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किशोरी से रेप मामले में पीड़ित परिवार ने पंचकूला पुलिस पर लगाए आरोप
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पंचकूला। 15 वर्षीय एक किशोरी से रेप के आरोप में पुलिस की ओर से केवल एक आरोपी को अरेस्ट करने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। शुक्रवार को पीड़ित परिवार ने प्रजा परिवर्तन पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष कांता आलड़िया के साथ प्रेस वार्ता कर वारदात में कुल चार आरोपियों के शामिल होने की बात कही। किशोरी की मां व कान्ता आलड़िया सहित उनकी सहयोगी ने पुलिस पर मामले के अन्य तीन आरोपियों को पैसे लेकर छोड़ने के आरोप लगाए। पीड़ित परिवार व कान्ता आलड़िया ने यह आरोप भी लगाए कि पुलिस ने किशोरी से मारपीट कर उसे डरावा देकर उसके बयान बदलवाए हैं। पीड़ित परिवार ने कहा कि उनकी बेटी ने उससे गैंगरेप के चार आरोपी बताए थे। लेकिन उसके दोबारा बयान बदलने का कारण पुलिस का डर है। पीपीपी की अध्यक्ष ने पुलिस पर गुंडागर्दी के आरोप लगाए। किशोरी की मां ने आरोप लगाया कि एक आरोपी की मां ने उनके घर आकर बेटे को केस से बचाने के लिए उनके सामने एक लाख रुपये की पेशकश भी की थी। साथ ही किशोरी के अबॉर्शन और उसका जीवन भर तक का खर्च देने की बात भी कही। उन्होंने पुलिस पर किशोरी का जबरन गर्भपात करवाने के प्रयास के भी आरोप लगाए। परिवार ने आरोप लगाए कि उनकी बेटी को पुलिस ने टॉर्चर किया, मारपीट की और यहां तक कि उसे करंट लगाने का डर भी दिखाया गया। पुलिस ने किशोरी को उनकी मर्जी के मुताबिक बयान देने को विवश किया। परिवार ने महिला थाना के एसएचओ, इंस्पेक्टर अजीत सिंह को बदलने की मांग की। आरोप लगाए कि जिले व हरियाणा में खुले महिला थाना मदद को नहीं, बल्कि वसूली के अड्डे बन चुके हैं। पीपीपी की अध्यक्ष ने आरोप लगाए कि पुलिस एक दोषी को बचाने के लिए एक लाख रुपये तक वसूलती है।
डीसीपी ने दी सफाई, कहा- आरोप बेबुनियाद
डीसीपी कमलदीप गोयल ने पीड़ित परिवार के सभी आरोप बेबुनियाद बताए। उन्होंने कहा कि किशोरी से अलग-अलग समय पर बातचीत की गई तो हर बार उसके बयान बदले हुए थे। डीसीपी ने बताया कि किशोरी ने 164 के बयानों में उससे रेप का एक आरोपी बताया था, जिसे पुलिस ने अरेस्ट किया है। लेकिन परिवार जिन अन्य तीन युवकों के नाम ले रहा है, उनके खिलाफ न तो किशोरी ने बयान दिए हैं और न ही ऐसा कोई तथ्य हाथ लगा है, जिससे उनके वारदात में शामिल होने का पता लगता हो। डीसीपी ने यह जानकारी जिला सचिवालय स्थित अपने आफिस में दी। इस दौरान महिला थाने के एसएचओ समेत अन्य अधिकारी और वह महिला अधिकारी भी मौजूद रही, जो मामले की जांच में जुटी है। महिला अधिकारी ने किशोरी से पारिवारिक माहौल में बातचीत की तो वारदात से अलग कई अन्य चीजें सामने आई। पुलिस को मामले में किशोरी को किसी के द्वारा बरगलाने की आशंका भी है। इस कारण पुलिस जांच किशोरी को बरगलाने, मिस गाइड करने वाले की तलाश में भी जुटी है।
जरूरत पड़ी तो डीएनए टेस्ट भी कराएंगे
डीसीपी ने कहा कि उन्होंने मामले में चारों आरोपियों में से किसी को भी क्लीन चिट नहीं दी है। लेकिन तह तक पड़ताल की जा रही है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर आरोपियों का डीएनए टेस्ट कराना पड़ा तो वह भी कराया जाएगा।
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पीड़िता के गांव के लोगों से भी की जा रही पूछताछ
पुलिस मामले में वारदात के संबंध सहित अन्य पहलुओं पर भी जांच कर रही है। इस दिशा में पुलिस पीड़िता के गांव के लोगों समेत वहां से आने वाली जानकारियों पर भी गौर कर रही है। ताकि वो हर चीज नजर में आ सकें, जिससे इस केस को सुलझाने में मदद मिले।
