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कस्बे में सरकारी तो क्या निजी अस्पताल भी नहीं
अमर उजाला, ब्यूराो
Updated Thu, 09 Jun 2016 04:07 PM IST
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स्वास्थ्य केंद्र
- फोटो : अमर उजाला
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खंड की स्वास्थ्य सेवाएं भगवान भरोसे हैं। कहने को तो यहां करीब 45 वर्ष पूर्व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की शुरूआत हो गई थी। लेकिन सुविधाएं यहां आज तक नहीं हैं। आलम यह है कि यहां केवल एक डॉक्टर कार्यरत है।
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लेकिन वह भी कभी अदालती कार्यों से तो कभी अपने निजी कार्यों के चलते अस्पताल से बाहर ही रहते हैं। कई बार तो यहां चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी को मरीजों का इलाज करते भी देखा जा सकता है। हसनपुर खंड में जटोली, माहोली, लीखी, लच्छीपुरा, शेरू का नंगला, भैंड़ोली, काशीपुर, सहदेव का नंगला व रामगढ़ सहित करीब 40 गांव आते हैं।
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जिनमें करीब एक लाख से अधिक आबादी इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद पर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आश्रित है। लेकिन सेवाएं यहां एक गांव के लायक भी नहीं मिल पाती हैं।
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झोलाछाप डॉक्टरों के सहारे जीवन
यदि कोई बीमार पड़ जाए तो सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं तो हैं ही नहीं, लेकिन निजी तौर पर भी सेवाओं का अभाव है। कस्बे में कोई भी नर्सिंग होम नहीं है। हां, करीब 35-40 झोलाछाप डॉक्टर अवश्य हैं, जोकि मरीजों के जीवन से खिलवाड़ करते हैं। आलम यह है कि यदि कोई गंभीर बीमारी हो जाए तो या तो पलवल या फिर होडल का रुख करना पड़ता है। कई बार तो समय पर उपचार ना मिलने के चलते मरीज दम भी तोड़ देते हैं।
-अस्पताल में वाकई डॉक्टरों का अभाव है। डॉक्टरों की कमी के लिए विभागीय अधिकारियों को भी लिखा गया है। शीघ्र ही नए डॉक्टरों की भर्ती प्रस्तावित है, उनमें से हसनपुर के हिस्से में भी डॉक्टर जरूर आएंगे।
-डॉ. विपिन कुमार, एसएमओ, हसनपुर और होडल।