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आंखों में डाक्टर से बिना पूछे दवा न डाले, ग्लूकोमा का रहता है खतरा
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डाक्टर से पूछे बिना आंख में दवा न डालें, हो सकता है ग्लूकोमा
सबहेड
एक बार रोशनी जाने के बाद वापस नहीं आती, इस बीमारी का कोई लक्षण भी नहीं दिखता
पीजीआई के एडवांस आई सेंटर की ओर से मनाया जा रहा है ग्लूकोमा वीक
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। आंखों में खुजली या छोटी दिक्कत आने पर अक्सर लोग घर पर रखी दवा डाल लेते हैं या फिर डाक्टर से बिना पूछे केमिस्ट शॉप से कोई आई ड्राप ले आते हैं। यदि उससे अराम मिल गया तो मरीज उसी दवा का इस्तेमाल करता रहता है। उसके बाद जब भी उसे कोई दिक्कत आती है तो वह उसी दवा को आंख में डालता है। यहां यह जानना जरूरी है कि कई आई ड्राप में स्टेरायड मिला होता है, जिसकी जानकारी न तो मरीज को होती है और न ही बेचने वाले को। लंबे समय तक स्टेराइड लेने से ग्लूकोमा होने की आशंका रहती है। वर्ल्ड ग्लूकोमा वीक पर पीजीआई के एडवांस आई सेंटर के प्रोफेसर एसएस पांडव ने बताया कि जब भी आंख में कोई तकलीफ हो तो डाक्टर से बिना पूछे आंख में दवा न डालें। यह देखा गया है कि कई आई ड्राप में स्टेरायड होता है, जो आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे ग्लूकोमा का खतरा रहता है। भारत में करीब एक करोड़ दस लाख लोग ग्लूकोमा से पीड़ित हैं, जिसमें एक करोड़ से ज्यादा लोग अंधेपन से जूझ रहे हैं। उन्होंने बताया कि ग्लूकोमा होने पर शीर्षासन न करें। इससे आंखों का प्रेशर बढ़ता है। दूसरी तरफ सुबह के वक्त ज्यादा पानी न पीएं। इससे भी प्रेशर बढ़ता है।
90 फीसदी मरीजों को नहीं पता कि उन्हें ग्लूकोमा है
प्रो. पांडव ने बताया कि ग्लूकोमा का कोई ऐसा लक्षण नहीं है, जिससे लोगों को पता चल सके कि वे इस बीमारी की चपेट में है। 80 फीसदी नजर खराब होने के बाद ही वे अस्पताल पहुंचते हैं। इसमें मरीज की सिर्फ बीच की नजर बचती है। वह अपनी आंख से इधर-उधर नहीं देख पाता। यह मर्ज 40 साल के बाद आता है। ऐसे में 40 वर्ष की उम्र के बाद अपनी आंख का रेग्युलर चेकअप कराएं। जब भी आंख दिखाने जाएं तो डाक्टर को अपनी आंख का प्रेशर जरूर चेक करवाएं।
क्या होता है ग्लूकोमा (काला मोतियाबिंद)
ग्लूकोमा को आम भाषा में काला मोतिया भी कहा जाता है। आंख के अंदर अंगों के पोषण के लिए एक तरल पदार्थ उत्पन्न होता है। पोषक के बाद यह तरल पदार्थ आंख के महीन छिद्र से बाहर निकलते हैं। उम्र के साथ छिद्र तंग होने शुरू होते हैं। इससे तरल पदार्थ के निकलने की प्रक्रिया थोड़ी बाधित होती है। इससे आंख का प्रेशर बढ़ने लगता है। आंख का बढ़ा प्रेशर ऑप्टिक नर्व (आंखों से दिमाग को सिग्नल भेजने वाली नर्व) को डैमेज करती है। आमतौर पर ऐसा आंखों पर ज्यादा जोर पड़ने से होता है। दरअसल, ऑप्टिक नर्व काफी सेंसिटिव होती है, इसलिए जरा भी ज्यादा प्रेशर पड़ने पर यह ब्लॉक हो जाती है। इससे दिखना बंद हो जाता है। हालांकि आंख के बढ़े प्रेशर का मतलब यह कतई नहीं है कि उस शख्स को ग्लूकोमा हो गया है, लेकिन इससे ग्लूकोमा का खतरा बढ़ जाता है।
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जो रोशनी जाती है, वो वापस नहीं आती
ग्लूकोमा के बारे में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके चलते नजर का जो नुकसान हो गया, उसका कोई इलाज नहीं है। अगर पता न चले तो यह मर्ज धीरे-धीरे बढ़ता रहता है और ज्यादा बढ़ जाने पर अंधेपन की भी नौबत आ सकती है। हां, अगर इसका पता वक्त रहते चल जाए तो आगे और नुकसान से बचने के लिए इलाज और देखभाल की जा सकती है।
इस कारण हो सकता है ग्लूकोमा
