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बादोपहर 1:31 बजे से बंधेगी राखी,10.27 घंटे रहेगा भद्रा का साया
Mon, 19 Aug 2024 01:08 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Mon, 19 Aug 2024 01:08 AM IST
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नारनौल। रक्षाबंधन के पर्व को लेकर रविवार के दिन भी बाजारों में दिनभर रौनक रही। सोमवार को रक्षाबंधन होने के चलते महिलाओं ने राखी, कपड़ों व मिठाई की जमकर खरीदारी की।
पर्व को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह रहा। इसके चलते भी बाजारों में भारी भीड़ रही और कई जगह जाम भी लगा रहा। सबसे ज्यादा जाम शहर के मुख्य महाबीर चौक पर लगा रहा। यहां चारों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लगी रही। महाबीर चौक से महेंद्रगढ़ मार्ग, रेवाड़ी मार्ग व सिंघाना मार्ग पर वाहन जाम में आधे-आधे घंटे तक फंसे रहे। जाम में फंसे वाहनों को नियंत्रित करने के लिए ट्रैफिक पुलिस को भी भारी मशक्कत करनी पड़ी।
सोमवार को सुबह 3:04 बजे भद्रा शुरू होगी व दोपहर 1:31 बजे समाप्त होगी। धर्म शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल में राखी बांधना शुभ नहीं होता। 19 अगस्त को दोपहर 1:30 बजे के बाद राखी बांधना शुभ है। इस दिन श्रावणी उपाकर्म का भी आयोजन किया जाता है। इसके अंतर्गत शिखा सूत्र धारी ब्राह्मण कमर तक जल में खड़े होकर देव, ऋषि व पितरों का तर्पण करते हैं। तत्पश्चात पुराना यज्ञोपवीत बदलकर नया यज्ञोपवीत धारण करते हैं। श्रावणी उपाकर्म ब्राह्मणों का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है।
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क्रांति निर्मल, आचार्य नारनौल
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पर्व को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह रहा। इसके चलते भी बाजारों में भारी भीड़ रही और कई जगह जाम भी लगा रहा। सबसे ज्यादा जाम शहर के मुख्य महाबीर चौक पर लगा रहा। यहां चारों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लगी रही। महाबीर चौक से महेंद्रगढ़ मार्ग, रेवाड़ी मार्ग व सिंघाना मार्ग पर वाहन जाम में आधे-आधे घंटे तक फंसे रहे। जाम में फंसे वाहनों को नियंत्रित करने के लिए ट्रैफिक पुलिस को भी भारी मशक्कत करनी पड़ी।
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सोमवार को सुबह 3:04 बजे भद्रा शुरू होगी व दोपहर 1:31 बजे समाप्त होगी। धर्म शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल में राखी बांधना शुभ नहीं होता। 19 अगस्त को दोपहर 1:30 बजे के बाद राखी बांधना शुभ है। इस दिन श्रावणी उपाकर्म का भी आयोजन किया जाता है। इसके अंतर्गत शिखा सूत्र धारी ब्राह्मण कमर तक जल में खड़े होकर देव, ऋषि व पितरों का तर्पण करते हैं। तत्पश्चात पुराना यज्ञोपवीत बदलकर नया यज्ञोपवीत धारण करते हैं। श्रावणी उपाकर्म ब्राह्मणों का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है।
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क्रांति निर्मल, आचार्य नारनौल