{"_id":"6adfae1692729c8a43077bb7","slug":"zero-tolerance-for-stubble-burning-in-palwal-palwal-news-c-24-1-pal1012-129572-2026-10-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Palwal News: पलवल में पराली जलाने पर जीरो टॉलरेंस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Palwal News: पलवल में पराली जलाने पर जीरो टॉलरेंस
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। उपायुक्त डॉ. जयेन्द्र सिंह छिल्लर ने कहा कि जिले में पराली जलाने पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। कृषि विभाग गांव-गांव जाकर किसानों को फसल अवशेषों का वैज्ञानिक प्रबंधन करने के लिए जागरूक कर रहा है। उन्होंने किसानों से पराली न जलाने और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करने की अपील की। उपायुक्त ने कहा कि पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है और वायु प्रदूषण बढ़ता है। किसान हैप्पी सीडर, सुपर सीडर और मल्चर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों से फसल अवशेषों का प्रबंधन कर सकते हैं। योजना के तहत सत्यापन के बाद पात्र किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए 1,200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। उप कृषि निदेशक डॉ. जगिर सिंह ने भी किसानों से पराली न जलाने और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की अपील की।
विज्ञापन
पलवल। उपायुक्त डॉ. जयेन्द्र सिंह छिल्लर ने कहा कि जिले में पराली जलाने पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। कृषि विभाग गांव-गांव जाकर किसानों को फसल अवशेषों का वैज्ञानिक प्रबंधन करने के लिए जागरूक कर रहा है। उन्होंने किसानों से पराली न जलाने और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करने की अपील की। उपायुक्त ने कहा कि पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है और वायु प्रदूषण बढ़ता है। किसान हैप्पी सीडर, सुपर सीडर और मल्चर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों से फसल अवशेषों का प्रबंधन कर सकते हैं। योजना के तहत सत्यापन के बाद पात्र किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए 1,200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। उप कृषि निदेशक डॉ. जगिर सिंह ने भी किसानों से पराली न जलाने और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की अपील की।