के रात में एक विशेष नमाज होती है जिसे तराबीह कहा जाता है। यह सबसे लंबी 20 रकाआत दो दो करके जमात के साथ मस्जिदों में पढ़ी जाती है। रमजान शरीफ में शब ए कद्र की रात का विशेष महत्व होता है। रमजान की 21, 23, 25, 27 और 29 में से एक रात शब ए कद्र होती है। इसलिए इन रातों में खास इबादत पढ़ी जाती है, जिसके लिए ऐतिकाल किया जाता है। रजमान शरीफ में विशेष तौर पर हुक्म है कि दान करो। बुराइयों से बचो। प्रेम, हमदर्दी और भाईचारा बनाए रखो। इंसानियत की भलाई, अपने वतन और पूरी दुनिया के सुख शांति के लिए बंदा अपने अल्लाह से दुआएं मांगे। क्योंकि यह महीना दुआओं का भी है और कुरान का भी।