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Mahendragarh-Narnaul News: श्रीमद्भागवत कथा में वामन अवतार व सती चरित्र का प्रसंग सुनाया
Thu, 08 Aug 2024 01:02 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Thu, 08 Aug 2024 01:02 AM IST
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फोटो संख्या:71- गांव भगड़ाना में आयोजित श्रीमद्भावत कथा में झांकी निकालते आयोजक--स्रोत- आयोजक
महेंद्रगढ़। गांव भगड़ाना में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं वामन अवतार व सती चरित्र की कथा सुनाई गई। वीरवार को कथा में जितेंद्र यादव व धर्म पत्नी प्रमिला, प्रदीप यादव उनकी पत्नी सरोज देवी, अंजू देवी पत्नी राजबीर यादव यजमान के रूप में शामिल रहे।
कथा व्यास पंडित कुलदीप शास्त्री ने बताया कि जब देवताओं पर अत्याचार होने लगा श्री हीन हो गए तो मां अदिति कश्यप से प्रार्थना की और पयोव्रत बताया, जिसके प्रभाव से वामन भगवान का जन्म हुआ।
राजा बलि के पास जब भिक्षा लेने गए तब वामन भगवान ने उनकी परीक्षा ली। क्योंकि जब अभिमान से युक्त होकर जीव अपने आपको सब कुछ समझता है तो भगवान परीक्षा लेते है और सब कुछ समर्पण कर देता। तन मन धन तो परमात्मा उसको अपनी शरणागति प्रदान कर उद्धार कर देते है। उन्होंने बताया कि सती चरित्र देवी सती पति की आज्ञा का उल्लंघन करके गई तो वापस नहीं आ सकीं। इसलिए कभी भी माता-पिता गुरु पति की आज्ञा का उल्लंघन कभी नहीं करना चाहिए। क्योंकि इनके अपमान की ज्वाला से सर्वस्व विनाश हो जाता है।
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कथा व्यास पंडित कुलदीप शास्त्री ने बताया कि जब देवताओं पर अत्याचार होने लगा श्री हीन हो गए तो मां अदिति कश्यप से प्रार्थना की और पयोव्रत बताया, जिसके प्रभाव से वामन भगवान का जन्म हुआ।
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राजा बलि के पास जब भिक्षा लेने गए तब वामन भगवान ने उनकी परीक्षा ली। क्योंकि जब अभिमान से युक्त होकर जीव अपने आपको सब कुछ समझता है तो भगवान परीक्षा लेते है और सब कुछ समर्पण कर देता। तन मन धन तो परमात्मा उसको अपनी शरणागति प्रदान कर उद्धार कर देते है। उन्होंने बताया कि सती चरित्र देवी सती पति की आज्ञा का उल्लंघन करके गई तो वापस नहीं आ सकीं। इसलिए कभी भी माता-पिता गुरु पति की आज्ञा का उल्लंघन कभी नहीं करना चाहिए। क्योंकि इनके अपमान की ज्वाला से सर्वस्व विनाश हो जाता है।
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