{"_id":"5f6cda8b8ebc3e3f88287be8","slug":"bhim-army-protest-against-agricultural-bills-palwal-news-noi5384021170","type":"story","status":"publish","title_hn":"कृषि विधेयकों के विरोध में भीम आर्मी का प्रदर्शन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कृषि विधेयकों के विरोध में भीम आर्मी का प्रदर्शन
विज्ञापन
पलवल सचिवालय में किसानों की मांगों को लेकर प्रदर्शन करते भीम आर्मी के कार्यकर्ता।
- फोटो : Palwal
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कृषि विधेयकों के विरोध में भीम आर्मी का प्रदर्शन
पलवल। भीम आर्मी भारत एकता मिशन की जिला इकाई ने बृहस्पतिवार को लघु सचिवालय पर प्रदर्शन किया। इस दौरान निजीकरण पर रोक, निजी क्षेत्रों में आरक्षण, युवाओं को रोजगार एवं किसान विरोधी विधेयक रद्द करने की मांग की गई। प्रदर्शन का नेतृत्व जिलाध्यक्ष राजगुरु और संचालन पूर्व जिला प्रभारी सोनू कबीरपंथी ने किया।
ज्ञापन में मांग की गई कि सरकारी संस्थाओं, उपक्रमों, विभागों का निजीकरण तत्काल प्रभाव से रोका जाए। निजी क्षेत्रों में अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक समुदाय के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया जाए। सफाई कर्मचारियों की स्थायी नियुक्ति की जाए। वर्तमान सत्र में पास किए गए तीनों कृषि विधेयकों को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए। राजगुरु ने कहा कि केंद्र सरकार जनकल्याणकारी अवधारणा को छोड़कर जातिवादी व पूंजीवादी व्यवस्था को जनता पर थोप रही है। देश के कमजोर, शोषित व वंचित वर्ग के लोग बर्बादी की कगार पर खड़े हो गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि निजीकरण की प्रक्रिया इसी गति से चलती रही तो वह दिन दूर नहीं जब कमजोर व शोषित वर्ग की शासन-प्रशासन में भागीदारी शून्य रह जाएगी। जिला उपाध्यक्ष सचिन, राजकुमार, अमित, मनोज आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
पलवल। भीम आर्मी भारत एकता मिशन की जिला इकाई ने बृहस्पतिवार को लघु सचिवालय पर प्रदर्शन किया। इस दौरान निजीकरण पर रोक, निजी क्षेत्रों में आरक्षण, युवाओं को रोजगार एवं किसान विरोधी विधेयक रद्द करने की मांग की गई। प्रदर्शन का नेतृत्व जिलाध्यक्ष राजगुरु और संचालन पूर्व जिला प्रभारी सोनू कबीरपंथी ने किया।
ज्ञापन में मांग की गई कि सरकारी संस्थाओं, उपक्रमों, विभागों का निजीकरण तत्काल प्रभाव से रोका जाए। निजी क्षेत्रों में अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक समुदाय के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया जाए। सफाई कर्मचारियों की स्थायी नियुक्ति की जाए। वर्तमान सत्र में पास किए गए तीनों कृषि विधेयकों को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए। राजगुरु ने कहा कि केंद्र सरकार जनकल्याणकारी अवधारणा को छोड़कर जातिवादी व पूंजीवादी व्यवस्था को जनता पर थोप रही है। देश के कमजोर, शोषित व वंचित वर्ग के लोग बर्बादी की कगार पर खड़े हो गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि निजीकरण की प्रक्रिया इसी गति से चलती रही तो वह दिन दूर नहीं जब कमजोर व शोषित वर्ग की शासन-प्रशासन में भागीदारी शून्य रह जाएगी। जिला उपाध्यक्ष सचिन, राजकुमार, अमित, मनोज आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन