{"_id":"6220f76320ecf0434e4d08ea","slug":"8-coror-rs-spend-on-safai-abhiyan-palwal-news-noi6354013129","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक साल में साढे आठ करोड़ रुपये खर्च, फिर साफ नहीं हुआ शहर 11-37-03","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक साल में साढे आठ करोड़ रुपये खर्च, फिर साफ नहीं हुआ शहर 11-37-03
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पलवल। शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए शुरू की गई डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन योजना नाकाफी साबित हुई। एक साल में 8.54 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद भी शहर साफ नहीं हो पाया। योजना के तहत पूरे साल नगर परिषद हर घर से कूड़ा उठाने का दावा करती रही, उसके बावजूद शहर गंदगी के ढेरों से अटा रहा। पूरे साल गंदगी का मुद्दा छाया रहा, परंतु प्रशासन पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। शहर साफ नहीं होने के दिशा में एजेंसी पर जुर्माना भी लगाया गया, परंतु उसका भी कोई प्रभाव नहीं पड़ा। अब जनवरी माह में एजेंसी का ठेका समाप्त होने के बावजूद भी सफाई एजेंसी के माध्यम से ही कराई जा रही है।
दरअसल, पलवल में सफाई का मुद्दा कई वर्षों से छाया हुआ है। नगर परिषद के लाख कोशिशों के बावजूद भी शहर की सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो पाई। करीब दो साल पहले जिला नगर आयुक्त की पलवल में नियुक्त होने पर शहरवासियों को शहर को साफ होने की उम्मीद बंधी। शहर को साफ करने के लिए नई-नई योजनाओं पर काम किया गया। प्रशासन ने निर्णय लिया कि डोर-टू-डोर कलेक्शन कराया जाए, ताकि गलियों में इधर-उधर कूड़ा न डाला जाए। प्रशासन द्वारा टेंडर प्रक्रिया कर जनवरी 2021 शहर के 31 वार्डों से डोर टू डोर कलेक्शन का कार्य एक एजेंसी को दे दिया गया। एजेंसी का काम था कि गाड़ियों के माध्यम से गीले व सूख कचरे को अलग-अलग हर घर से उठाकर मेघपुर स्थित डंपिंग केंद्र या फिरोजपु र स्थित कूड़ा निस्तारण केंद्र पर डाले। एजेंसी ने 44 गाड़ियां, छह ट्रैक्टर व 147 कर्मचारी लगाकर कूड़ा उठाने का दावा किया गया, परंतु उसके बावजूद भी शहर की हर गली में कूड़े के ढेर देखे जा सकते हैं। अब सवाल यह उठता है कि यदि हर घर से कूड़ा उठा लिया जाता है तो गलियों में गंदगी के ढेर लगने का कारण क्या है।
100 मीट्रिक टन कूड़ा उठाने के लिए रोजाना खर्च किए 2.36 लाख
अधिकारियों की माने तो पलवल शहर के 31 वार्डों से कुल 100 मीट्रिक टन कूड़े का कलेक्शन होता है, जो बहुत ज्यादा नहीं है। इस कूड़े को उठाने के लिए एजेंसी को प्रशासन द्वारा 2.36 लाख रुपये प्रतिदिन दिए। इस हिसाब से करीब 71 लाख रुपये प्रतिमाह कूड़ा कलेक्शन के ऊपर खर्च किया गया। इसके अलावा नगर परिषद द्वारा लगाए गए कर्मचारियों का वेतन अलग है, उसके बावजूद भी शहर साफ नहीं हुआ है।
विज्ञापन
शहर में हर घर से कूड़ा उठाने की योजना सार्थक साबित नहीं हो पाई। गाड़ी घरों से कूड़ा उठाती है, परंतु गलियों में पड़े कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। गाड़ी पर एक चालक होता है। कोई कूड़ा डालता है तो वह ले जाता है। गाड़ी के जाने के बाद लोग गलियों में कूड़ा डाल देते हैं।
- कंवर रमेश, पूर्व चेयरमैन नगर परिषद पलवल
