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अपनी कुर्सी पर दूसरे को बैठाकर पटवारी लोगों से लेता था रिश्वत
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पंचकूला। स्थानीय शहरी निकाय मंत्री कविता जैन ने अपनी कुर्सी पर किसी दूसरे व्यक्ति को बैठाकर एक हजार रुपये रिश्वत लेने वाले पटवारी फूल सिंह को सस्पेंड करने के आदेश दिए हैं। इतना ही नहीं उन्होंने पटवारी की सरकारी कुर्सी पर बैठने वाले व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार करने के निर्देश डीसीपी को दिए हैं। निकाय मंत्री ने यह आदेश एसडीएम की जांच रिपोर्ट में दोषी पाए जाने के बाद जारी किए हैं। वहीं, मंत्री के इस कड़े रुख से प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। वह सोमवार को जिला सचिवालय में शिकायत निवारण समिति की बैठक में लोगों की शिकायतें सुन रहीं थीं। उन्होंने कुल 17 में से 12 शिकायतों का मौके पर निपटारा किया, जबकि पांच शिकायतों को अगली सुनवाई के लिए लंबित कर दिया।
शिकायत निवारण समिति की बैठक में गांव बतौड़ के मनीष कुमार ने आरोप लगाया कि पटवारी फूल सिंह की सीट पर बैठकर कोई प्राइवेट व्यक्ति राजस्व संबंधी कार्य करता है। इस व्यक्ति ने इंतकाल दर्ज करने के नाम पर एक हजार रुपये की रिश्वत ली है। मनीष कुमार ने मंत्री कविता जैन को वीडियो दिखा कर बताया कि पटवारी कैसे बंदर बांट कर रहा है। मनीष कुमार की इस शिकायत पर निकाय मंत्री ने पिछली बैठक में एसडीएम पंकज सेतिया को जांच रिपोर्ट देने का आदेश दिया था। एसडीएम की जांच रिपोर्ट में मनीष द्वारा लगाए गए सभी आरोप सही पाए गए। रिपोर्ट के आधार पर पटवारी को चार्जशीट किया गया था। लेकिन कविता जैन ने कहा कि पटवारी को चार्जशीट की बजाय निलंबित करें और उसकी सीट पर बैठकर जो प्राइवेट व्यक्ति सरकारी कार्य कर रहा है उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करें। उन्होंने इस मामले की गहन जांच करने के आदेश भी दिए ताकि रिश्वत के इस मामले में और कौन लोग शामिल हैं उनका भी पता लगाया जा सके।
पहले कहा- करो सस्पेंड, फिर कागजी कार्रवाई तक सिमट गए आदेश
‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ कहावत को गांव खोई की सरपंच, पंचायत सेक्रेटरी और जेई ने सच साबित कर दिया। इस मामले में प्रीतम चंद की शिकायत थी कि उनके गांव में सरकार द्वारा धर्मशाला बनाने के लिए अनुदान दिया गया था, लेकिन ग्राम पंचायत और अधिकारियों ने धर्मशाला खोई की बजाय टोरन गांव में बनवा दिया है। इस मुद्दे को भाजपा नेता कंवरसेन सिंगला ने मंत्री के समक्ष रखा। मंत्री ने शिकायत सुनने के बाद कहा कि यह तो सरेआम बदमाशी है। उन्होंने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि मामले से संबंधित अधिकारियों को सस्पेंड किया जाए और सरपंच के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। अपना पक्ष रखने के लिए सरपंच, अधिकारी और उस पक्ष के भाजपा नेता भी मौजूद थे। भाजपा नेताओं की मध्यस्थता के कारण मामले में मंत्री कविता जैन का रुख नरम तो पड़ ही गया था, लेकिन पब्लिक प्लेटफॉर्म पर सब हो रहा था। इसलिए मंत्री ने