फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Paddy get wet kept under the open sky due to drizzling rain for 40 hours in Sonipat

सोनीपत: 40 घंटे की बूंदाबांदी से खुले आसमान के नीचे रखा धान भीगा, फफूंदी लगने के साथ काला पड़ने लगा

Sun, 09 Oct 2022 11:34 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Sun, 09 Oct 2022 11:34 PM IST
सार

टिन शेड के नीचे पड़ा धान भी सुरक्षित नहीं। जर्जर टीन से टपकते पानी में भीग गया। नमी युक्त धान की खरीद करने के लिए खरीदार नहीं मिल रहे हैं। किसानों की परेशानी बढ़ गई है। 

विज्ञापन
Paddy get wet kept under the open sky due to drizzling rain for 40 hours in Sonipat
धान की ढेरी के पास भरा बारिश का पानी। धान में लगी फफूंदी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

भाई म्हारा बखत खराब सै, ना ते आढ़ती भी नूं पूछा करदै, ताऊ इतने भा मै थारी फसल बिकवा दूं। अर इस राम के बरसे पाछै इब खरीदण तै नाटण लागै। या बारिश म्हारे खातर नुकसान बनकै बरसण लाग री सै। सोनीपत अनाज मंडी में धान की फसल लेकर पहुंचे किसानों की पीड़ा उनके शब्द खुद बयां कर रहे हैं। सोनीपत की अनाज मंडी में खुले आसमान के नीचे पड़ी धान की फसल भीगने के बाद अब उसमें फफूंदी लगने लगी है।

विज्ञापन


जिसके बाद व्यापारियों ने धान खरीदने के लिए मनमानी शुरू कर दी है। 40 घंटे तक हुई बूंदाबांदी के बाद खुले आसमान के नीचे पड़ा धान काला भी पड़ने लगा है। ऐसे में व्यापारियों ने खरीदने से मना कर दिया है। करीब तीन हजार क्विंटल धान प्रभावित हुआ है।
विज्ञापन


जिसके चलते किसानों की परेशानी बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि कम दाम में फसल बेचने से लागत भी पूरी नहीं हो रही। ऐसे में बूंदाबांदी के कारण रविवार को किसानों को 600 से 800 रुपये प्रति क्विंटल कम भाव में धान बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा। 
विज्ञापन
विज्ञापन


40 घंटे लगातार हुई बूंदाबांदी के बीच सोनीपत की अनाज मंडी में करीब तीन हजार क्विंटल धान भीग गया। इनमें अधिकतर ढेरियों पर तिरपाल भी लगा रखा था। टिन शेड के नीचे रखा धान भी बारिश के पानी से नहीं बच पाया। वह जर्जर शेड का शिकार हो गया।

तीन दिन की बारिश का असर यह हुआ कि भीगे धान की चार ढेरियों में फफूंदी तक लग गई। इससे करीब तीन सौ क्विंटल धान फफूंदी से प्रभावित हुआ है। मंडी परिसर में मजदूरों की मदद से धान की ढेरियों को फैलाया जा रहा है। अब किसानों को इस धान को सुखाने के साथ ही इसकी सफाई करानी होगी।

यह भी पढ़ें : कैथल में हैवानियत: सात साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या, पेट्रोल डालकर जलाया शव, पड़ोसी ने ही की वारदात

उसके बाद ही यह बिक तो सकेगा, लेकिन पहले जैसा भाव नहीं मिल पाएगा। जिससे किसानों पर दोहरी मार पड़ेगी। किसान को उसे सुखाने से लेकर सफाई तक का खर्च वहन करना होगा। उसके बाद भी दाम कम मिलेंगे। धान भीगने के बाद खरीदारों ने बोली लगाने से मना कर दिया है।

धान नहीं बिकने से अधिकतर किसानों के चेहरे पर मायूसी छाई रही। किसान आढ़तियों से कह रहे कि जिस दाम में धान बिकती है वह बेच दें। किसानों का कहना था कि पहले धान के दाम ठीक मिल रहे थे, लेकिन बारिश के बाद धान बेचना उनके लिए मुसीबत बन गया है। बारिश में भीगे धान से लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। जिससे किसानों को काफी नुकसान है। 

