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Mahendragarh-Narnaul News: भगवान श्रीराम और भरत मिलाप की सुनाई कथा
Thu, 06 Jun 2024 01:20 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Thu, 06 Jun 2024 01:20 AM IST
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सतनाली। गांव श्यामपुरा के हनुमान मंदिर में नौ दिवसीय श्रीराम कथा व सत्संग के सातवें दिन श्रद्धालुओं को श्रीराम-भरत मिलाप की कथा सुनाई। महाराज हरिदास ने बताया कि प्रभु श्रीराम को मनाने गए थे, भरत को यह पता चलता है कि प्रभु श्रीराम अपने छोटे भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता के साथ चित्रकूट में ठहरे हुए थे। तब राजकुमार भरत तुरंत ही उनसे मिलने के लिए चित्रकूट की ओर प्रस्थान करते हैं। उनके साथ उनका सैन्य दल भी होता हैं।
चित्रकूट में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता अपनी कुटिया के बाहर शांति पूर्वक बैठे हुए हैं, तभी उन्हें कहीं से पदचाप और इस कारण धूल उड़ती हुई दिखाई देती हैं। भरत अपनी सेना के साथ चित्रकूट पधार रहे हैं। राजकुमार भरत अपने बड़े भाई श्रीराम को देखते हैं, वे उनके पैरों में गिर जाते हैं और उन्हें दंडवत प्रणाम करते हैं। साथ ही साथ उनकी आंखों से अविरल अश्रुधारा बहती हैं। तब राजकुमार भरत पिता महाराज दशरथ की मृत्यु का समाचार बड़े भाई श्रीराम को देते हैं और इस कारण श्री राम, माता सीता और छोटा भाई लक्ष्मण बहुत दुखी होते हैं। अगले दिन भरत श्रीराम को अयोध्या लेकर जाने की बात कहते है। भगवान श्रीराम जाने से मना कर देते हैं। तब राजकुमार भरत बड़े ही दुखी मन से अयोध्या वापस लौटने के लिए प्रस्थान करने की तैयारी करते हैं। तब भरत ने कहा जब तक आप अयोध्या नहीं आ जाते तब तक मुझे आपकी चरण पादुकाएं दे दीजिए। तब श्रीराम अपनी चरण पादुकाएं भरत को दे देते है और भरत उन्हे लेकर अयोध्या लौट जाते है।
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चित्रकूट में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता अपनी कुटिया के बाहर शांति पूर्वक बैठे हुए हैं, तभी उन्हें कहीं से पदचाप और इस कारण धूल उड़ती हुई दिखाई देती हैं। भरत अपनी सेना के साथ चित्रकूट पधार रहे हैं। राजकुमार भरत अपने बड़े भाई श्रीराम को देखते हैं, वे उनके पैरों में गिर जाते हैं और उन्हें दंडवत प्रणाम करते हैं। साथ ही साथ उनकी आंखों से अविरल अश्रुधारा बहती हैं। तब राजकुमार भरत पिता महाराज दशरथ की मृत्यु का समाचार बड़े भाई श्रीराम को देते हैं और इस कारण श्री राम, माता सीता और छोटा भाई लक्ष्मण बहुत दुखी होते हैं। अगले दिन भरत श्रीराम को अयोध्या लेकर जाने की बात कहते है। भगवान श्रीराम जाने से मना कर देते हैं। तब राजकुमार भरत बड़े ही दुखी मन से अयोध्या वापस लौटने के लिए प्रस्थान करने की तैयारी करते हैं। तब भरत ने कहा जब तक आप अयोध्या नहीं आ जाते तब तक मुझे आपकी चरण पादुकाएं दे दीजिए। तब श्रीराम अपनी चरण पादुकाएं भरत को दे देते है और भरत उन्हे लेकर अयोध्या लौट जाते है।
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