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Mahendragarh-Narnaul News: ट्राॅमा सेंटर शुरू होने का करना पड़ेगा इंतजार
Sat, 05 Apr 2025 11:17 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 05 Apr 2025 11:17 PM IST
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फोटो नंबर-06नारनौल के नागरिक अस्पताल में बने ट्रामा सेंटर का निरीक्षण करते सिविल सर्जन डाॅ. अ
नारनौल। जिला अस्पताल में बने ट्राॅमा सेंटर के उद्घाटन के लिए लोगों को अभी कुछ दिन और इंतजार करना पड़ेगा।
बताया जाता है कि ट्राॅमा सेंटर के उद्धाटन को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय से हरी झंडी नहीं मिल पा रही है। इस कारण ट्राॅमा सेंटर के लिए लोगों का इंतजार बढ़ता जा रहा है। बीते सप्ताह जब स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने जिले का दौरा किया था उस समय भी ट्राॅमा सेंटर के उद्धाटन की चर्चा जोरों पर थी, लेकिन ट्राॅमा सेंटर के उद्धाटन संबंध में स्वास्थ्य विभाग के पास कोई अधिकारिक सूचना नहीं आई।
वहीं दिसबंर में मुख्यमंत्री द्वारा इसके उद्घाटन करने की चर्चा थी। उस समय पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का निधन हो जाने से यह अधर में लटक गया, लेकिन अब सभी तैयारियां हो जाने के बाद भी इसके उद्धाटन में समय लगा रहा है। जिला अस्पताल में बने सेंटर के निर्माण कार्य सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी कर लोक निर्माण विभाग इसे स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर भी किया जा चुका है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो उद्धाटन के संबंध में कई बार कार्यक्रम बनाए गए हैं, लेकिन व्यस्तताओं के चलते उद्धाटन अभी अटका हुआ है।
ट्राॅमा सेंटर में रखे सामान को व्यवस्थित करने व साफ-सफाई तथा अन्य सुविधाओं को लेकर सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार व एमएस डॉ. आशा शर्मा भी कई बार ट्राॅमा सेंटर का निरीक्षण कर चुके हैं। सेंटर के सभी वार्ड में बेड आदि सहित अन्य सभी जरूरी सामान भी लगा दिया गया है।
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ट्राॅमा सेंटर में गंभीर मरीजों का इलाज किया जाता है। इसलिए ट्राॅमा सेंटर में आपातकालीन में जरूरी सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध होगी। इसमें न्यूरोलॉजी, सिटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड, लेबोरेटरी, एक्स-रे सहित विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति होगी। जिससे कि मरीजों को किसी भी प्रकार की जांच के लिए अन्य स्थान पर न जान पड़े।
इंसेट
गंभीर मरीजों को 125 किलोमीटर दूर रोहतक किया जाता है रेफर
जिले में हादसे में गंभीर रूप से घायलों को नारनौल नागरिक अस्पताल के लिए ही रेफर किया जाता है, लेकिन यहां पर्याप्त संसाधन नहीं होने के कारण घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में ट्राॅमा सेंटर शुरू होने से गंभीर घायलों को जिले में ही बेहतर इलाज मिल सकेगा। रोहतक व नारनौल दूरी 125 किलोमीटर है। इस कारण मरीज को रोहतक पीजीआई पहुंचने में ढाई से तीन घंटे का समय लगता है। ऐसे में कई बार गंभीर मरीज पीजीआई पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं।
वर्जन-
ट्राॅमा सेंटर पूरी तरह से तैयार है। जरूरी सामान भी सेंटर में आ गए हैं। ट्राॅमा सेंटर को जल्द से जल्द शुरू करवाने के प्रयास किए जा रहे है।
डॉ. अशोक कुमार। सिविल सर्जन नागरिक अस्पताल
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बताया जाता है कि ट्राॅमा सेंटर के उद्धाटन को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय से हरी झंडी नहीं मिल पा रही है। इस कारण ट्राॅमा सेंटर के लिए लोगों का इंतजार बढ़ता जा रहा है। बीते सप्ताह जब स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने जिले का दौरा किया था उस समय भी ट्राॅमा सेंटर के उद्धाटन की चर्चा जोरों पर थी, लेकिन ट्राॅमा सेंटर के उद्धाटन संबंध में स्वास्थ्य विभाग के पास कोई अधिकारिक सूचना नहीं आई।
वहीं दिसबंर में मुख्यमंत्री द्वारा इसके उद्घाटन करने की चर्चा थी। उस समय पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का निधन हो जाने से यह अधर में लटक गया, लेकिन अब सभी तैयारियां हो जाने के बाद भी इसके उद्धाटन में समय लगा रहा है। जिला अस्पताल में बने सेंटर के निर्माण कार्य सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी कर लोक निर्माण विभाग इसे स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर भी किया जा चुका है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो उद्धाटन के संबंध में कई बार कार्यक्रम बनाए गए हैं, लेकिन व्यस्तताओं के चलते उद्धाटन अभी अटका हुआ है।
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ट्राॅमा सेंटर में रखे सामान को व्यवस्थित करने व साफ-सफाई तथा अन्य सुविधाओं को लेकर सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार व एमएस डॉ. आशा शर्मा भी कई बार ट्राॅमा सेंटर का निरीक्षण कर चुके हैं। सेंटर के सभी वार्ड में बेड आदि सहित अन्य सभी जरूरी सामान भी लगा दिया गया है।
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ट्राॅमा सेंटर में गंभीर मरीजों का इलाज किया जाता है। इसलिए ट्राॅमा सेंटर में आपातकालीन में जरूरी सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध होगी। इसमें न्यूरोलॉजी, सिटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड, लेबोरेटरी, एक्स-रे सहित विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति होगी। जिससे कि मरीजों को किसी भी प्रकार की जांच के लिए अन्य स्थान पर न जान पड़े।
इंसेट
गंभीर मरीजों को 125 किलोमीटर दूर रोहतक किया जाता है रेफर
जिले में हादसे में गंभीर रूप से घायलों को नारनौल नागरिक अस्पताल के लिए ही रेफर किया जाता है, लेकिन यहां पर्याप्त संसाधन नहीं होने के कारण घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में ट्राॅमा सेंटर शुरू होने से गंभीर घायलों को जिले में ही बेहतर इलाज मिल सकेगा। रोहतक व नारनौल दूरी 125 किलोमीटर है। इस कारण मरीज को रोहतक पीजीआई पहुंचने में ढाई से तीन घंटे का समय लगता है। ऐसे में कई बार गंभीर मरीज पीजीआई पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं।
वर्जन-
ट्राॅमा सेंटर पूरी तरह से तैयार है। जरूरी सामान भी सेंटर में आ गए हैं। ट्राॅमा सेंटर को जल्द से जल्द शुरू करवाने के प्रयास किए जा रहे है।
डॉ. अशोक कुमार। सिविल सर्जन नागरिक अस्पताल