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प्रवासी मजदूरों को पड़े रोजी रोटी के लाले, भूखे-प्यासे पैदल लौटने को हुए मजबूर

Sat, 28 Mar 2020 09:24 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 28 Mar 2020 09:24 PM IST
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Migrant laborers were forced to return on foot, hungry and thirsty
निजामपुर से अजमेर पैदल जाते मजदूर। - फोटो : Narnol
कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के कारण प्रवासी श्रमिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लॉकडाउन के कारण प्रवासी मजदूर पैदल ही अपने गंतव्य स्थान पर पहुंच रहे हैं। प्रशासन द्वारा ऐसे मजदूरों को रहने व खाने पीने का कोई प्रबंध नहीं है। जिससे प्रवासी मजदूर भूखे प्यासे पैदल ही अपने घरों को लौट रहे हैं।
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क्षेत्र में इन दिनों नेशनल हाईवे के निर्माण कार्य समेत अन्य प्रोजेक्ट पर काम चल रहा था। इसके अलावा फसल की कटाई कार्य के चलते यूपी, मध्य प्रदेश, बिहार व राजस्थान से मजदूर आते हैं। फसल कटाई का फरवरी के अंत से शुरू होकर अप्रैल तक चलता है। ये मजदूर सरसों व गेहूं फसल की कटाई के बाद लौटते हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर इन मजदूरों को मजदूरी नहीं मिल रही है। ये मजदूर पूरे परिवार के साथ मजदूरी करने के लिए निकलते हैं। किसान खुद अपने परिवार के साथ फसल कटाई में लगा है। जिससे इन मजदूरों को मजदूरी न मिलने के कारण रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है।
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दूसरी ओर रेवाड़ी-नारनौल एनएच, नांगल चौधरी से पटीकरा बार्डर तक एनएच, ग्रीन कोरिडोर व मेडिकल कॉलेज के निर्माण कार्य को लेकर हजारों की संख्या में श्रमिक अन्य राज्यों से आए हैं। कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए लॉकडाउन से अचानक काम बंद हो गया है। श्रमिकों ने बताया कि नारनौल-नांगल चौधरी हाईवे पर कार्य कर रहे थे। 21 दिन तक काम बंद होने से ठेकेदार ने हाथ खड़े कर दिए। इससे उन्हें अपने गांव जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। करीब एक दर्जन श्रमिक शुक्रवार की रात निजामपुर से पैदल नारनौल पहुंचे।
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महावीर चौक पर श्रमिकों ने बताया कि दिल्ली के बाद उन्हें सहारनपुर (यूपी) जाना है। ऐसे में रातभर पैदल चलकर दिल्ली पहुंचेंगे। दूसरी ओर राजस्थान व गुजरात के श्रमिक भी पैदल अपने गांव जाने को मजबूर हैं। हालांकि इन श्रमिकों को कुछ लोगों ने खाना देखकर मदद की। लेकिन रुकने के इंतजाम न होने से उन्हें जाना पड़ा।
मकान मालिक किराये का बना रहे थे दबाव
दिल्ली में एक आईटी कंपनी में कार्यरत वैभव ने बताया कि कंपनी बंद है। मकान मालिक किराए के लिए दबाव बना रहे थे। ऐसे में सामान दोस्त के कमरे में रखकर शुक्रवार शाम को दिल्ली से चला था। उन्होंने बताया कि बीच में लिफ्ट लेकर सुबह नारनौल पहुंचा हूं। अब पिलानी जाने के लिए किसी की मदद का इंतजार कर रहा हूं। सूरत से एक व्यक्ति अटेली शुक्रवार की रात दस बजे पहुंचा।
सूरत से बैदल और ट्रक के सहारे पहुंचा
हीरो होंडा चौक पर युवक ने बताया सूरत में भी अनिश्चितता का माहौल है। ट्रक व पैदल चलकर नारनौल तक पहुंचा हूं। युवक ने अस्पताल में अपनी जांच कराने के बाद गांव जाने का फैसला लिया। अमरजीत, अशोक व कबूल समेत अन्य ने बताया कि ईंट भट्ठा बंद होने से अजमेर राजस्थान पैदल जा रहे हैं। उनका कहना है कि ठेकेदार ने मदद करने से हाथ खड़ा कर दिया है।
लोगों की सुविधा के लिए 24 घंटे खुले रहेंगे छह रैन बसेरे : डीसी
कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन के कारण गरीब व यात्रा के दौरान फंसे हुए लोगों व मजदूरों की सहायता के लिए जिला के विभिन्न स्थानों पर अस्थाई रैन बसेरे की व्यवस्था की गई है। लोगों की सुविधा के लिए ये रैन बसेरे 24 घंटे खुले रहेंगे। डीसी जगदीश शर्मा ने बताया कि नारनौल के सामान्य अस्पताल व बस स्टैंड व अटेली में सामान्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में व्यवस्था की गई है। वही नांगल चौधरी में बैजनाथ कॉम्पलेक्स, महेंद्रगढ़ व कनीना में नगर पालिका कार्यालय को अस्थाई रूप से रैन बसेरा बनाया गया है। इसके लिए नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी अभय सिंह यादव को नोडल अधिकारी बनाया गया है। कोई भी नागरिक मोबाइल नंबर 9416216410 पर संपर्क कर सकता है। रैन बसेरा के अतिरिक्त जिला में स्थित धर्मशाला में भी जरूरतमंदों के लिए रात को ठहरने का प्रबंध किया गया है। इस आपदा की घड़ी में प्रशासन को समाजसेवियों से भी पूरा सहयोग मिल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा हर संभव प्रयास किया जा रहा है कि किसी भी व्यक्ति को खाने व रहने की कोई दिक्कत न हो।

शुक्रवार की शाम को कई श्रमिकों को खाना उपलब्ध कराया गया था। जरूरतमंदों को आगे भी खाना उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही शहर में कई सामाजिक संगठन इस कार्य में लगे हैं। आपदा के समय लोगों को गरीबों की मदद करनी चाहिए।
भारती सैनी, चेयरपर्सन नप
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