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Palwal News: अस्पताल की अव्यवस्थाएं बढ़ा रहीं तकलीफ
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500 मरीज रोजाना आते हैं ओपीडी में
मांडीखेड़ा नागरिक अस्पताल में डॉक्टरों की उपलब्धता, दवाइयों, सफाई और जांच व्यवस्था को लेकर उठे सवाल
रोहित
नगीना। बीमारी से परेशान मरीज जब अस्पताल पहुंचता हैं तो उसकी सबसे बड़ी उम्मीद होती है कि उसे समय पर डॉक्टर मिल जाए, जरूरी जांच हो और दवाइयां भी उपलब्ध हो जाएं। लेकिन, यदि अस्पताल में पहुंचने के बाद भी उसे घंटों इंतजार करना पड़े, पर्चे पर लिखी सभी दवाइयां न मिलें और बुनियादी सुविधाओं के लिए भी जूझना पड़े, तो उसकी परेशानी का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। नूंह जिले के अल आफिया नागरिक अस्पताल, मांडीखेड़ा में सामने आई कमियां स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रही हैं।
प्रतिदिन औसतन 500 से 600 मरीजों की ओपीडी वाले इस अस्पताल में डॉक्टरों की उपलब्धता, दवाइयों, साफ-सफाई और जांच व्यवस्था को लेकर मरीजों ने शिकायतें की हैं। 29 अक्तूबर को अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया कि यहां व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की चुनौती बहुत बड़ी है।
ओपीडी में भीड़, डॉक्टर नदारद
अस्पताल के जनरल वार्ड स्थित कमरा नंबर छह में बुखार, खांसी और जुकाम से पीड़ित मरीजों की भीड़ रहती है। स्थानीय निवासी यज्ञदत्त के अनुसार, यहां दो डॉक्टर तैनात हैं, लेकिन इमरजेंसी या ऑपरेशन थिएटर में ड्यूटी होने के कारण कई बार एक ही डॉक्टर को ओपीडी संभालनी पड़ती है। इसका असर मरीजों को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ता है। दूर-दराज के गांवों से आने वाले लोगों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। मरीज के साथ आए परिजनों का समय और आने-जाने का खर्च अलग बढ़ता है।
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ऑनलाइन भुगतान, पर्ची के लिए कतार
नगीना से हड्डी का दर्द दिखाने पहुंचे साहिल ने बताया कि ऑनलाइन भुगतान की सुविधा होने के बावजूद पर्ची बनवाने के लिए लंबी लाइन में लगना पड़ता है। उन्होंने यह भी शिकायत की कि सुबह 10 बजे तक डॉक्टर अपने कमरे में नहीं मिले। मरीजों के लिए डिजिटल सुविधा तभी कारगर हो सकती है, जब पंजीकरण से लेकर चिकित्सक को दिखाने तक की प्रक्रिया सरल और समयबद्ध हो। केवल ऑनलाइन भुगतान की सुविधा होने से मरीजों की परेशानी दूर नहीं होती।
पांच दवाइयां लिखी, तीन ही मिलीं
ढाडोली से बुखार का उपचार कराने पहुंचे अनमोल के अनुसार, डॉक्टर ने पांच दवाइयां लिखीं, लेकिन अस्पताल से केवल तीन ही मिल सकीं। प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र में भी कई जरूरी दवाइयां उपलब्ध नहीं होने की शिकायत सामने आई। सरकारी अस्पताल में उपचार कराने आने वाले कई परिवारों के लिए बाहर से दवाइयां खरीदना अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन सकता है। ऐसे में दवाइयों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
बाथरूम में पानी नहीं, दुर्गंध से परेशानी
महु गांव से आए मोहम्मद ने बताया कि अस्पताल के बाथरूम में पानी उपलब्ध नहीं था और तेज दुर्गंध के कारण वहां जाना मुश्किल हो रहा था। अस्पताल में स्वच्छता केवल सुविधा का विषय नहीं, बल्कि मरीजों और उनके परिजनों के स्वास्थ्य से जुड़ा जरूरी पहलू है। ऐसे में सफाई, पानी और शौचालयों की नियमित निगरानी जरूरी है।
होम्योपैथिक कक्ष से लैब तक सवाल
नावली से आईं मरियम के अनुसार, सुबह 10 बजे तक होम्योपैथिक कक्ष में चिकित्सक मौजूद नहीं थे। वहां कर्मचारियों ने उनके सीएमओ कार्यालय जाने की बात कही। दूसरी ओर, नगीना निवासी नंदलाल ने खून की जांच करने वाली लैब में कर्मचारियों द्वारा दस्ताने पहनने में लापरवाही बरते जाने की शिकायत की।
चोरी की घटनाओं के चलते सुरक्षा पर भी ध्यान
अस्पताल के मुख्य द्वार पर तैनात सिपाही फारूक ने बताया कि परिसर में लगातार चोरी की घटनाओं के कारण उनकी ड्यूटी लगाई गई है। अस्पताल में मरीजों की सुविधा के साथ परिसर की सुरक्षा भी जरूरी है, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को सामान चोरी होने की चिंता न रहे।
कोट
समस्याओं का संज्ञान लिया जाएगा। जल्द व्यवस्थाएं दुरुस्त कर मरीजों को बेहतर सुविधाएं दी जाएगी। - डॉ. विशाल सिंगला, डिप्टी सिविल सर्जन
