{"_id":"66b12f5bcf8b595b75007b37","slug":"progressive-teachers-trust-scattered-seeds-in-nuh-valley-narnol-news-c-196-1-nnl1004-114804-2024-08-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mahendragarh-Narnaul News: प्रगतिशील शिक्षक ट्रस्ट ने नूंह की घाटी में बीजों का किया बिखराव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mahendragarh-Narnaul News: प्रगतिशील शिक्षक ट्रस्ट ने नूंह की घाटी में बीजों का किया बिखराव
Tue, 06 Aug 2024 01:30 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Tue, 06 Aug 2024 01:30 AM IST
विज्ञापन
नारनौल। अरावली के वन क्षेत्र को हरा-भरा बनाने का प्रगतिशील शिक्षक ट्रस्ट नारनौल का प्रयास अब विस्तृत स्वरूप लेता जा रहा है। रविवार शाम को ट्रस्ट के सौजन्य से नूंह घाटी में अनोखा बीजारोपण अभियान चलाया गया।
ट्रस्ट के अध्यक्ष संजय शर्मा ने बताया कि क्षेत्र के हरित आवरण को बढ़ाने के लिए प्रगतिशील शिक्षक ट्रस्ट नारनौल ने बीज बोने की अपनी पद्धति से हटकर विशेष रूप से डिजाइन किए गए ड्रोन के माध्यम से बीज बिखराव की पद्धति के संकल्प के तहत 28 जुलाई से 10 लाख बीजों के बिखराव का प्रकल्प शुरू किया था। इस कड़ी में रविवार को ट्रस्ट के सदस्यों ने मेवात क्षेत्र के नूंह की घाटी में दो लाख बीजों का बिखराव किया गया। ट्रस्ट के अध्यक्ष संजय शर्मा ने बताया कि ट्रस्टी भीम सेन शर्मा, सतीश सैनी और ट्रस्टी अमित शर्मा की टीम ने सघन पहाड़ी क्षेत्र में नीम, कीकर, खैर, जाटी जैसी अरावली के अनुकूल प्रजाति के बीजों का बिखराव किया ताकि ये पौधे बिना किसी अतिरिक्त देखभाल के क्षेत्र की प्रकृति के अनुसार पौधों का अकार ले सकें।
विज्ञापन
ट्रस्ट के अध्यक्ष संजय शर्मा ने बताया कि क्षेत्र के हरित आवरण को बढ़ाने के लिए प्रगतिशील शिक्षक ट्रस्ट नारनौल ने बीज बोने की अपनी पद्धति से हटकर विशेष रूप से डिजाइन किए गए ड्रोन के माध्यम से बीज बिखराव की पद्धति के संकल्प के तहत 28 जुलाई से 10 लाख बीजों के बिखराव का प्रकल्प शुरू किया था। इस कड़ी में रविवार को ट्रस्ट के सदस्यों ने मेवात क्षेत्र के नूंह की घाटी में दो लाख बीजों का बिखराव किया गया। ट्रस्ट के अध्यक्ष संजय शर्मा ने बताया कि ट्रस्टी भीम सेन शर्मा, सतीश सैनी और ट्रस्टी अमित शर्मा की टीम ने सघन पहाड़ी क्षेत्र में नीम, कीकर, खैर, जाटी जैसी अरावली के अनुकूल प्रजाति के बीजों का बिखराव किया ताकि ये पौधे बिना किसी अतिरिक्त देखभाल के क्षेत्र की प्रकृति के अनुसार पौधों का अकार ले सकें।
विज्ञापन