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Mahendragarh-Narnaul News: रावण-बाणासुर व लक्ष्मण-परशुराम के संवाद पर दर्शकों ने बजाई तालियां

Fri, 04 Oct 2024 12:59 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Fri, 04 Oct 2024 12:59 AM IST
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The audience clapped on the dialogue between Ravana-Banasur and Laxman-Parashuram.
नारनौल। श्री धार्मिक रामलीला ट्रस्ट चांदुवाड़ा के रंगमंच पर बुधवार रात फुलवारी, सीता स्वयंवर, शिव धनुष व लक्ष्मण परशुराम संवाद की लीला का मनमोहक मंचन किया गया।
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बुधवार को रामलीला मंचन में दुलीचंद संघी ट्रस्ट चेन्नई से अमित गुप्ता मुख्य अतिथि रहे, वहीं जिला जेल पुलिस अधीक्षक संजय बांगड व रोहताश अग्रवाल विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। अतिथियों द्वारा दी प्रज्ज्वलित कर रामलीला का शुभारंभ किया गया। रात को रामलीला में पुष्प वाटिका में फूल तोड़ते हुए प्रभु राम की मुलाकात राजकुमारी सीता से होती है। इसके बाद गुरु विश्वामित्र राम व लक्ष्मण को साथ लेकर सीता स्वयंवर में भाग लेने जनकपुरी जाते हैं। जहां राजा जनक ने सीता के विवाह के लिए भगवान शिव के धनुष को तोड़ने की शर्त रखी। समस्त देशों से पधारे राजा महाराजा शिव धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाना तो दूर, धनुष को हिला तक नहीं पाए। तब वहां पर रावण और बाणासुर के संवाद होता है। उसके बाद जब रावण धनुष उठाने जाता है, तब आकाशवाणी होती है कि रावण तुम्हारी लंका में हाहाकार मचा है और रावण वहां से चला जाता है। इसके बाद राजा जनक दुखी होकर कहते हैं कि क्या ये पृथ्वी वीरो से खाली हो गई है।
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उनकी बातें सुनकर लक्ष्मण क्रोधित हो जाते हैं और कहते हैं कि उनके प्रभु राम के होते हुए कुछ भी असंभव नहीं हैं। तब गुरु विश्वामित्र राम को आज्ञा देते हैं और कहते हैं कि उठहु राम भंजहु भव चापा, मेटहु तात जनक परितापा। आज्ञा पाकर प्रभु राम पल भर में ही धनुष को उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाते हैं और धनुष टूट जाता है। तब धनुष के टूटने की भयंकर गर्जना से भगवान परशुराम गुस्से से लाल होकर राजा जनक के दरबार में आते हैं और शिव धनुष टूटने का कारण पूछते हैं। राजा जनक बताते हैं कि उन्होंने सीता के स्वयंवर के लिए धनुष को तोड़ने की शर्त रखी थी। ये सुनकर भगवान परशुराम आग बबूला होकर पूछते हैं कि किसमें इतना साहस हुआ जो मेरे आराध्य भगवान शिव के धनुष को तोड़ने की हिम्मत की। यह सुनकर लक्ष्मण गुस्से में लाल होकर परशुराम के सामने आते हैं, तब परशुराम और लक्ष्मण के जोशीले संवाद होते हैं। इसके बाद भगवान राम परशुराम को कहते हैं कि प्रभु यह काम कोई और नहीं सिर्फ आपका कोई सेवक ही कर सकता है। अंत में प्रभु राम और माता सीता के विवाह की लीला के बाद बुधवार की रामलीला को विराम दिया जाता हैं। इस मौके पर संरक्षक शिम्भु दयाल गर्ग, जगदीश भारद्वाज, संजय गर्ग, दीपक हरित, दीपक वर्मा, संदीप शुक्ला, नरेंद्र जैन, बलवान सैनी, विनोद सर्राफ, मनमोहन सोनी, सुभाष कौशिक, सुभाष चौधरी तथा चिराग सर्राफ आदि मौजूद रहे।
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