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Panchkula News: पंचकूला में डेरा सच्चा सौदा हिंसा में नहीं हुई 29 आरोपियों की पहचान, कोर्ट से बरी

Sun, 13 Apr 2025 01:35 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 13 Apr 2025 01:35 AM IST
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29 accused not identified in Dera Sacha Sauda violence in Panchkula, acquitted by court
पंचकूला। दुष्कर्म में आरोपी डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख बाबा गुरमीत सिंह उर्फ राम रहीम की सजा को लेकर पंचकूला में हुई हिंसा के मामले में सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने 9 अप्रैल को 29 आरोपियों की पहचान न होने से उनको बरी करने का आदेश दिया है। इसी मामले से जुड़े तीन आरोपियों की पहले ही मौत हो चुकी है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अजय कुमार ने 25 अगस्त, 2017 में सिरसा डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह उर्फ राम रहीम को दुष्कर्म के एक मामले में स्थानीय सीबीआई अदालत ने अज्ञात 29 आरोपियों को दोषी ठहराया था। बाबा गुरमीत को पंचकूला अदालत से सजा सुनाने के बाद पंचकूला में भड़की हिंसा में शामिल अज्ञात 29 आरोपियों के खिलाफ दर्ज किए गए केस में सुनवाई के दौरान मजिस्ट्रेट की अदालत ने सभी 29 आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया। बरी किए गए आरोपी पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और नई दिल्ली के रहने वाले बताए जा रहे थे। इन 29 आरोपियों के खिलाफ 2019 में आरोप तय किए गए थे और उसके बाद मुकदमा शुरू हुआ था।
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पहले भी बरी हुए थे कई आरोपी
डेरा सच्चा सौदा के बाबा गुरमीत सिंह उर्फ राम रहीम हिंसा की घटना में शामिल कई अन्य आरोपियों को पहले ही अलग-अलग एफआईआर में बरी किया जा चुका है। इसके अलावा कई अन्य संबंधित मामले अभी भी विचाराधीन हैं। जानकारी के अनुसार सेक्टर-5 थाना पुलिस ने 26 अगस्त, 2017 को धारा 147 (दंगा), 148 (घातक हथियार से लैस होकर दंगा), 149 (अवैध रूप से एकत्र होना), 186 (लोक सेवक के सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन में बाधा डालना), 188 (लोक सेवक द्वारा विधिवत रूप से जारी आदेश की अवज्ञा), 332 (लोक सेवक के कर्तव्य में विरत कर स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 353 (लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से विरत करने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग), 506 (आपराधिक धमकी) तथा सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम की धारा 3 व 4 के तहत केस दर्ज किया था।
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एसएसबी जवानों पर भी हुआ था हमला

इस मामले में 26 अगस्त, 2017 को सहायक कमांडेंट (एसएसबी) संतोष पंडित ने सेक्टर-5 थाना प्रभारी एसएचओ के सामने शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें कहा था कि 25 अगस्त 2017 को पंचकूला के सेक्टर-2 के हैफेड चौक पर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए 40 एसएसबी कर्मियों को तैनात किया गया था। जब वे बाबा गुरमीत के अनुयायियों की भीड़ को नियंत्रित कर रहे थे, तो उन्हीं अनुयायियों ने उन पर हमला कर दिया था। इस हमले में शिकायतकर्ता की यूनिट के एक एसएसबी कर्मी धर्मेंद्र सिंह को चोटें आईं थीं। इसके बाद आरोपों के आधार पर वर्तमान एफआईआर दर्ज की गई।
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नहीं कर पाए आरोपियों की पहचान
अदालत में संतोष पंडित ने कहा कि उन्हें इस मामले की कोई व्यक्तिगत जानकारी नहीं है। हिंसा के दिन लोगों की संख्या अधिक और भीड़ के कारण वे किसी भी आरोपी व्यक्ति की पहचान नहीं कर पाए। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष ने आरोपियों को हमलावरों या तोड़फोड़ और आगजनी में शामिल व्यक्तियों के रूप में नहीं पहचाना।


ये रहे गवाहों के बयान
इसमें कहा कि अभियोजन पक्ष के गवाहों एएसआई संदीप, वेद प्रकाश (सीएसआई, एमसी, पंचकूला), एचसी जसमेर सिंह, एसपीओ अशोक कुमार, नीरज ढांडा और राम किशन ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने अदालत में मौजूद आरोपियों की पहचान नहीं की। इन बयानों के आलोक में, अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि आरोपी व्यक्तियों को कथित अपराध के साथ जोड़ने के लिए कोई प्रत्यक्ष सबूत उपलब्ध नहीं था। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष सभी उचित संदेहों से परे आरोपियों के खिलाफ अपना मामला साबित करने में बुरी तरह विफल रहा है। इसलिए आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों से बरी किया जाता है।
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