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पंचायत का फैसला, बेटियों को नहीं भेजेंगे स्कूल
जींद/ब्यूरो
Updated Sat, 18 May 2013 06:00 PM IST
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हरियाणा के दो गांवों ने पंचायत बुलाकर अपनी बेटियों के स्कूल जाने पर रोक लगाने का ऐलान कर दिया है।
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पंचायत ने यह फैसला जिले के एक गांव में स्थित सरकारी स्कूल के अध्यापक द्वारा छात्रा से दुराचार किए जाने की घटना के सामने आने के बाद लिया है।
पंचायत ने कहा कि वे स्कूलों में अपनी बेटियों व बहनों को पढ़ने के लिए नहीं भेजेंगे। ग्रामीणों ने कहा कि ऐसी घटनाओं में केवल एक अध्यापक आरोपी नहीं हो सकता बल्कि पूरे स्टाफ की मिलीभगत की आशंका है।
पंचायत ने दुराचार के आरोपी अध्यापक और स्कूल स्टाफ के तबादले को भी यह कहते हुए खारिज कर दिया कि ऐसे लोग जिस किसी स्कूल में तैनात किए जाएंगे, वहां भी गंदगी फैलाएंगे।
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पंचायत ने कहा कि इस मामले में एक ही विकल्प है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की जाए और दोषी को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया जाए।
शुक्रवार को दोनों गांवों की पंचायत की अध्यक्षता करते हुए सुरजाराम ने कहा कि केवल अध्यापक को दोषी नहीं कहा जा सकता।
सरकार इस मामले की बारिकी से जांच करवाए तो सच्चाई सामने आएगी।
उन्होंने कहा कि यह कैसे संभव है कि स्कूल का अध्यापक नाबालिग लड़की को अपने पोल्ट्री फार्म पर ले जाए और स्कूल के अन्य अध्यापकों को इसकी भनक न लगे।
सुरजाराम ने कहा कि वह अपनी बेटियों और पोतियों को स्कूल में शिक्षा देने के लिए भेजते हैं। अगर बच्चियों को अध्यापकों से ही खतरा है तो वे क्यों बच्चियों को स्कूल भेजें।
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ग्रामीण नरेंद्र सिंह ने कहा कि दो दिन से जींद प्रशासन व शिक्षा विभाग मामले को रफादफा करने में जुटा है।
उन्होंने कहा कि कई दिन पहले पीड़ित छात्रा की मां ने खुद स्कूल जाकर मामले की जानकारी मुख्याध्यापक दी थी। बावजूद इसके मुख्याध्यापक ने मामले को दबाने का प्रयास किया।
नरेंद्र ने कहा जींद प्रशासन लोगों के धैर्य की परीक्षा न ले। उन्होंने कहा कि जब तक शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल गांव आकर मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश नहीं देंगी, तब तक वे स्कूल में ही डटे रहेंगे।