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मांडीखेड़ा नागरिक अस्पताल में डॉक्टरों की उपलब्धता, दवाइयों, सफाई और जांच व्यवस्था को लेकर उठे सवाल
रोहित
नगीना। बीमारी से परेशान मरीज जब अस्पताल पहुंचता हैं तो उसकी सबसे बड़ी उम्मीद होती है कि उसे समय पर डॉक्टर मिल जाए, जरूरी जांच हो और दवाइयां भी उपलब्ध हो जाएं। लेकिन, यदि अस्पताल में पहुंचने के बाद भी उसे घंटों इंतजार करना पड़े, पर्चे पर लिखी सभी दवाइयां न मिलें और बुनियादी सुविधाओं के लिए भी जूझना पड़े, तो उसकी परेशानी का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। नूंह जिले के अल आफिया नागरिक अस्पताल, मांडीखेड़ा में सामने आई कमियां स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रही हैं।
प्रतिदिन औसतन 500 से 600 मरीजों की ओपीडी वाले इस अस्पताल में डॉक्टरों की उपलब्धता, दवाइयों, साफ-सफाई और जांच व्यवस्था को लेकर मरीजों ने शिकायतें की हैं। 29 अक्तूबर को अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया कि यहां व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की चुनौती बहुत बड़ी है।
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ओपीडी में भीड़, डॉक्टर नदारद
अस्पताल के जनरल वार्ड स्थित कमरा नंबर छह में बुखार, खांसी और जुकाम से पीड़ित मरीजों की भीड़ रहती है। स्थानीय निवासी यज्ञदत्त के अनुसार, यहां दो डॉक्टर तैनात हैं, लेकिन इमरजेंसी या ऑपरेशन थिएटर में ड्यूटी होने के कारण कई बार एक ही डॉक्टर को ओपीडी संभालनी पड़ती है। इसका असर मरीजों को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ता है। दूर-दराज के गांवों से आने वाले लोगों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। मरीज के साथ आए परिजनों का समय और आने-जाने का खर्च अलग बढ़ता है।
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ऑनलाइन भुगतान, पर्ची के लिए कतार
नगीना से हड्डी का दर्द दिखाने पहुंचे साहिल ने बताया कि ऑनलाइन भुगतान की सुविधा होने के बावजूद पर्ची बनवाने के लिए लंबी लाइन में लगना पड़ता है। उन्होंने यह भी शिकायत की कि सुबह 10 बजे तक डॉक्टर अपने कमरे में नहीं मिले। मरीजों के लिए डिजिटल सुविधा तभी कारगर हो सकती है, जब पंजीकरण से लेकर चिकित्सक को दिखाने तक की प्रक्रिया सरल और समयबद्ध हो। केवल ऑनलाइन भुगतान की सुविधा होने से मरीजों की परेशानी दूर नहीं होती।
पांच दवाइयां लिखी, तीन ही मिलीं
ढाडोली से बुखार का उपचार कराने पहुंचे अनमोल के अनुसार, डॉक्टर ने पांच दवाइयां लिखीं, लेकिन अस्पताल से केवल तीन ही मिल सकीं। प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र में भी कई जरूरी दवाइयां उपलब्ध नहीं होने की शिकायत सामने आई। सरकारी अस्पताल में उपचार कराने आने वाले कई परिवारों के लिए बाहर से दवाइयां खरीदना अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन सकता है। ऐसे में दवाइयों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
बाथरूम में पानी नहीं, दुर्गंध से परेशानी
महु गांव से आए मोहम्मद ने बताया कि अस्पताल के बाथरूम में पानी उपलब्ध नहीं था और तेज दुर्गंध के कारण वहां जाना मुश्किल हो रहा था। अस्पताल में स्वच्छता केवल सुविधा का विषय नहीं, बल्कि मरीजों और उनके परिजनों के स्वास्थ्य से जुड़ा जरूरी पहलू है। ऐसे में सफाई, पानी और शौचालयों की नियमित निगरानी जरूरी है।
होम्योपैथिक कक्ष से लैब तक सवाल
नावली से आईं मरियम के अनुसार, सुबह 10 बजे तक होम्योपैथिक कक्ष में चिकित्सक मौजूद नहीं थे। वहां कर्मचारियों ने उनके सीएमओ कार्यालय जाने की बात कही। दूसरी ओर, नगीना निवासी नंदलाल ने खून की जांच करने वाली लैब में कर्मचारियों द्वारा दस्ताने पहनने में लापरवाही बरते जाने की शिकायत की।
चोरी की घटनाओं के चलते सुरक्षा पर भी ध्यान
अस्पताल के मुख्य द्वार पर तैनात सिपाही फारूक ने बताया कि परिसर में लगातार चोरी की घटनाओं के कारण उनकी ड्यूटी लगाई गई है। अस्पताल में मरीजों की सुविधा के साथ परिसर की सुरक्षा भी जरूरी है, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को सामान चोरी होने की चिंता न रहे।
कोट
समस्याओं का संज्ञान लिया जाएगा। जल्द व्यवस्थाएं दुरुस्त कर मरीजों को बेहतर सुविधाएं दी जाएगी। - डॉ. विशाल सिंगला, डिप्टी सिविल सर्जन