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पीयू की मेहरबानी से फर्जी डिग्री पर नौकरी कर रहे हैं चार शिक्षक
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के अधीन चल रहे तीन कॉलेजों में तैनात चार टीचरों की पीएचडी की डिग्री फर्जी हैं, लेकिन पीयू प्रशासन उन पर कार्रवाई नहीं कर रहा है जबकि पिछले साल कमेटी ने जांच रिपोर्ट सौंपी थी। सिंडिकेट व सीनेट के कुछ सदस्यों ने पीयू प्रशासन पर इन शिक्षकों को बचाने का आरोप लगाया है।
पूर्व वीसी प्रो. एके ग्रोवर के कार्यकाल में डीएवी कॉलेज में दो शिक्षकों की भर्तियां की गई थी। यह शिक्षक कंप्यूटर साइंस विषय के लिए रखे गए थे। इसके अलावा एक शिक्षक पंजाब के खन्ना कॉलेज में रखा गया और एक शिक्षक अन्य विद्यालय में तैनात किया गया। इन शिक्षकों ने सीएमजे यूनिवर्सिटी मेघालय से पीएचडी की डिग्री ली थी और उसी आधार पर इनकी नौकरी लगी। आरोप है कि जब इन शिक्षकों की नौकरी लग रही थी उस समय मेघालय सरकार ने इस विश्वविद्यालय की पीएचडी की तमाम डिग्रियां फर्जी बताई थी। इसकी चिट्ठी पीयू प्रशासन को भी भेजी गई लेकिन उस समय इन आदेशों का दरकिनार कर शिक्षकों को लाभ दिया गया। दूसरे शिक्षकों को यह बात पता चली तो पीयू सिंडिकेट में मामला उठा और सिंडिकेट ने डॉ. प्रभजीत सिंह, कंट्रोलर प्रो. परविंदर सिंह व अशोक गोयल को जांच के लिए मेघालय के इस विश्वविद्यालय में भेजा। साथ ही मेघालय सरकार के जिम्मेदार अधिकारियों से जांच टीम ने संपर्क किया। वहां से जांच टीम ने आकर पीयू प्रशासन को रिपोर्ट सौंपी और उस रिपोर्ट को सिंडिकेट ने एक्सेप्ट कर लिया। आरोप है कि पीयू प्रशासन को इस मामले में शिक्षकों पर कार्रवाई करने के बजाय उसे कानूनी राय के लिए आगे भेज दिया गया।
सिंडिकेट और सीनेट सदस्यों मांगा जवाब, पीयू प्रशासन ने साधी चुप्पी
जांच रिपोर्ट आए छह माह बीत गए, न तो शिक्षकों पर कार्रवाई हुई और न कानूनी राय का पता लग पा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इन शिक्षकों को बचाने के लिए पीयू प्रशासन पूरी ताकत लगा रहा है। साथ ही सिंडिकेट व सीनेट के कुछ सदस्य भी इस मामले में कार्रवाई नहीं चाहते। सीनेट की पिछले माह हुई बैठक में कुछ सदस्यों ने यह मामला उठाया। उन्होंने कहा कि पीयू की ओर से अब तक की गई कार्रवाई के बारे में बताया जाए लेकिन कुछ नहीं बताया गया। सूत्रों का कहना है कि अगली सीनेट की बैठक में इसको लेकर हंगामा होगा।
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वर्जन---
फोटो-
यह मामला कानूनी राय के लिए भेजा गया है, अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है। जैसे ही रिपोर्ट आएगी उसके बाद शिक्षकों पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
--- प्रो. करमजीत सिंह, रजिस्ट्रार पीयू
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पूर्व वीसी प्रो. एके ग्रोवर के कार्यकाल में डीएवी कॉलेज में दो शिक्षकों की भर्तियां की गई थी। यह शिक्षक कंप्यूटर साइंस विषय के लिए रखे गए थे। इसके अलावा एक शिक्षक पंजाब के खन्ना कॉलेज में रखा गया और एक शिक्षक अन्य विद्यालय में तैनात किया गया। इन शिक्षकों ने सीएमजे यूनिवर्सिटी मेघालय से पीएचडी की डिग्री ली थी और उसी आधार पर इनकी नौकरी लगी। आरोप है कि जब इन शिक्षकों की नौकरी लग रही थी उस समय मेघालय सरकार ने इस विश्वविद्यालय की पीएचडी की तमाम डिग्रियां फर्जी बताई थी। इसकी चिट्ठी पीयू प्रशासन को भी भेजी गई लेकिन उस समय इन आदेशों का दरकिनार कर शिक्षकों को लाभ दिया गया। दूसरे शिक्षकों को यह बात पता चली तो पीयू सिंडिकेट में मामला उठा और सिंडिकेट ने डॉ. प्रभजीत सिंह, कंट्रोलर प्रो. परविंदर सिंह व अशोक गोयल को जांच के लिए मेघालय के इस विश्वविद्यालय में भेजा। साथ ही मेघालय सरकार के जिम्मेदार अधिकारियों से जांच टीम ने संपर्क किया। वहां से जांच टीम ने आकर पीयू प्रशासन को रिपोर्ट सौंपी और उस रिपोर्ट को सिंडिकेट ने एक्सेप्ट कर लिया। आरोप है कि पीयू प्रशासन को इस मामले में शिक्षकों पर कार्रवाई करने के बजाय उसे कानूनी राय के लिए आगे भेज दिया गया।
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सिंडिकेट और सीनेट सदस्यों मांगा जवाब, पीयू प्रशासन ने साधी चुप्पी
जांच रिपोर्ट आए छह माह बीत गए, न तो शिक्षकों पर कार्रवाई हुई और न कानूनी राय का पता लग पा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इन शिक्षकों को बचाने के लिए पीयू प्रशासन पूरी ताकत लगा रहा है। साथ ही सिंडिकेट व सीनेट के कुछ सदस्य भी इस मामले में कार्रवाई नहीं चाहते। सीनेट की पिछले माह हुई बैठक में कुछ सदस्यों ने यह मामला उठाया। उन्होंने कहा कि पीयू की ओर से अब तक की गई कार्रवाई के बारे में बताया जाए लेकिन कुछ नहीं बताया गया। सूत्रों का कहना है कि अगली सीनेट की बैठक में इसको लेकर हंगामा होगा।
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यह मामला कानूनी राय के लिए भेजा गया है, अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है। जैसे ही रिपोर्ट आएगी उसके बाद शिक्षकों पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
--- प्रो. करमजीत सिंह, रजिस्ट्रार पीयू