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Mahendragarh-Narnaul News: अधिकारियों और कर्मचारियों को मंच संचालन की बारीकियां बताईं
Fri, 31 May 2024 12:04 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Fri, 31 May 2024 12:04 AM IST
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नारनौल।
सूचना, जनसंपर्क, भाषा तथा संस्कृति विभाग की ओर से वीरवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जिला के फील्ड अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए मंच संचालन विधा को लेकर कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इस दौरान गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय हिसार से सीएमटी विभाग के पूर्व चेयरमैन डॉ. मिहिर रंजन पात्रा तथा ऑल इंडिया रेडियो के पूर्व असिस्टेंट डायरेक्टर जैनेंद्र सिंह ने विस्तार से मंच के हर पहलू से अवगत कराया गया है। उन्होंने बताया कि मंच संचालन के दौरान शब्दों के संयोजन में जान होनी चाहिए। एंकर की भाषा बिल्कुल स्पष्ट होनी चाहिए। एक-एक शब्द का चयन पूरी सावधानी के साथ करें। अपनी बात को समय की सीमा के अनुसार विस्तार या संरक्षित में रखें। सूचनाओं को पहले से ही एकत्रित कर लें।
उन्होंने कहा कि हर कार्यक्रम की अपनी एक गरिमा व जरूरत होती है। सभी कार्यक्रमों में मंच संचालक को पूरी तरह से सहज भाव से बोलें। इस मौके पर उन्होंने एंकर की ड्रेस, मंच की जानकारी, भाषा, ऑडियंस को बांधे रखने की कला, अलग-अलग कार्यक्रम के लिए अभ्यास तथा मिनट टू मिनट के बारे में विस्तार के साथ जानकारी दी। इस कार्यशाला में कुल सात सत्र थे। अंत में उन्होंने सभी डीआईपीआरओ से फीडबैक लिया।
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सूचना, जनसंपर्क, भाषा तथा संस्कृति विभाग की ओर से वीरवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जिला के फील्ड अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए मंच संचालन विधा को लेकर कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इस दौरान गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय हिसार से सीएमटी विभाग के पूर्व चेयरमैन डॉ. मिहिर रंजन पात्रा तथा ऑल इंडिया रेडियो के पूर्व असिस्टेंट डायरेक्टर जैनेंद्र सिंह ने विस्तार से मंच के हर पहलू से अवगत कराया गया है। उन्होंने बताया कि मंच संचालन के दौरान शब्दों के संयोजन में जान होनी चाहिए। एंकर की भाषा बिल्कुल स्पष्ट होनी चाहिए। एक-एक शब्द का चयन पूरी सावधानी के साथ करें। अपनी बात को समय की सीमा के अनुसार विस्तार या संरक्षित में रखें। सूचनाओं को पहले से ही एकत्रित कर लें।
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उन्होंने कहा कि हर कार्यक्रम की अपनी एक गरिमा व जरूरत होती है। सभी कार्यक्रमों में मंच संचालक को पूरी तरह से सहज भाव से बोलें। इस मौके पर उन्होंने एंकर की ड्रेस, मंच की जानकारी, भाषा, ऑडियंस को बांधे रखने की कला, अलग-अलग कार्यक्रम के लिए अभ्यास तथा मिनट टू मिनट के बारे में विस्तार के साथ जानकारी दी। इस कार्यशाला में कुल सात सत्र थे। अंत में उन्होंने सभी डीआईपीआरओ से फीडबैक लिया।
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