पहले निर्देश दिए कि सरपंच माइक पर सब के सामने अपनी गलती कबूल करें और माफी मांगें। सरपंच ने माइक पर अपनी गलती तो मान ली। लेकिन कविता जैन के कहने के बाद भी सरपंच और उसके पति ने लिखित में माफीनामा देने से साफ मना कर दिया और वह बैठक छोड़कर बाहर चले गए। मंत्री बार-बार निर्देश देती रहीं कि सरपंच को वापस बुलाओ लेकिन वह वापस नहीं आईं। वहीं, करीब आधे घंटे तक चली इस मामले की सुनवाई में मंत्री के अधिकारियों को सस्पेंड करने के आदेश मात्र विभागीय कार्रवाई तक सिमट कर रह गया।
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पुलिस के खिलाफ वायरल वीडियो मामले में हंगामा
बैठक में गेट नंबर एक चंडीमंदिर निवासी वरिष्ठ नागरिक रमेश्वर दत्त की शिकायत थी कि वरिष्ठ नागरिक ट्रिब्यूनल द्वारा आदेश जारी करने के बावजूद उसके मकान को पुत्रवधु और बच्चों से पूरी तरह खाली नहीं करवाया गया। वहीं दूसरी तरफ अपना पक्ष रखने के लिए उनकी पुत्रवधु और पोता-पोती के साथ बड़ी संख्या में गांव के लोग पहुंचे थे। रामेश्वर दत्त ने जैसे ही अपनी बात रखी उनकी पुत्रवधु और गांव वासियों ने हंगामा कर दिया। पुलिस अधिकारियों ने तत्काल हस्तक्षेप कर लोगों को शांत करवाया। रामेश्वर दत्त का आरोप था कि उसके बच्चे सेवा नहीं करते हैं इसलिए उन्हें घर में नहीं रहने देंगे। जबकि पुत्रवधु और गांव वासियों का कहना है कि रामेश्वर दत्त झूठ बोल रहे हैं। करीब आधे घंटे तक यह मुद्दा चलता रहा। अंत में कविता जैन ने इस मामले का हल सामाजिक तौर पर निकालने की बात कहीं। इस मामले में शिकायत निवारण समिति के तीन सदस्य एचएल शर्मा, जोगिंद्र और वीवी सिंघल को सामाजिक समाधान के लिए अधिकृत किया। बैठक में विधायक ज्ञानचंद गुप्ता, कालका विधायक लतिका शर्मा, जिला परिषद चेयरपर्सन रितु सिंगला, पुलिस उपायुक्त कमलदीप गोयल, अतिरिक्त उपायुक्त उत्तम सिंह, एसडीएम पंकज सेतिया, कालका एसडीएम मनीता मलिक, नगराधीश गगनदीप सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक शर्मा मौजूद रहे।
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शिकायत निवारण समिति की बैठक में गांव बतौड़ के मनीष कुमार ने आरोप लगाया कि पटवारी फूल सिंह की सीट पर बैठकर कोई प्राइवेट व्यक्ति राजस्व संबंधी कार्य करता है। इस व्यक्ति ने इंतकाल दर्ज करने के नाम पर एक हजार रुपये की रिश्वत ली है। मनीष कुमार ने मंत्री कविता जैन को वीडियो दिखा कर बताया कि पटवारी कैसे बंदर बांट कर रहा है। मनीष कुमार की इस शिकायत पर निकाय मंत्री ने पिछली बैठक में एसडीएम पंकज सेतिया को जांच रिपोर्ट देने का आदेश दिया था। एसडीएम की जांच रिपोर्ट में मनीष द्वारा लगाए गए सभी आरोप सही पाए गए। रिपोर्ट के आधार पर पटवारी को चार्जशीट किया गया था। लेकिन कविता जैन ने कहा कि पटवारी को चार्जशीट की बजाय निलंबित करें और उसकी सीट पर बैठकर जो प्राइवेट व्यक्ति सरकारी कार्य कर रहा है उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करें। उन्होंने इस मामले की गहन जांच करने के आदेश भी दिए ताकि रिश्वत के इस मामले में और कौन लोग शामिल हैं उनका भी पता लगाया जा सके।
