{"_id":"5b06e11c4f1c1ba86e8b462d","slug":"15271774951-bernala-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकारी पीले पंजे का गरीबों पर बरपा कहर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकारी पीले पंजे का गरीबों पर बरपा कहर
Updated Thu, 24 May 2018 09:36 PM IST
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
बरनाला। बठिंडा-चंडीगढ़ मुख्य मार्ग पर रह रहे हाईवे की जगह के बीच में आने वाले गरीबों की रिहायशों पर सरकारी पीला पंजा चला। इस दौरान कई मकान गिरा दिए गए जिससे लोगों में हड़कंप मच गया। उनका कहना था कि उन्हें हाईवे के बीच आने वाले मकानों का अभी पूरा मुआवजा नहीं दिया गया है। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं की गई।
पीडब्ल्यूडी एवं बीएंडआर के एसडीओ अमरजीत सिंह, जेई हनी बांसल ने बताया कि गांव हरीगढ़ की पंचायती जमीन पर लंबे समय के बाजीगर बिरादरी के लोग अवैध तौर पर अपने रिहायशी मकान बनाकर रह रहे थे। कुछ लोगों के पास मकानों की रजिस्ट्री भी हैं लेकिन इनको जनवरी 2018 में आकर मकान खाली करने की चेतावनी दी गई थी और कानूनी नोटिस भी भेजे गए थे। वह मकान खाली नहीं कर रहे थे और अपनी जिद्द पर अड़े थे। कोर्ट के फैसले के बाद तहसीलदार हरमनोहर सिंह की अगवाई में पुलिस पार्टी को साथ लेकर सरकारी जमीन खाली करवाई गई। पीड़ित सोनी राम, विजय कुमार, लहोरी राम, रिंकू सिंह, बिन्नी कुमार, सुखराज सिंह, माणक सिंह, जोगिंदरपाल, शिंदी राम ने बताया कि वह वहां 40-50 सालों से रह रहे हैं। इस जगह की मालकी भी उनके नाम पर है लेकिन जिला प्रशासन ने जगह एक्वायर करने के बदले पीड़ितों को बिल्कुल ही मुआवजा नहीं दिया गया। कई पीड़ितों को नाम मात्र की मुआवजा दिया गया है। एसडीएम संदीप कुमार का कहना है कि पीड़ितों को कानून के अनुसार सर्वे करवाकर बनता मुआवजा जरूर दिया जाएगा।
विज्ञापन
बरनाला। बठिंडा-चंडीगढ़ मुख्य मार्ग पर रह रहे हाईवे की जगह के बीच में आने वाले गरीबों की रिहायशों पर सरकारी पीला पंजा चला। इस दौरान कई मकान गिरा दिए गए जिससे लोगों में हड़कंप मच गया। उनका कहना था कि उन्हें हाईवे के बीच आने वाले मकानों का अभी पूरा मुआवजा नहीं दिया गया है। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं की गई।
पीडब्ल्यूडी एवं बीएंडआर के एसडीओ अमरजीत सिंह, जेई हनी बांसल ने बताया कि गांव हरीगढ़ की पंचायती जमीन पर लंबे समय के बाजीगर बिरादरी के लोग अवैध तौर पर अपने रिहायशी मकान बनाकर रह रहे थे। कुछ लोगों के पास मकानों की रजिस्ट्री भी हैं लेकिन इनको जनवरी 2018 में आकर मकान खाली करने की चेतावनी दी गई थी और कानूनी नोटिस भी भेजे गए थे। वह मकान खाली नहीं कर रहे थे और अपनी जिद्द पर अड़े थे। कोर्ट के फैसले के बाद तहसीलदार हरमनोहर सिंह की अगवाई में पुलिस पार्टी को साथ लेकर सरकारी जमीन खाली करवाई गई। पीड़ित सोनी राम, विजय कुमार, लहोरी राम, रिंकू सिंह, बिन्नी कुमार, सुखराज सिंह, माणक सिंह, जोगिंदरपाल, शिंदी राम ने बताया कि वह वहां 40-50 सालों से रह रहे हैं। इस जगह की मालकी भी उनके नाम पर है लेकिन जिला प्रशासन ने जगह एक्वायर करने के बदले पीड़ितों को बिल्कुल ही मुआवजा नहीं दिया गया। कई पीड़ितों को नाम मात्र की मुआवजा दिया गया है। एसडीएम संदीप कुमार का कहना है कि पीड़ितों को कानून के अनुसार सर्वे करवाकर बनता मुआवजा जरूर दिया जाएगा।
विज्ञापन