डोर टू डोर कलेक्शन का शहर को 10 प्रतिशत भी फायदा नहीं मिला। शहर में अभी गंदगी से बुरा हाल है। कूड़ा उठाने वाली गाड़ी कई-कई दिनों में आती है। वह भी बिना रुके ही चली जाती है। लोग कूड़ा डालने के लिए गाड़ी के पीछे-पीछे भागते नजर आते हैं।
- भूपेंद्र सहरावत, शहरवासी
कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों में निश्चित समय पर आने के निर्देश दिए गए हैं। गाड़ी में चालक व सहायक दो कर्मचारी होने आवश्यक हैं। एजेंसी का ठेका जनवरी माह में पूरा हो गया है। नए टेंडर के लिए सरकार द्वारा टेंडर प्रक्रिया की जा रही है।
- उत्तम सिंह, कार्यकारी जिला नगर आयुक्त व अतिरिक्त उपायुक्त पलवल
विज्ञापन
दरअसल, पलवल में सफाई का मुद्दा कई वर्षों से छाया हुआ है। नगर परिषद के लाख कोशिशों के बावजूद भी शहर की सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं हो पाई। करीब दो साल पहले जिला नगर आयुक्त की पलवल में नियुक्त होने पर शहरवासियों को शहर को साफ होने की उम्मीद बंधी। शहर को साफ करने के लिए नई-नई योजनाओं पर काम किया गया। प्रशासन ने निर्णय लिया कि डोर-टू-डोर कलेक्शन कराया जाए, ताकि गलियों में इधर-उधर कूड़ा न डाला जाए। प्रशासन द्वारा टेंडर प्रक्रिया कर जनवरी 2021 शहर के 31 वार्डों से डोर टू डोर कलेक्शन का कार्य एक एजेंसी को दे दिया गया। एजेंसी का काम था कि गाड़ियों के माध्यम से गीले व सूख कचरे को अलग-अलग हर घर से उठाकर मेघपुर स्थित डंपिंग केंद्र या फिरोजपु र स्थित कूड़ा निस्तारण केंद्र पर डाले। एजेंसी ने 44 गाड़ियां, छह ट्रैक्टर व 147 कर्मचारी लगाकर कूड़ा उठाने का दावा किया गया, परंतु उसके बावजूद भी शहर की हर गली में कूड़े के ढेर देखे जा सकते हैं। अब सवाल यह उठता है कि यदि हर घर से कूड़ा उठा लिया जाता है तो गलियों में गंदगी के ढेर लगने का कारण क्या है।
विज्ञापन
100 मीट्रिक टन कूड़ा उठाने के लिए रोजाना खर्च किए 2.36 लाख
अधिकारियों की माने तो पलवल शहर के 31 वार्डों से कुल 100 मीट्रिक टन कूड़े का कलेक्शन होता है, जो बहुत ज्यादा नहीं है। इस कूड़े को उठाने के लिए एजेंसी को प्रशासन द्वारा 2.36 लाख रुपये प्रतिदिन दिए। इस हिसाब से करीब 71 लाख रुपये प्रतिमाह कूड़ा कलेक्शन के ऊपर खर्च किया गया। इसके अलावा नगर परिषद द्वारा लगाए गए कर्मचारियों का वेतन अलग है, उसके बावजूद भी शहर साफ नहीं हुआ है।
विज्ञापन
शहर में हर घर से कूड़ा उठाने की योजना सार्थक साबित नहीं हो पाई। गाड़ी घरों से कूड़ा उठाती है, परंतु गलियों में पड़े कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। गाड़ी पर एक चालक होता है। कोई कूड़ा डालता है तो वह ले जाता है। गाड़ी के जाने के बाद लोग गलियों में कूड़ा डाल देते हैं।
- कंवर रमेश, पूर्व चेयरमैन नगर परिषद पलवल
डोर टू डोर कलेक्शन का शहर को 10 प्रतिशत भी फायदा नहीं मिला। शहर में अभी गंदगी से बुरा हाल है। कूड़ा उठाने वाली गाड़ी कई-कई दिनों में आती है। वह भी बिना रुके ही चली जाती है। लोग कूड़ा डालने के लिए गाड़ी के पीछे-पीछे भागते नजर आते हैं।
- भूपेंद्र सहरावत, शहरवासी
कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों में निश्चित समय पर आने के निर्देश दिए गए हैं। गाड़ी में चालक व सहायक दो कर्मचारी होने आवश्यक हैं। एजेंसी का ठेका जनवरी माह में पूरा हो गया है। नए टेंडर के लिए सरकार द्वारा टेंडर प्रक्रिया की जा रही है।
- उत्तम सिंह, कार्यकारी जिला नगर आयुक्त व अतिरिक्त उपायुक्त पलवल