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मरीज देखने चाहिए 30-35, देखते हैं 100 से ज्यादा

Tue, 15 Jan 2019 01:23 AM IST
Panchkula bureau Panchkula bureau
Updated Tue, 15 Jan 2019 01:23 AM IST
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अमर उजाला अभियान -इलाज नहीं सिर्फ इंतजार

मरीज देखने चाहिए 30 से 35, डाक्टर देखते हैं 100 से ज्यादा
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अस्पतालों में मरीजों का बोझ बढ़ने से डाक्टरों पर भी जबरदस्त बोझ, रिसर्च और टीचिंग पर पड़ रहा असर

आशीष वर्मा
चंडीगढ़। अस्पतालों में मरीजों का बोझ बढ़ने से मरीज तो परेशान हैं, साथ ही डाक्टरों को भी नुकसान झेलना पड़ता है। विशेषज्ञों के मुताबिक एक डाक्टर को एक ओपीडी में कम से कम 25-30 मरीज देखने चाहिए ताकि हर मरीज को वे उचित वक्त दे सकें। यदि ज्यादा देखेंगे तो मरीज को कम समय दे पाएंगे। पीजीआई के डाक्टरों ने बताया कि एक ओपीडी में वह 110-120 मरीज को देखते हैं, जो काफी ज्यादा है। यदि मरीज कम होंगे तो वे मरीज के साथ रिसर्च और टीचिंग में ज्यादा वक्त दे पाएंगे। पीजीआई एक रिसर्च व ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट है। इसका मकसद देश को ऐसे डाक्टर देना है, ताकि वह देश के हर कोने में जाकर मरीजों की सेवा करें। यदि टीचिंग ही प्रभावित होगी तो पीजीआई का मकसद पूरा नहीं हो सकेगा।
पीजीआई के एक अन्य डाक्टर ने बताया कि वह एक ओपीडी में करीब 90 मरीज देखते हैं। इनमें करीब 15 फीसदी ऐसे मरीज होते हैं, जो जनरल हास्पिटल में ठीक हो सकते हैं। यदि इन मरीजों को वहीं इलाज मिल जाए तो काफी हद तक यह समस्या हल हो सकती है। इसके लिए पेरीफेरी के हास्पिटल को अपग्रेड करने की जरूरत है। उनके मुताबिक पहले उनकी ओपीडी चार से साढ़े चार बजे तक ओवर हो जाती थी, लेकिन अब कभी छह बजते हैं तो कभी सात। अब ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है कि ओपीडी साढ़े पांच बजे खत्म हो गई हो। मरीज की बढ़ी संख्या तो चिंताजनक है, लेकिन यहां पर मरीजों का क्लीयरेंस बहुत धीमे होता है। आपरेशन थियेटर हैं नहीं। मान लीजिए कोई मरीज किडनी स्टोन लेकर आया। यदि उसे जल्द इलाज नहीं मिला तो उसकी किडनी में भी इफेक्ट आ जाएगा। जब मरीज गंभीर होता है तो वह हास्पिटल में ज्यादा समय बिताता है। जब वह ज्यादा दिन तक रहेगा तो दूसरे मरीज को उतनी देरी से बेड मिलेगा।
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सेक्टर-16 के हास्पिटल में भी डाक्टरों पर बोझ
ऐसा नहीं है कि सिर्फ पीजीआई के डाक्टरों पर मरीजों का दबाव है, बल्कि दूसरे सिविल हास्पिटल और सेक्टर-16 हास्पिटल पर मरीजों का बोझ बढ़ा है। चंडीगढ़ स्वास्थ्य विभाग के डिपार्टमेंट के मुताबिक ,साल 2017 में सिटी के सिविल हास्पिटल और डिस्पेंसरी में कुल 29 लाख मरीज आए थे, जबकि साल 2018 में यह संख्या बढ़कर 33 लाख पहुंच गई है। सेक्टर 16 हास्पिटल के एक वरिष्ठ डाक्टर ने बताया कि यहां पर भी एक डाक्टर के खाते में 70-80 मरीज आते हैं। कुछ डिपार्टमेंट ऐसे हैं, जहां मरीज का आंकड़ा 100 भी पार कर जाता है। यहां भी एक दिक्कत सामने आ रही है कि कुछ मरीजों का मर्ज डिस्पेंसरी में ठीक हो सकता है, लेकिन वह सेक्टर 16 ही आते हैं। दरअसल, उन्हें पता है कि वहां भी टेस्ट मुमकिन नहीं है। टेस्ट के लिए उन्हें सेक्टर-16 हास्पिटल में ही जाना होगा। ऐसे में दो बार से ज्यादा चक्कर लगेंगे। इससे बेहतर है कि सेक्टर 16 के हास्पिटल में ही जाया जाए। डाक्टरों ने बताया है कि पहले उनकी ओपीडी एक बजे तक खाली हो जाती थी, लेकिन ओपीडी तीन बजे तक चलती है।
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सेक्टर-16 में कम दाखिल हुए पेशेंट, बाकी अस्पतालों में बढ़े
अस्पताल 2017 2018
जीएमएसएच 16 52790 49040
हास्पिटल 22 11929 12288
मनीमाजरा 9385 11408
सेक्टर 45 4886 6448
रामदरबार 4683 4136
जीएमसीएच 32 58353 53141
पीजीआई 95152 98831
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