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ससुर की हत्या में पुत्रवधु समेत चार को उम्रकैद
अमर उजाला, रोहतक
Updated Fri, 10 Jan 2014 04:06 PM IST
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अदालत ने गांव दतौड़ के गंगा स्वरूप हत्याकांड में उनकी पुत्रवधू समेत चार को उम्र कैद और दस-दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
जुर्माना न भरने पर दोषियों को चार-चार माह की अतिरिक्त सजा काटनी पड़ेगी। अदालत ने गंगा स्वरूप के भाई रघुबीर सिंह की गवाही को अहम मानते हुए, उसके आधार पर चारों को सजा हुई है।
7 मई 2010 को शाम करीब चार बजे गांव दतौड़ निवासी गंगा स्वरूप खेतों में जा रहा था। इसी दौरान मोटरसाइकिल पर सवार तीन युवकों ने उसकी गला दबाकर हत्या कर दी थी।
पुलिस ने उनकी पुत्रवधू गीता को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो मामले का पटाक्षेप हो गया। गीता के सोनीपत के गांव चटिया निवासी राकेश के साथ संबंध थे और उसका ससुर उनके बीच रोड़ा बना हुआ था। उसे रास्ते से हटाने के लिए गीता ने राकेश के साथ मिलकर हत्या करने की साजिश रची थी।
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साजिश के तहत राकेश ने अपने साथी गांव चटिया निवासी सुरेंद्र और भट्ठ गांव निवासी सुनील के साथ मिलकर गंगा स्वरूप की हत्या की थी। पुलिस ने चारों को गिरफ्तार कर लिया था।
पुलिस ने गंगा स्वरूप के भाई रघुबीर सिंह को मुख्य गवाह बनाया था। 80 वर्षीय रघुबीर सिंह की गवाही को अहम मानते हुए वीरवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश कमल कांत की अदालत ने चारों को उम्रकैद और दस-दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न भरने पर दोषियों को चार-चार माह की अतिरिक्त सजा काटनी पड़ेगी।
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जुर्माना न भरने पर दोषियों को चार-चार माह की अतिरिक्त सजा काटनी पड़ेगी। अदालत ने गंगा स्वरूप के भाई रघुबीर सिंह की गवाही को अहम मानते हुए, उसके आधार पर चारों को सजा हुई है।
7 मई 2010 को शाम करीब चार बजे गांव दतौड़ निवासी गंगा स्वरूप खेतों में जा रहा था। इसी दौरान मोटरसाइकिल पर सवार तीन युवकों ने उसकी गला दबाकर हत्या कर दी थी।
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पुलिस ने उनकी पुत्रवधू गीता को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो मामले का पटाक्षेप हो गया। गीता के सोनीपत के गांव चटिया निवासी राकेश के साथ संबंध थे और उसका ससुर उनके बीच रोड़ा बना हुआ था। उसे रास्ते से हटाने के लिए गीता ने राकेश के साथ मिलकर हत्या करने की साजिश रची थी।
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साजिश के तहत राकेश ने अपने साथी गांव चटिया निवासी सुरेंद्र और भट्ठ गांव निवासी सुनील के साथ मिलकर गंगा स्वरूप की हत्या की थी। पुलिस ने चारों को गिरफ्तार कर लिया था।
पुलिस ने गंगा स्वरूप के भाई रघुबीर सिंह को मुख्य गवाह बनाया था। 80 वर्षीय रघुबीर सिंह की गवाही को अहम मानते हुए वीरवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश कमल कांत की अदालत ने चारों को उम्रकैद और दस-दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न भरने पर दोषियों को चार-चार माह की अतिरिक्त सजा काटनी पड़ेगी।