1. परिवार के किसी सदस्य को हुआ हो
2. यदि शुगर के मरीज हैं तो
3. चश्मे का नंबर माइनस में है और बार-बार कम हो रहा है
4. 40 वर्ष के उम्र के पार हैं
5. अंधेरे में देर से नजर आता है
6. रोशनी में अलग-अलग रंग दिखते हैं
7. अस्थमा व आथराइटिस जैसे रोगों में लंबे समय तक स्टेरायड ले रहे हों
8. कभी आंख का कोई जख्म हुआ हो या कोई सर्जरी हुई हो
9. यह बच्चों में भी हो सकता है।
ग्लूकोमा से बचने के उपाय
------------------------------
- घर में अगर किसी को ग्लूकोमा है तो बच्चे को होने की ज्यादा संभावना होती है क्योंकि यह एक आनुवांशिक बीमारी है। ऐसे में बच्चे की आंखों की जांच करवा लीजिए।
- आंखों की एलर्जी, अस्थमा, चर्म रोग या किसी अन्य रोग के लिए स्टेरायड दवाओं का प्रयोग करने से आंखों में दिक्कत आ जाती है। ऐसी दवाइयों के सेवन से बचें।
- आंखों में दर्द हो या आंखें लाल हो जाएं तो डॉक्टर से सलाह लेकर ही दवा का प्रयोग करें।
- खेलने के दौरान (टेनिस या क्रिकेट बॉल से) अगर आंखों में चोट लग जाए तो इसका इलाज कराएं।
- आंखों में कभी किसी प्रकार की कोई सर्जरी हुई हो या कोई घाव हो गया हो तो उसकी जांच समय-समय पर करवाते रहें, क्योंकि सर्जरी से ग्लूकोमा होने का खतरा बढ़ जाता है
- हर दो साल में आंखों की नियमित जांच करवाते रहिए। चेकअप करवाने से आंखों की रोशनी का पता लगाया जा सकता है
- अगर आपके चश्मे का नंबर बदल रहा है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क कीजिए
- जब आप सीधे देख रहें हों तो सिर्फ फोकस दिख रहा हो और किनारे पर अंधेरा छाया हो
- आंखों में दर्द हो, सिर और पेट में दर्द हो तो इसको नजरअंदाज मत कीजिए, तुरंत चिकित्सक से संपर्क कीजिए
- आंखों को पोषण देने वाले तत्वों जैसे बादाम, दूध, संतरे का जूस, खरबूजे, अंडा, सोयाबीन का दूध, मूंगफली आदि का ज्यादा मात्रा में सेवन कीजिए
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डाक्टर से पूछे बिना आंख में दवा न डालें, हो सकता है ग्लूकोमा
सबहेड
एक बार रोशनी जाने के बाद वापस नहीं आती, इस बीमारी का कोई लक्षण भी नहीं दिखता
पीजीआई के एडवांस आई सेंटर की ओर से मनाया जा रहा है ग्लूकोमा वीक
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। आंखों में खुजली या छोटी दिक्कत आने पर अक्सर लोग घर पर रखी दवा डाल लेते हैं या फिर डाक्टर से बिना पूछे केमिस्ट शॉप से कोई आई ड्राप ले आते हैं। यदि उससे अराम मिल गया तो मरीज उसी दवा का इस्तेमाल करता रहता है। उसके बाद जब भी उसे कोई दिक्कत आती है तो वह उसी दवा को आंख में डालता है। यहां यह जानना जरूरी है कि कई आई ड्राप में स्टेरायड मिला होता है, जिसकी जानकारी न तो मरीज को होती है और न ही बेचने वाले को। लंबे समय तक स्टेराइड लेने से ग्लूकोमा होने की आशंका रहती है। वर्ल्ड ग्लूकोमा वीक पर पीजीआई के एडवांस आई सेंटर के प्रोफेसर एसएस पांडव ने बताया कि जब भी आंख में कोई तकलीफ हो तो डाक्टर से बिना पूछे आंख में दवा न डालें। यह देखा गया है कि कई आई ड्राप में स्टेरायड होता है, जो आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे ग्लूकोमा का खतरा रहता है। भारत में करीब एक करोड़ दस लाख लोग ग्लूकोमा से पीड़ित हैं, जिसमें एक करोड़ से ज्यादा लोग अंधेपन से जूझ रहे हैं। उन्होंने बताया कि ग्लूकोमा होने पर शीर्षासन न करें। इससे आंखों का प्रेशर बढ़ता है। दूसरी तरफ सुबह के वक्त ज्यादा पानी न पीएं। इससे भी प्रेशर बढ़ता है।
90 फीसदी मरीजों को नहीं पता कि उन्हें ग्लूकोमा है
प्रो. पांडव ने बताया कि ग्लूकोमा का कोई ऐसा लक्षण नहीं है, जिससे लोगों को पता चल सके कि वे इस बीमारी की चपेट में है। 80 फीसदी नजर खराब होने के बाद ही वे अस्पताल पहुंचते हैं। इसमें मरीज की सिर्फ बीच की नजर बचती है। वह अपनी आंख से इधर-उधर नहीं देख पाता। यह मर्ज 40 साल के बाद आता है। ऐसे में 40 वर्ष की उम्र के बाद अपनी आंख का रेग्युलर चेकअप कराएं। जब भी आंख दिखाने जाएं तो डाक्टर को अपनी आंख का प्रेशर जरूर चेक करवाएं।
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क्या होता है ग्लूकोमा (काला मोतियाबिंद)
ग्लूकोमा को आम भाषा में काला मोतिया भी कहा जाता है। आंख के अंदर अंगों के पोषण के लिए एक तरल पदार्थ उत्पन्न होता है। पोषक के बाद यह तरल पदार्थ आंख के महीन छिद्र से बाहर निकलते हैं। उम्र के साथ छिद्र तंग होने शुरू होते हैं। इससे तरल पदार्थ के निकलने की प्रक्रिया थोड़ी बाधित होती है। इससे आंख का प्रेशर बढ़ने लगता है। आंख का बढ़ा प्रेशर ऑप्टिक नर्व (आंखों से दिमाग को सिग्नल भेजने वाली नर्व) को डैमेज करती है। आमतौर पर ऐसा आंखों पर ज्यादा जोर पड़ने से होता है। दरअसल, ऑप्टिक नर्व काफी सेंसिटिव होती है, इसलिए जरा भी ज्यादा प्रेशर पड़ने पर यह ब्लॉक हो जाती है। इससे दिखना बंद हो जाता है। हालांकि आंख के बढ़े प्रेशर का मतलब यह कतई नहीं है कि उस शख्स को ग्लूकोमा हो गया है, लेकिन इससे ग्लूकोमा का खतरा बढ़ जाता है।
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ग्लूकोमा के बारे में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके चलते नजर का जो नुकसान हो गया, उसका कोई इलाज नहीं है। अगर पता न चले तो यह मर्ज धीरे-धीरे बढ़ता रहता है और ज्यादा बढ़ जाने पर अंधेपन की भी नौबत आ सकती है। हां, अगर इसका पता वक्त रहते चल जाए तो आगे और नुकसान से बचने के लिए इलाज और देखभाल की जा सकती है।
इस कारण हो सकता है ग्लूकोमा
1. परिवार के किसी सदस्य को हुआ हो
2. यदि शुगर के मरीज हैं तो
3. चश्मे का नंबर माइनस में है और बार-बार कम हो रहा है
4. 40 वर्ष के उम्र के पार हैं
5. अंधेरे में देर से नजर आता है
6. रोशनी में अलग-अलग रंग दिखते हैं
7. अस्थमा व आथराइटिस जैसे रोगों में लंबे समय तक स्टेरायड ले रहे हों
8. कभी आंख का कोई जख्म हुआ हो या कोई सर्जरी हुई हो
9. यह बच्चों में भी हो सकता है।
ग्लूकोमा से बचने के उपाय
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- घर में अगर किसी को ग्लूकोमा है तो बच्चे को होने की ज्यादा संभावना होती है क्योंकि यह एक आनुवांशिक बीमारी है। ऐसे में बच्चे की आंखों की जांच करवा लीजिए।
- आंखों की एलर्जी, अस्थमा, चर्म रोग या किसी अन्य रोग के लिए स्टेरायड दवाओं का प्रयोग करने से आंखों में दिक्कत आ जाती है। ऐसी दवाइयों के सेवन से बचें।
- आंखों में दर्द हो या आंखें लाल हो जाएं तो डॉक्टर से सलाह लेकर ही दवा का प्रयोग करें।
- खेलने के दौरान (टेनिस या क्रिकेट बॉल से) अगर आंखों में चोट लग जाए तो इसका इलाज कराएं।
- आंखों में कभी किसी प्रकार की कोई सर्जरी हुई हो या कोई घाव हो गया हो तो उसकी जांच समय-समय पर करवाते रहें, क्योंकि सर्जरी से ग्लूकोमा होने का खतरा बढ़ जाता है
- हर दो साल में आंखों की नियमित जांच करवाते रहिए। चेकअप करवाने से आंखों की रोशनी का पता लगाया जा सकता है
- अगर आपके चश्मे का नंबर बदल रहा है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क कीजिए
- जब आप सीधे देख रहें हों तो सिर्फ फोकस दिख रहा हो और किनारे पर अंधेरा छाया हो
- आंखों में दर्द हो, सिर और पेट में दर्द हो तो इसको नजरअंदाज मत कीजिए, तुरंत चिकित्सक से संपर्क कीजिए
- आंखों को पोषण देने वाले तत्वों जैसे बादाम, दूध, संतरे का जूस, खरबूजे, अंडा, सोयाबीन का दूध, मूंगफली आदि का ज्यादा मात्रा में सेवन कीजिए