न्यायिक हिरासत में एक आरोपी, पुलिस ने नहीं की रिमांड की मांग
महिला थाना पुलिस ने रेप व पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज इस मामले में एक आरोपी कालका निवासी दीपक (18) को अरेस्ट किया था। अदालत में पेशी के समय पुलिस के उससे पूछताछ की जरूरत नहीं बताने पर कोर्ट ने उसे न्यायिक हिरासत में भेजा। इससे यह सवाल भी उठ खड़े हुए हैं कि यदि मामला इतना पेचीदा था तो फिर पुलिस ने अदालत से आरोपी के रिमांड की मांग क्यों नहीं की। ताकि उससे पूछताछ कर अन्य तीन आरोपियों की भूमिका की स्पष्ट तौर पर जांच की जाती।
मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। पीड़िता ने एक आरोपी के खिलाफ बयान दिए हैं। लेकिन चारों आरोपियों में से फिलहाल किसी को क्लीन चिट नहीं दी गई है। महिला अधिकारी व अन्य सभी पहलुओं पर जांच में जुटे हैं। - कमलदीप गोयल, डीसीपी, पंचकूला।
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डीसीपी ने दी सफाई, कहा- आरोप बेबुनियाद
डीसीपी कमलदीप गोयल ने पीड़ित परिवार के सभी आरोप बेबुनियाद बताए। उन्होंने कहा कि किशोरी से अलग-अलग समय पर बातचीत की गई तो हर बार उसके बयान बदले हुए थे। डीसीपी ने बताया कि किशोरी ने 164 के बयानों में उससे रेप का एक आरोपी बताया था, जिसे पुलिस ने अरेस्ट किया है। लेकिन परिवार जिन अन्य तीन युवकों के नाम ले रहा है, उनके खिलाफ न तो किशोरी ने बयान दिए हैं और न ही ऐसा कोई तथ्य हाथ लगा है, जिससे उनके वारदात में शामिल होने का पता लगता हो। डीसीपी ने यह जानकारी जिला सचिवालय स्थित अपने आफिस में दी। इस दौरान महिला थाने के एसएचओ समेत अन्य अधिकारी और वह महिला अधिकारी भी मौजूद रही, जो मामले की जांच में जुटी है। महिला अधिकारी ने किशोरी से पारिवारिक माहौल में बातचीत की तो वारदात से अलग कई अन्य चीजें सामने आई। पुलिस को मामले में किशोरी को किसी के द्वारा बरगलाने की आशंका भी है। इस कारण पुलिस जांच किशोरी को बरगलाने, मिस गाइड करने वाले की तलाश में भी जुटी है।
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जरूरत पड़ी तो डीएनए टेस्ट भी कराएंगे
डीसीपी ने कहा कि उन्होंने मामले में चारों आरोपियों में से किसी को भी क्लीन चिट नहीं दी है। लेकिन तह तक पड़ताल की जा रही है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर आरोपियों का डीएनए टेस्ट कराना पड़ा तो वह भी कराया जाएगा।
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पीड़िता के गांव के लोगों से भी की जा रही पूछताछ
पुलिस मामले में वारदात के संबंध सहित अन्य पहलुओं पर भी जांच कर रही है। इस दिशा में पुलिस पीड़िता के गांव के लोगों समेत वहां से आने वाली जानकारियों पर भी गौर कर रही है। ताकि वो हर चीज नजर में आ सकें, जिससे इस केस को सुलझाने में मदद मिले।
न्यायिक हिरासत में एक आरोपी, पुलिस ने नहीं की रिमांड की मांग
महिला थाना पुलिस ने रेप व पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज इस मामले में एक आरोपी कालका निवासी दीपक (18) को अरेस्ट किया था। अदालत में पेशी के समय पुलिस के उससे पूछताछ की जरूरत नहीं बताने पर कोर्ट ने उसे न्यायिक हिरासत में भेजा। इससे यह सवाल भी उठ खड़े हुए हैं कि यदि मामला इतना पेचीदा था तो फिर पुलिस ने अदालत से आरोपी के रिमांड की मांग क्यों नहीं की। ताकि उससे पूछताछ कर अन्य तीन आरोपियों की भूमिका की स्पष्ट तौर पर जांच की जाती।
मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। पीड़िता ने एक आरोपी के खिलाफ बयान दिए हैं। लेकिन चारों आरोपियों में से फिलहाल किसी को क्लीन चिट नहीं दी गई है। महिला अधिकारी व अन्य सभी पहलुओं पर जांच में जुटे हैं। - कमलदीप गोयल, डीसीपी, पंचकूला।