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Mahendragarh-Narnaul News: किल्लत से बचने के लिए किसान दो माह पहले ही ले रहे डीएपी
Tue, 04 Aug 2026 11:48 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Tue, 04 Aug 2026 11:48 PM IST
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फोटो नंबर- 10बाबूलाल, गांव- पटीकरा
नारनौल। जिले में किसान रबी फसल की बुवाई से दो माह पहले ही डीएपी खाद खरीद रहे हैं। खरीफ फसल के दौरान हुई किल्लत के कारण वे इस बार पहले से तैयारी कर रहे हैं। उस समय खपत की तुलना में केवल 50 फीसदी डीएपी ही केंद्रों पर उपलब्ध हो पाई थी।
खरीफ फसल के दौरान जिले में करीब 14 हजार मीट्रिक टन डीएपी की मांग थी। इसके मुकाबले केवल 7 हजार मीट्रिक टन डीएपी ही वितरित किया जा सका। मई और जून माह में डीएपी की भारी कमी बनी हुई थी।
रबी फसल के लिए जिले में करीब 22 हजार मीट्रिक टन डीएपी की मांग रहने का अनुमान है। नारनौल केंद्र से अब तक लगभग 2 हजार बैग डीएपी का वितरण किया जा चुका है। बारिश के साथ ही यूरिया की मांग में भी बढ़ोतरी देखी गई है। किसान बारिश के दौरान भी खाद केंद्रों पर लाइन में खड़े रहे।
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किसान को पांच बैग मिल रही यूरिया
केंद्र पर किसानों को एक बार में अधिकतम 5 बैग यूरिया दिया जा रहा है। इसके साथ ही उन्हें 3 बैग डीएपी खाद भी वितरित किया जा रहा है। मंगलवार को 87 बैग यूरिया का वितरण किया गया। इसी दिन 426 बैग डीएपी खाद भी किसानों को उपलब्ध कराया गया।
-बाजरे की बिजाई के दौरान डीएपी के लिए केंद्र पर बहुत चक्कर काटने पड़े। इसकी वजह से बाजरे की बिजाई भी देरी से कर पाया। इसलिए गेहूं व सरसों की बिजाई से पहले ही डीएपी ले लिया ताकि बिजाई के समय परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।-मुकेश, गांव, पटीकरा।
-गांव के अधिकतर किसान सितंबर माह में सब्जियों की खेती करते हैं, जिसके लिए भी डीएपी की आवश्यकता होती है। बाजरे के दौरान डीएपी के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ा था। अभी केंद्र पर डीएपी उपलब्ध है, इसलिए यूरिया के साथ-साथ डीएपी भी ले लिया।-बाबूलाल, पटीकरा।
वर्जन :
जिले में सभी केंद्रों पर यूरिया व डीएपी का वितरण सुचारू बना हुआ है। खरीफ फसल के दौरान अब तक करीब 20 हजार मीट्रिक टन यूरिया का वितरण किया जा चुका है। वहीं करीब 2 हजार मीट्रिक टन का स्टॉक उपलब्ध है।-संजय यादव, गुणवत्ता नियंत्रक निरीक्षक, कृषि विभाग, नारनौल।
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खरीफ फसल के दौरान जिले में करीब 14 हजार मीट्रिक टन डीएपी की मांग थी। इसके मुकाबले केवल 7 हजार मीट्रिक टन डीएपी ही वितरित किया जा सका। मई और जून माह में डीएपी की भारी कमी बनी हुई थी।
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रबी फसल के लिए जिले में करीब 22 हजार मीट्रिक टन डीएपी की मांग रहने का अनुमान है। नारनौल केंद्र से अब तक लगभग 2 हजार बैग डीएपी का वितरण किया जा चुका है। बारिश के साथ ही यूरिया की मांग में भी बढ़ोतरी देखी गई है। किसान बारिश के दौरान भी खाद केंद्रों पर लाइन में खड़े रहे।
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किसान को पांच बैग मिल रही यूरिया
केंद्र पर किसानों को एक बार में अधिकतम 5 बैग यूरिया दिया जा रहा है। इसके साथ ही उन्हें 3 बैग डीएपी खाद भी वितरित किया जा रहा है। मंगलवार को 87 बैग यूरिया का वितरण किया गया। इसी दिन 426 बैग डीएपी खाद भी किसानों को उपलब्ध कराया गया।
-बाजरे की बिजाई के दौरान डीएपी के लिए केंद्र पर बहुत चक्कर काटने पड़े। इसकी वजह से बाजरे की बिजाई भी देरी से कर पाया। इसलिए गेहूं व सरसों की बिजाई से पहले ही डीएपी ले लिया ताकि बिजाई के समय परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।-मुकेश, गांव, पटीकरा।
-गांव के अधिकतर किसान सितंबर माह में सब्जियों की खेती करते हैं, जिसके लिए भी डीएपी की आवश्यकता होती है। बाजरे के दौरान डीएपी के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ा था। अभी केंद्र पर डीएपी उपलब्ध है, इसलिए यूरिया के साथ-साथ डीएपी भी ले लिया।-बाबूलाल, पटीकरा।
वर्जन :
जिले में सभी केंद्रों पर यूरिया व डीएपी का वितरण सुचारू बना हुआ है। खरीफ फसल के दौरान अब तक करीब 20 हजार मीट्रिक टन यूरिया का वितरण किया जा चुका है। वहीं करीब 2 हजार मीट्रिक टन का स्टॉक उपलब्ध है।-संजय यादव, गुणवत्ता नियंत्रक निरीक्षक, कृषि विभाग, नारनौल।