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Palwal News: बच्चों के भविष्य की नींव, जर्जर भवन के साए में
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गंगवानी आंगनवाड़ी निजी मकान में संचालित, निर्माण के कुछ महीने बाद ही ढह गई थी दीवार
सद्दाम हुसैन
पिनगवां। गांव गंगवानी में आंगनवाड़ी केंद्र का भवन वर्षों से जर्जर हालत में है। भवन की स्थिति ऐसी हो चुकी है कि यहां केंद्र संचालित करना संभव नहीं है। इसके चलते पिछले कई वर्षों से आंगनवाड़ी केंद्र एक निजी मकान में चल रहा है। भवन के अभाव के बावजूद आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चों और महिलाओं तक विभागीय योजनाओं का लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन सुविधाओं की कमी के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, गांव में आंगनवाड़ी भवन का निर्माण कई वर्ष पहले कराया गया था। निर्माण के कुछ ही महीनों बाद इसकी एक दीवार ढह गई। सुरक्षा को देखते हुए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता केंद्र का सामान निजी मकान में ले गईं। बाद में भवन की मरम्मत कराई गई, लेकिन इसके तुरंत बाद दीवार फिर से गिर गई। इसके बाद भवन की सुध नहीं ली गई और धीरे-धीरे पूरी इमारत जर्जर होती चली गई।
वर्तमान में भवन के कमरे, शौचालय, बाथरूम और चारदीवारी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। परिसर में घास और झाड़ियां उग आई हैं। ऐसे में बच्चों के खेलने और अन्य गतिविधियों के लिए पर्याप्त जगह भी उपलब्ध नहीं है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता मुन्नी ने बताया कि भवन की मरम्मत और नए निर्माण की मांग को लेकर विभाग को कई बार लिखित शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। भवन उपलब्ध नहीं होने के बावजूद वह और हेल्पर निजी मकान से केंद्र संचालित कर बच्चों को पोषण, प्री-स्कूल शिक्षा और महिलाओं को विभागीय योजनाओं का लाभ पहुंचा रही हैं। ग्रामीणों ने महिला एवं बाल विकास विभाग से मांग की है कि जर्जर भवन का जल्द पुनर्निर्माण कराया जाए, ताकि बच्चों और महिलाओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
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कोट
भवन की समस्या को लेकर कई बार लिखित रूप से उच्च अधिकारियों को प्रस्ताव और रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। भवन की कमी से केंद्र निजी मकान से संचालित हो रहा है। फिलहाल विभाग की ओर से कोई नई अपडेट या स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई है। - गुंजन, सुपरवाइजर, महिला एवं बाल विकास विभाग
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सद्दाम हुसैन
पिनगवां। गांव गंगवानी में आंगनवाड़ी केंद्र का भवन वर्षों से जर्जर हालत में है। भवन की स्थिति ऐसी हो चुकी है कि यहां केंद्र संचालित करना संभव नहीं है। इसके चलते पिछले कई वर्षों से आंगनवाड़ी केंद्र एक निजी मकान में चल रहा है। भवन के अभाव के बावजूद आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चों और महिलाओं तक विभागीय योजनाओं का लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन सुविधाओं की कमी के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, गांव में आंगनवाड़ी भवन का निर्माण कई वर्ष पहले कराया गया था। निर्माण के कुछ ही महीनों बाद इसकी एक दीवार ढह गई। सुरक्षा को देखते हुए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता केंद्र का सामान निजी मकान में ले गईं। बाद में भवन की मरम्मत कराई गई, लेकिन इसके तुरंत बाद दीवार फिर से गिर गई। इसके बाद भवन की सुध नहीं ली गई और धीरे-धीरे पूरी इमारत जर्जर होती चली गई।
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वर्तमान में भवन के कमरे, शौचालय, बाथरूम और चारदीवारी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। परिसर में घास और झाड़ियां उग आई हैं। ऐसे में बच्चों के खेलने और अन्य गतिविधियों के लिए पर्याप्त जगह भी उपलब्ध नहीं है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता मुन्नी ने बताया कि भवन की मरम्मत और नए निर्माण की मांग को लेकर विभाग को कई बार लिखित शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। भवन उपलब्ध नहीं होने के बावजूद वह और हेल्पर निजी मकान से केंद्र संचालित कर बच्चों को पोषण, प्री-स्कूल शिक्षा और महिलाओं को विभागीय योजनाओं का लाभ पहुंचा रही हैं। ग्रामीणों ने महिला एवं बाल विकास विभाग से मांग की है कि जर्जर भवन का जल्द पुनर्निर्माण कराया जाए, ताकि बच्चों और महिलाओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
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भवन की समस्या को लेकर कई बार लिखित रूप से उच्च अधिकारियों को प्रस्ताव और रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। भवन की कमी से केंद्र निजी मकान से संचालित हो रहा है। फिलहाल विभाग की ओर से कोई नई अपडेट या स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई है। - गुंजन, सुपरवाइजर, महिला एवं बाल विकास विभाग