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खेमका की शिकायत, नेफेड लुधियाना का ब्रांच मैनेजर सस्पेंड
चंडीगढ़/डॉ. सुरेंद्र धीमान
Updated Sat, 19 Oct 2013 10:51 PM IST
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वर्ष 2010-11 सीजन के लिए एक लाख क्विंटल गेहूं के बीज खरीद में पांच करोड़
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रुपये के गबन का आरोप लगाने वाले सीनियर आईएएस अशोक खेमका की शिकायत पर
पहला विकेट नेफेड (नेशनल एग्रीकल्चर को-आपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन) के
ब्रांच मैनेजर का गिरा है।
नेफेड प्रबंधन ने लुधियाना के ब्रांच मैनेजर आरपी शर्मा को पांच दिन पहले निलंबित कर दिया है। नेफेड के चेयरमैन डॉ. बिजेंद्र सिंह ने शनिवार को अमर उजाला के पूछने पर मैनेजर को सस्पेंड करने की पुष्टि की है। खेमका ने शिकायत सीबीआई को भेजी थी, जिसे सीबीआई ने कृषि मंत्रालय को भेजा। कृषि मंत्रालय ने शिकायत नेफेड को भेजी।
नेफेड प्रबंधन के एक उच्चाधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि अशोक खेमका की शिकायत में लगाए आरोपों की जांच आंतरिक विजिलेंस से करवाई गई थी। जांच में पाया कि लुधियाना के ब्रांच मैनेजर आरपी शर्मा उस दिन छुट्टी पर थे, मगर उन्होंने दिल्ली से ही 3 नवंबर, 2010 को हरियाणा बीज विकास निगम को 20 हजार क्विंटल गेहूं का बीज उपलब्ध होने का पत्र लिख दिया। यह नेफेड की बिक्री प्रक्रिया के खिलाफ था।
जांच में पाया गया कि नेफेड ने जो बीज हरियाणा बीज विकास निगम को सप्लाई किया, वह नेफेड के पंजीकृत फर्मों से नहीं खरीदा था बल्कि गैर पंजीकृत फर्मों से खरीदा गया था। नियमानुसार केवल पंजीकृत फर्मों से ही बीज खरीदा जा सकता था। इसके अलावा नेफेड ने बीज विकास निगम को गलत जानकारी देकर संस्था को बदनाम किया है। अधिकारी ने बताया कि खेमका ने शिकायत में लिखा था कि नेफेड ने अपने पंजीकृत फर्मों से बीज महंगा खरीदकर निगम को सप्लाई किया था। जांच में मिला कि नेफेड ने गैरकानूनी तरीके से गेहूं का बीज गैर पंजीकृत फर्मों से खरीदा गया था इसलिए बीज महंगा या सस्ता खरीदने का मामला महत्वहीन हो जाता है। नेफेड की इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई ने प्रारंभिक जांच दर्ज की है।
एक ही व्यक्ति की अलग-अलग फर्में
अशोक खेमका ने चकबंदी महानिदेशक पद से तबादले के बाद 15 अक्तूबर, 2012 को हरियाणा बीज विकास निगम के प्रबंध निदेशक पद पर ज्वाइन किया था। उन्हें 19 अक्तूबर, 2012 को भिवानी सुधार एवं विकास समिति की शिकायत मिली। इस शिकायत पर खेमका ने दो साल पुराने (2010-11) गेहूं खरीद मामले की प्रारंभिक जांच की। जांच में पाया गया कि नेफेड और एनसीसीएफ के पास बीज उपलब्ध नहीं था।
मगर उन्होंने गलत जानकारी दी जिससे निगम अन्य एजेंसियों से टेंडर नहीं मांग सका। खेमका ने जांच में पाया कि एनसीसीएफ और नेफेड ने तीन मिडलमेन फर्मों यूनाइटेड एग्री कारपोरेशन, जय शंकर सीड्स और ठाकर दास एंड संस की मार्फत बीज खरीदा। इन तीन फर्मों ने एक ही व्यक्ति या इस व्यक्ति से जुड़ी 32 प्राइवेट फर्मों से एक लाख क्विंटल बीज 1450 से 1700 रुपये प्रति क्विंटल खरीदा। नेफेड और एनसीसीएफ ने यह बीज हरियाणा बीज विकास निगम को 2050 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचा।