बारिश से दाम घटने से नहीं निकल पाएगा खर्च 
किसानों का कहना है कि बारिश में धान की फसल भीगने से अब दाम कम मिल रहे हैं। पहले जहां धान 3800 रुपये तक बिक रहा था। उसके बाद आवक बढ़ने से तीन सौ रुपये तक कम हुआ था। लेकिन बारिश ने तो कमर ही तोड़ दी है। रविवार को धान की फसल 2700 से 3200 रुपये तक बिक सका है। ऐसे में बाजार में कीटनाशक व खरपतवार की दवाइयों के रेट दोगुने हो गए हैं। यही नहीं डीजल के दाम भी इस वक्त पेट्रोल के बराबर जा चुके हैं।  जिस कारण प्रतिवर्ष धान की फसल उगाने के लिए लागत बढ़ती जा रही है, लेकिन दाम कम मिल रहे हैं। 

खरखौदा मंडी में नहीं हुई धान की खरीद
खरखौदा में रोहतक रोड स्थित अनाज मंडी में 200 क्विंटल धान आया था, लेकिन एक ढेरी होने के कारण खरीदार नहीं पहुंचा। मंडी में 3955 क्विंटल धान की आवक हुई है। जिसमें से 3880 क्विंटल धान खरीदा गया। गन्नौर मंडी में 2000 क्विंटल धान बिका। गोहाना अनाज मंडी में 1800 क्विंटल धान की बिक्री हुई। वहीं 250 क्विंटल पीआर धान में नमी होने के कारण तीन दिन से खरीद नहीं हुई है। उम्मीद है कि सोमवार को पीआर धान की खरीद दोबारा शुरू हो जाएगी। सोनीपत मंडी में रविवार को छुट्टी होने के कारण पीआर धान की आवक नहीं हुई।  

पहले मैं चार एकड़ का धान लेकर आया था, वह 3500 रुपये प्रति क्विंटल बिक गया था। शनिवार को हुई बूंदाबांदी के बीच धान लेकर आया तो वह बिक नहीं पाया। रविवार को धान के दाम 3100 रुपये प्रति क्विंटल मिल पाए हैं। बारिश के कारण सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। -रामपाल, किसान

सरकार की ओर से मंडी में टिन शेड की बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए। टिन शेड जर्जर होने के कारण बारिश के पानी से धान की कई ढेरियां भीग गईं। अब किसानों को धान की पैदावार बेचने में परेशानी आ रही है। कई किसानों को उम्मीद के मुताबिक धान के दाम नहीं मिल रहे और कई किसानों का धान तो बिक नहीं पाया है। -विनोद कुमार, किसान 


ढाई एकड़ का धान लेकर दो दिन से मंडी में आया हुआ हूं। बूंदाबांदी के दौरान धान अब तक नहीं बिक पाया। इसके चलते काफी धान बारिश में भीग गया है। रविवार सुबह फिर से चार बीघे का धान लेकर आया हूं। वह 2900 रुपये प्रति क्विंटल बिका है। धान के दाम कम मिलने से परेशानी हो रही है। महंगाई के दौर में फसल की लागत भी पूरी नहीं हो रही है। -तेजबीर, किसान 

जर्जर हुए टिन शेड के बारे में मार्केटिंग बोर्ड के अधिकारियों को अवगत करा दिया गया था। इसे जल्द बदलवाकर नई टिन लगाई जाएंगी। धान के ढेरों को बूंदाबांदी से बचाव के लिए तिरपाल की व्यवस्था की गई थी। जिन किसानों की धान भीगी है और कुछ में फफूंदी लगी उस फसल को सूखने को रख दिया। सूख जाने व सफाई कराने के बाद उसे बिकवा दिया जाएगा। मंडी में करीब 3 हजार क्विंटल धान भीगा हुआ है। कुछ धान से भरी बोरियां भी बूंदाबंदी में भीग गई हैं। -जितेंद्र कुमार, सचिव मार्केट कमेटी सोनीपत

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed