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मनुष्य जीवन में तीन ऋण मुख्य हैं : भारद्वाज
Sun, 28 Jul 2024 11:56 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sun, 28 Jul 2024 11:56 PM IST
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फोटो संख्या:59- कथा के दौरान प्रवचन देते कथाव्यास पंडित हेमराज भारद्वाज-स्रोत- आयोजक
कनीना। गोविंदी बाई धर्मशाला में जारी 10 दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा के आठवें दिन कथा वाचक पंडित हेमराज भारद्वाज ने देव ऋण, ऋषि ऋण, और पितृ ऋण के बारे में बताया। कथा वाचक पंडित हेमराज भारद्वाज ने बताया कि मनुष्य जीवन में तीन ऋण मुख्य है। ये हैं देव ऋण, ऋषि ऋण, और पितृ ऋण। इनमें से देव ऋण यज्ञादि द्वारा, ऋषि ऋण स्वाध्याय और पितृ ऋण को श्राद्ध द्वारा उतारा जाता है। इस ऋण का उतारा जाना जरूरी होता है क्योंकि जिन माता-पिता ने हमें जन्म दिया, हमारी उम्र, आरोग्य और सुख समृद्धि के लिए कार्य और तकलीफें उठाई उनके ऋण से मुक्त हुए बगैर हमारा जन्म निरर्थक है।
पितृ पक्ष में जब सूर्य कन्या राशि में होता है तब पितृ लोक से पृथ्वी पर पितर इस आशा के साथ आते हैं कि उनके पुत्र पौत्र उन्हें पिंडदान कर संतुष्ट करेंगे। ऐसा न होने पर अतृप्त इच्छा लेकर लौटे पितर दुष्ट या बुरी शक्तियों के अधीन हो जाते हैं। जिसके चलते बुरी शक्तियों द्वारा पितरों के माध्यम से परिवारजनों को कष्ट देने की आशंकाएं बढ़ जाती हैं। इसके चलते घर में कलह, झगड़े, पैसे का न रुकना, नौकरी का अभाव, गंभीर बीमारी, हालात अनुकूल होने के बाद भी शादी का न होना या टूटना, बच्चे न होना, या विकलांग बच्चों का होना आदि परेशानियां होने लगती हैं। पितृपक्ष में अपने पितरों का श्राद्ध करने से उनकी अतृप्त इच्छाओं के पूर्ण होने से उनकी मुक्ति के साथ ही परिवारजनों को भी उनकी तकलीफों से मुक्ति मिल जाती है।
इस मौके पर नीलम देवी, विजय कुमार लखेरा, मनोज देवी, राजेंद्र, लक्ष्मी देवी, हेमंत कुमार, पूजा देवी, कमला, विमला, सरोज, सोनू, तारा देवी, सुधा बंसल, सावित्री देवी, सुशीला, सुनीता, मुस्कान सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
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पितृ पक्ष में जब सूर्य कन्या राशि में होता है तब पितृ लोक से पृथ्वी पर पितर इस आशा के साथ आते हैं कि उनके पुत्र पौत्र उन्हें पिंडदान कर संतुष्ट करेंगे। ऐसा न होने पर अतृप्त इच्छा लेकर लौटे पितर दुष्ट या बुरी शक्तियों के अधीन हो जाते हैं। जिसके चलते बुरी शक्तियों द्वारा पितरों के माध्यम से परिवारजनों को कष्ट देने की आशंकाएं बढ़ जाती हैं। इसके चलते घर में कलह, झगड़े, पैसे का न रुकना, नौकरी का अभाव, गंभीर बीमारी, हालात अनुकूल होने के बाद भी शादी का न होना या टूटना, बच्चे न होना, या विकलांग बच्चों का होना आदि परेशानियां होने लगती हैं। पितृपक्ष में अपने पितरों का श्राद्ध करने से उनकी अतृप्त इच्छाओं के पूर्ण होने से उनकी मुक्ति के साथ ही परिवारजनों को भी उनकी तकलीफों से मुक्ति मिल जाती है।
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इस मौके पर नीलम देवी, विजय कुमार लखेरा, मनोज देवी, राजेंद्र, लक्ष्मी देवी, हेमंत कुमार, पूजा देवी, कमला, विमला, सरोज, सोनू, तारा देवी, सुधा बंसल, सावित्री देवी, सुशीला, सुनीता, मुस्कान सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
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