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पहले कहा- करो सस्पेंड, फिर कागजी कार्रवाई तक सिमट गए आदेश
‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ कहावत को गांव खोई की सरपंच, पंचायत सेक्रेटरी और जेई ने सच साबित कर दिया। इस मामले में प्रीतम चंद की शिकायत थी कि उनके गांव में सरकार द्वारा धर्मशाला बनाने के लिए अनुदान दिया गया था, लेकिन ग्राम पंचायत और अधिकारियों ने धर्मशाला खोई की बजाय टोरन गांव में बनवा दिया है। इस मुद्दे को भाजपा नेता कंवरसेन सिंगला ने मंत्री के समक्ष रखा। मंत्री ने शिकायत सुनने के बाद कहा कि यह तो सरेआम बदमाशी है। उन्होंने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि मामले से संबंधित अधिकारियों को सस्पेंड किया जाए और सरपंच के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। अपना पक्ष रखने के लिए सरपंच, अधिकारी और उस पक्ष के भाजपा नेता भी मौजूद थे। भाजपा नेताओं की मध्यस्थता के कारण मामले में मंत्री कविता जैन का रुख नरम तो पड़ ही गया था, लेकिन पब्लिक प्लेटफॉर्म पर सब हो रहा था। इसलिए मंत्री ने पहले निर्देश दिए कि सरपंच माइक पर सब के सामने अपनी गलती कबूल करें और माफी मांगें। सरपंच ने माइक पर अपनी गलती तो मान ली। लेकिन कविता जैन के कहने के बाद भी सरपंच और उसके पति ने लिखित में माफीनामा देने से साफ मना कर दिया और वह बैठक छोड़कर बाहर चले गए। मंत्री बार-बार निर्देश देती रहीं कि सरपंच को वापस बुलाओ लेकिन वह वापस नहीं आईं। वहीं, करीब आधे घंटे तक चली इस मामले की सुनवाई में मंत्री के अधिकारियों को सस्पेंड करने के आदेश मात्र विभागीय कार्रवाई तक सिमट कर रह गया।
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पुलिस के खिलाफ वायरल वीडियो मामले में हंगामा
बैठक में गेट नंबर एक चंडीमंदिर निवासी वरिष्ठ नागरिक रमेश्वर दत्त की शिकायत थी कि वरिष्ठ नागरिक ट्रिब्यूनल द्वारा आदेश जारी करने के बावजूद उसके मकान को पुत्रवधु और बच्चों से पूरी तरह खाली नहीं करवाया गया। वहीं दूसरी तरफ अपना पक्ष रखने के लिए उनकी पुत्रवधु और पोता-पोती के साथ बड़ी संख्या में गांव के लोग पहुंचे थे। रामेश्वर दत्त ने जैसे ही अपनी बात रखी उनकी पुत्रवधु और गांव वासियों ने हंगामा कर दिया। पुलिस अधिकारियों ने तत्काल हस्तक्षेप कर लोगों को शांत करवाया। रामेश्वर दत्त का आरोप था कि उसके बच्चे सेवा नहीं करते हैं इसलिए उन्हें घर में नहीं रहने देंगे। जबकि पुत्रवधु और गांव वासियों का कहना है कि रामेश्वर दत्त झूठ बोल रहे हैं। करीब आधे घंटे तक यह मुद्दा चलता रहा। अंत में कविता जैन ने इस मामले का हल सामाजिक तौर पर निकालने की बात कहीं। इस मामले में शिकायत निवारण समिति के तीन सदस्य एचएल शर्मा, जोगिंद्र और वीवी सिंघल को सामाजिक समाधान के लिए अधिकृत किया। बैठक में विधायक ज्ञानचंद गुप्ता, कालका विधायक लतिका शर्मा, जिला परिषद चेयरपर्सन रितु सिंगला, पुलिस उपायुक्त कमलदीप गोयल, अतिरिक्त उपायुक्त उत्तम सिंह, एसडीएम पंकज सेतिया, कालका एसडीएम मनीता मलिक, नगराधीश गगनदीप सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक शर्मा मौजूद रहे।