सर्टिफाइड नहीं था मगर बाद में करवाया
नेफेड और एनसीसीएफ ने बिना सर्टिफाइड बीज दिया जबकि सर्टिफाइड देना था। बाद में यह बीज हरियाणा सीड सर्टिफिकेशन एजेंसी से सर्टिफाइड करवाया। खेमका का आरोप है कि इसके लिए हरियाणा के अफसर जिम्मेवार हैं। इसलिए जांच में हरियाणा के चार अफसर भी चपेट में आ सकते हैं।
नेफेड प्रबंधन ने लुधियाना के ब्रांच मैनेजर आरपी शर्मा को पांच दिन पहले निलंबित कर दिया है। नेफेड के चेयरमैन डॉ. बिजेंद्र सिंह ने शनिवार को अमर उजाला के पूछने पर मैनेजर को सस्पेंड करने की पुष्टि की है। खेमका ने शिकायत सीबीआई को भेजी थी, जिसे सीबीआई ने कृषि मंत्रालय को भेजा। कृषि मंत्रालय ने शिकायत नेफेड को भेजी।
नेफेड प्रबंधन के एक उच्चाधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि अशोक खेमका की शिकायत में लगाए आरोपों की जांच आंतरिक विजिलेंस से करवाई गई थी। जांच में पाया कि लुधियाना के ब्रांच मैनेजर आरपी शर्मा उस दिन छुट्टी पर थे, मगर उन्होंने दिल्ली से ही 3 नवंबर, 2010 को हरियाणा बीज विकास निगम को 20 हजार क्विंटल गेहूं का बीज उपलब्ध होने का पत्र लिख दिया। यह नेफेड की बिक्री प्रक्रिया के खिलाफ था।
जांच में पाया गया कि नेफेड ने जो बीज हरियाणा बीज विकास निगम को सप्लाई किया, वह नेफेड के पंजीकृत फर्मों से नहीं खरीदा था बल्कि गैर पंजीकृत फर्मों से खरीदा गया था। नियमानुसार केवल पंजीकृत फर्मों से ही बीज खरीदा जा सकता था। इसके अलावा नेफेड ने बीज विकास निगम को गलत जानकारी देकर संस्था को बदनाम किया है। अधिकारी ने बताया कि खेमका ने शिकायत में लिखा था कि नेफेड ने अपने पंजीकृत फर्मों से बीज महंगा खरीदकर निगम को सप्लाई किया था। जांच में मिला कि नेफेड ने गैरकानूनी तरीके से गेहूं का बीज गैर पंजीकृत फर्मों से खरीदा गया था इसलिए बीज महंगा या सस्ता खरीदने का मामला महत्वहीन हो जाता है। नेफेड की इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई ने प्रारंभिक जांच दर्ज की है।
एक ही व्यक्ति की अलग-अलग फर्में
अशोक खेमका ने चकबंदी महानिदेशक पद से तबादले के बाद 15 अक्तूबर, 2012 को हरियाणा बीज विकास निगम के प्रबंध निदेशक पद पर ज्वाइन किया था। उन्हें 19 अक्तूबर, 2012 को भिवानी सुधार एवं विकास समिति की शिकायत मिली। इस शिकायत पर खेमका ने दो साल पुराने (2010-11) गेहूं खरीद मामले की प्रारंभिक जांच की। जांच में पाया गया कि नेफेड और एनसीसीएफ के पास बीज उपलब्ध नहीं था।
मगर उन्होंने गलत जानकारी दी जिससे निगम अन्य एजेंसियों से टेंडर नहीं मांग सका। खेमका ने जांच में पाया कि एनसीसीएफ और नेफेड ने तीन मिडलमेन फर्मों यूनाइटेड एग्री कारपोरेशन, जय शंकर सीड्स और ठाकर दास एंड संस की मार्फत बीज खरीदा। इन तीन फर्मों ने एक ही व्यक्ति या इस व्यक्ति से जुड़ी 32 प्राइवेट फर्मों से एक लाख क्विंटल बीज 1450 से 1700 रुपये प्रति क्विंटल खरीदा। नेफेड और एनसीसीएफ ने यह बीज हरियाणा बीज विकास निगम को 2050 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचा।
सर्टिफाइड नहीं था मगर बाद में करवाया
नेफेड और एनसीसीएफ ने बिना सर्टिफाइड बीज दिया जबकि सर्टिफाइड देना था। बाद में यह बीज हरियाणा सीड सर्टिफिकेशन एजेंसी से सर्टिफाइड करवाया। खेमका का आरोप है कि इसके लिए हरियाणा के अफसर जिम्मेवार हैं। इसलिए जांच में हरियाणा के चार अफसर भी चपेट में आ सकते हैं।