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Mahendragarh-Narnaul News: अपदिवंगत अभिनेता सतीश कौशिक के गांव पहुंची पत्नी शशि

Sat, 09 Mar 2024 01:05 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Sat, 09 Mar 2024 01:05 AM IST
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Wife Shashi reached the village of late actor Satish Kaushik
कनीना (महेंद्रगढ़)। बॉलीवुड के मशहूर दिवंगत अभिनेता सतीश कौशिक की पत्नी शशि कौशिक शुक्रवार को अपने पति के पैतृक गांव धनौंदा पहुंचीं। शशि ने गांव का भ्रमण किया और पति की तरफ से गांव में कराए जा रहे विकास कार्यों को जल्द पूरा करने की बात कही। शशि ने कहा कि सतीश का सपना था कि वह अपने गांव का देश के साथ-साथ विदेश में भी नाम रोशन करेंगे। उनका गांव से जुड़ाव था, उनके अधूरे सपने को वह पूरा करेंगी।
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गांव धनौंदा पहुंचने पर शशि कौशिक ने ग्रामीणों से कहा कि फिल्म इंडस्ट्रीज के निर्माता निर्देशक सतीश अपने पैतृक गांव से सदैव जुड़े रहे। सतीश ने गांव में करोड़ों रुपये के विकास कार्य कराए। कई काम ऐसे हैं, जो अधूरे रह गए हैं। अधूरे कामों को वह जल्द पूरा कराएंगी। कहा कि यह गांव सतीश की मातृभूमि है और उनकी मातृभूमि को वह किसी भी तरह से पिछड़ने नहीं देंगी। इस दौरान उन्होंने गांव की गलियों का भ्रमण कर ग्रामीणों से बातचीत की।
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गांव की मिट्टी से आज भी वही जुड़ाव है
सतीश कौशिक के भाई अशोक कौशिक व ब्रह्मदत्त कौशिक ने बताया कि हम सब भाई इसी गांव की मिट्टी में पैदा हुए थे। इस मिट्टी से आज भी उनका जुड़ाव है। सतीश ने गांव धनौंदा में खेल स्टेडियम बनाकर गांव को सौंप दिया, ताकि गांव में खिलाड़ी देश व प्रदेश में अपना नाम ऊंचा कर सकें।
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सतीश कौशिक गांव में लगाते थे खुला दरबार
गांव के वरिष्ठ समाजसेवी मार्केट कमेटी के पूर्व अध्यक्ष ठाकुर रतन सिंह तंवर, ठाकुर राजेंद्र सिंह नंबरदार, सरपंच प्रतिनिधि वीर सिंह परमार, सतपाल शर्मा ने बताया की सतीश कौशिक का गांव से बहुत लगाव था। वह फिल्म इंडस्ट्रीज में जाने के बाद भी गांव धनौंदा पहुंचकर ग्रामीणों से बेबाक मिलते थे। ग्रामीणों की किसी भी तरह की समस्या का वह समाधान करवाते थे। ग्रामीणों ने बताया कि सतीश कौशिक रने गुरुग्राम कमिश्नर, महेंद्रगढ़ के जिला उपयुक्त व सभी प्रशासन को लाकर गांव में खुला दरबार भी लगाया था, ताकि गांव के लोगों की समस्या का निराकरण किया जाए। ग्रामीणों ने बताया कि सतीश को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। ग्रामीणों ने उनके परिवार को आश्वासन दिया कि वह जब भी गांव धनौंदा आएंगे गांव के 36 बिरादरी के लोग उनका स्वागत करेंगे।
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