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Mahendragarh-Narnaul News: बारिश की आशंका के बीच खुले में पड़ा बाजरा
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फोटो नंबर- 13अटेली स्थित अनाज मंडी में बने टीन शेड के नीचे रखे बाजरे के बैग। संवाद
नारनौल/मंडी अटेली। मंडियों में गांवों के शेड्यूल के चलते बाजरे की आवक सिमित बनी हुई है। वहीं बाजरे की खरीद भी जे-फार्म के तहत व्यापारियों की ओर से की जा रही है लेकिन फिर भी मंडियों में टीन शेड़ के नीचे रखे बाजरे के बैग का उठान धीमा बना हुआ है। जिस कारण अधिकतर किसानों को खुले में बाजरे की ढेरी लगानी पड़ती है।
वहीं क्षेत्र में अक्तूबर के अंत व नवंबर माह की शुरूआत में बारिश की संभावना बनी हुई है। ऐसे में अगर कोई किसान मंडी में खुले में बाजरे की ढेरी लगाता है तो उसे फसल खराब होने की संभावना बनी रहेगी।
वहीं जिन व्यापारियों की दुकाने टीन शेड से दूर बनी हुई है, वह बाजरे की ढेरी दुकान के पास लगवा लेते हैं। लेकिन व्यापारियों की ओर से खरीद के लिए बोली दोपहर 2 बजे के आस-पास लगाई जाती है। जिसके चलते करीब दो से तीन घंटे तक किसानों का बाजरा खुले में रहता है और बारिश आने पर खराब होने की संभावना बनी रहती है।
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किसान के लिए मौसम कभी आपदा बनकर आता है तो कभी खुशियों की सौगात लेकर। मौसम की अनिश्चितता किसान से बेहतर कोई नहीं जानता। मंडी में बाजरा बेचने आने वाले अधिकतर किसान तेज धूप के दौरान भी साथ तिरपाल लेकर आते हैं, ताकि बारिश आने पर बाजरे को बचाव किया जा सकें।
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वहीं क्षेत्र में अक्तूबर के अंत व नवंबर माह की शुरूआत में बारिश की संभावना बनी हुई है। ऐसे में अगर कोई किसान मंडी में खुले में बाजरे की ढेरी लगाता है तो उसे फसल खराब होने की संभावना बनी रहेगी।
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वहीं जिन व्यापारियों की दुकाने टीन शेड से दूर बनी हुई है, वह बाजरे की ढेरी दुकान के पास लगवा लेते हैं। लेकिन व्यापारियों की ओर से खरीद के लिए बोली दोपहर 2 बजे के आस-पास लगाई जाती है। जिसके चलते करीब दो से तीन घंटे तक किसानों का बाजरा खुले में रहता है और बारिश आने पर खराब होने की संभावना बनी रहती है।
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किसान के लिए मौसम कभी आपदा बनकर आता है तो कभी खुशियों की सौगात लेकर। मौसम की अनिश्चितता किसान से बेहतर कोई नहीं जानता। मंडी में बाजरा बेचने आने वाले अधिकतर किसान तेज धूप के दौरान भी साथ तिरपाल लेकर आते हैं, ताकि बारिश आने पर बाजरे को बचाव किया जा सकें।