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सत्य और धर्म को कोई भी शक्ति लंबे समय तक दबा नहीं सकती : पंडित
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फोटो संख्या:80- गांव बाघोत के बाघेश्वर धाम पर श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रद्धालुओं को कथा सुना
सेहलंग। गांव बाघोत में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य अवतार, बाल लीलाओं की कथा सुनाई गई। कथा व्यास पंडित राकेश कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य अवतार, बाल लीलाओं और धर्म स्थापना के उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्हाेंने कहा कि जब पृथ्वी पर पाप, अत्याचार और अधर्म का बोलबाला बढ़ गया व कंस जैसे अत्याचारी शासकों के अत्याचारों से जनता त्रस्त हो गई, तब भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लेकर धर्म की पुनः स्थापना की।
उन्होंने श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भगवान ने कारागार में जन्म लेकर यह संदेश दिया कि सत्य और धर्म को कोई भी शक्ति लंबे समय तक दबा नहीं सकती। कथा में वासुदेव द्वारा नवजात कृष्ण को यमुना पार कर गोकुल पहुंचाने, पूतना वध, तृणावर्त वध, शकटासुर वध तथा माखन चोरी जैसी बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया गया।
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इन प्रसंगों को सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीला मानव जीवन को प्रेम, करुणा, सेवा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। कृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन कर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया।
महिलाओं ने मंगल गीत गाए व श्रद्धालुओं ने नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की के जयकारों से कथा स्थल को गुंजायमान कर दिया। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपनाकर समाज में प्रेम, सद्भाव और संस्कारों का संदेश फैलाएं। कथा के अंत में आरती करके श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
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उन्हाेंने कहा कि जब पृथ्वी पर पाप, अत्याचार और अधर्म का बोलबाला बढ़ गया व कंस जैसे अत्याचारी शासकों के अत्याचारों से जनता त्रस्त हो गई, तब भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लेकर धर्म की पुनः स्थापना की।
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उन्होंने श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भगवान ने कारागार में जन्म लेकर यह संदेश दिया कि सत्य और धर्म को कोई भी शक्ति लंबे समय तक दबा नहीं सकती। कथा में वासुदेव द्वारा नवजात कृष्ण को यमुना पार कर गोकुल पहुंचाने, पूतना वध, तृणावर्त वध, शकटासुर वध तथा माखन चोरी जैसी बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया गया।
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इन प्रसंगों को सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीला मानव जीवन को प्रेम, करुणा, सेवा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। कृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन कर भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया।
महिलाओं ने मंगल गीत गाए व श्रद्धालुओं ने नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की के जयकारों से कथा स्थल को गुंजायमान कर दिया। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपनाकर समाज में प्रेम, सद्भाव और संस्कारों का संदेश फैलाएं। कथा के अंत में आरती करके श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।